प्रदीप बच्चन (व्युरो चीफ)
बलिया (यूपी)। गंगा और घाघरा नदी की बाढ़ एवं कटान से प्रभावित लोगों की समस्याओं को लेकर 13 अक्टूबर को कलेक्ट्रेट परिसर में धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। धरने को सफल बनाने के लिए नदी कटान खेती एवं गांव बचाओ संघर्ष समिति बलिया की संयोजक अंजू की अध्यक्षता में मनियर में बैठक हुई। इसमें सुल्तानपुर और खादीपुर गांव के समिति कार्यकर्ताओं ने अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने का निर्णय लिया।
बैठक में अंजू ने कहा कि बाढ़ और कटान से प्रभावित परिवारों को स्थायी राहत दिलाने के लिए सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए। जिन लोगों के घर और खेत नदी में समा गए हैं तथा जिनकी फसलें बर्बाद हुई हैं, उन्हें तत्काल उचित मुआवजा दिया जाए। साथ ही विस्थापित परिवारों के पुनर्वास और आजीविका की व्यवस्था की जाए।
उन्होंने मांग की कि वर्ष 2000 से अब तक बाढ़ एवं कटान से बचाव के लिए जिले में आए सरकारी धन और उसके उपयोग का पूरा ब्योरा सार्वजनिक किया जाए। बाढ़ राहत सामग्री वितरण में हुई कथित अनियमितताओं की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग भी उठाई।
अंजू ने कहा कि बाढ़ और कटान की समस्या हर वर्ष लोगों के सामने आती है। इससे स्थायी मुक्ति के लिए प्रभावित लोगों को एकजुट होकर संघर्ष करना होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि बचाव कार्यों के लिए आवंटित धन का पारदर्शी और योजनाबद्ध तरीके से उपयोग किया गया होता तो स्थिति बेहतर हो सकती थी।
उन्होंने शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों से भी आंदोलन में शामिल होने की अपील करते हुए कहा कि गंगा और घाघरा के कटान से पूरे जिले के अस्तित्व पर खतरा पैदा हो सकता है। इसलिए इसका स्थायी समाधान जरूरी है।
धरना-प्रदर्शन मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को सुबह 11 बजे कलेक्ट्रेट परिसर में आयोजित होगा। बैठक में राजाराम, उषा देवी, सुरेंद्र, शिवजी, मनकिया देवी, परशुराम और कन्हैया सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

