झांसी में विकसित भारत संकल्प सम्मेलन आयोजित, किसानों ने साझा किए प्राकृतिक खेती के सफलता अनुभव
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झांसी में विकसित भारत संकल्प सम्मेलन आयोजित, किसानों ने साझा किए प्राकृतिक खेती के सफलता अनुभव


झांसी, 19 जून 2026। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सुशासन, सेवा और जनकल्याण के 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर पंडित दीनदयाल उपाध्याय सभागार में जनपद स्तरीय विकसित भारत संकल्प सम्मेलन, विकास प्रदर्शनी और प्राकृतिक खेती कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, सांसद अनुराग शर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष पवन गौतम, विधायक जवाहर लाल राजपूत, डॉ. रश्मि आर्या, राजीव सिंह परिछा, एमएलसी रामतीर्थ सिंघल, रमा निरंजन, डॉ. बाबूलाल तिवारी, भाजपा जिलाध्यक्ष प्रदीप पटेल, महानगर अध्यक्ष सुधीर सिंह, मुख्य विकास अधिकारी रामेश्वर सुधाकर सब्बनवाड सहित बड़ी संख्या में किसान, अधिकारी और नागरिक उपस्थित रहे।


कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन और विकास प्रदर्शनी के अवलोकन के साथ हुआ। अतिथियों ने विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का निरीक्षण कर योजनाओं और उपलब्धियों की जानकारी प्राप्त की।


मुख्य सत्र को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में देश ने विकास, आत्मनिर्भरता और जनकल्याण के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड का विकास केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है और क्षेत्र में सिंचाई, पेयजल तथा कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के लिए लगातार कार्य किया जा रहा है। उन्होंने किसानों से प्राकृतिक खेती अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि इससे कृषि लागत कम होगी और भूमि की उर्वरा शक्ति भी सुरक्षित रहेगी।


सांसद अनुराग शर्मा ने किसानों को प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ने का आह्वान करते हुए कहा कि इससे न केवल स्वास्थ्य बेहतर होगा बल्कि कृषि भी अधिक लाभकारी बनेगी। उन्होंने बताया कि उनका परिवार लंबे समय से प्राकृतिक खेती से जुड़ा रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि बुंदेलखंड क्षेत्र के किसानों को इसका व्यापक लाभ मिल रहा है। साथ ही उन्होंने गौ-आधारित खेती और जैविक संसाधनों के उपयोग को बढ़ावा देने की बात कही।


प्राकृतिक खेती कार्यशाला में कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को जीवामृत, बीजामृत, घनजीवामृत, मल्चिंग, फसल विविधीकरण और जैविक संसाधनों के उपयोग संबंधी जानकारी दी। विशेषज्ञों ने बताया कि प्राकृतिक खेती से उत्पादन लागत घटती है, मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार होता है और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलता है।


तकनीकी सत्र में कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. अतीक अहमद ने सब्जियों की वैज्ञानिक खेती, आधुनिक नर्सरी प्रबंधन, जलभराव क्षेत्रों के लिए उपयुक्त किस्मों के चयन तथा जैविक कीट एवं रोग प्रबंधन पर विस्तार से जानकारी दी।


कार्यक्रम के दौरान ब्लॉक चिरगांव के ग्राम रमपुरा के प्रगतिशील किसान अवधेश प्रताप सिंह 'लल्ला' ने अपनी सफलता की कहानी साझा की। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती और गौ-आधारित कृषि पद्धतियों को अपनाकर उन्होंने खेती की लागत कम की और आय में वृद्धि हासिल की। उन्होंने किसानों को जीवामृत और बीजामृत के उपयोग से होने वाले लाभों की जानकारी भी दी। इस अवसर पर प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने वाले किसानों अवधेश प्रताप सिंह और गुंचीलाल को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।


कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने विकसित भारत के संकल्प को आगे बढ़ाने तथा प्राकृतिक खेती और जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया। इस अवसर पर उप कृषि निदेशक बुद्धिदेव द्विवेदी, जिला कृषि अधिकारी, जिला पंचायत राज अधिकारी, जिला उद्यान अधिकारी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

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