प्रयागराज से प्राप्त जानकारी के आधार पर आपके लिए तैयार की गई समाचार रिपोर्ट यहाँ दी गई है:
रेलकर्मियों के लिए खुशखबरी: अब इलाज के बाद 'वापसी पास' के लिए नहीं काटने होंगे चक्कर, नियमों में बड़ा सुधार
प्रयागराज। भारतीय रेलवे ने अपने लाखों कर्मचारियों और उनके आश्रितों को बड़ी राहत देते हुए 'मेडिकल स्पेशल पास' के नियमों में महत्वपूर्ण सुधार किया है। अक्सर गंभीर बीमारी के इलाज के लिए दूसरे शहर जाने वाले रेल कर्मियों को अब वापसी का पास बनवाने के लिए प्रशासनिक दफ्तरों की 'दौड़-भाग' से मुक्ति मिल जाएगी।
क्या था पुराना नियम और समस्या?
अब तक के नियमों के अनुसार, यदि कोई रेल कर्मचारी इलाज के लिए अपने जोन से बाहर किसी दूसरे शहर के रेलवे अस्पताल जाता था, तो उसे घर वापसी के लिए वहां के स्थानीय रेलवे कार्यालय से अनुमति (Endorsement) लेनी पड़ती थी। अक्सर अधिकारी पास पर जरूरी मुहर या हस्ताक्षर करने में देरी करते थे। यदि अस्पताल में इलाज लंबा खिंच जाता और शुरुआती पास की तारीख निकल जाती, तो मरीज और उसके परिजनों को नया पास बनवाने में भारी मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना झेलनी पड़ती थी।
नए नियम से क्या बदलेगा?
रेलवे बोर्ड की डिप्टी डायरेक्टर (वेलफेयर) रश्मि दहिया द्वारा जारी ताजा आदेश के अनुसार, अब व्यवस्था को बेहद सरल बना दिया गया है:
अग्रिम अनुमोदन (Advance Endorsement): अब पास जारी करने वाले अधिकारी पास देते समय ही उस पर स्पष्ट मुहर और हस्ताक्षर करेंगे। इसका अर्थ यह होगा कि गंतव्य शहर का रेलवे प्रशासन बिना किसी अतिरिक्त औपचारिकता के मरीज को वापसी यात्रा के लिए पास जारी करने हेतु अधिकृत होगा।
दस्तावेजों की सरलता: अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद, कर्मचारी को केवल पुराने मेडिकल पास की कॉपी, रेल टिकट और अस्पताल की 'डिस्चार्ज समरी' दिखानी होगी। इन दस्तावेजों के आधार पर यह मान लिया जाएगा कि मरीज का रुकना डॉक्टरी सलाह पर था और उसे तुरंत वापसी का पास मिल जाएगा।
तत्काल प्रभाव से लागू
रेलवे बोर्ड ने यह आदेश उत्तर मध्य रेलवे (NCR) सहित देश के सभी जोनल रेलवे और उत्पादन इकाइयों को भेज दिया है। यह नया नियम तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है, जिससे इलाज के दौरान कर्मचारियों के प्रशासनिक तनाव को कम किया जा सके।
