प्रयागराज: यूपी बोर्ड की इंटर और हाईस्कूल की परीक्षाएं 24 मार्च से शुरू हो चुकी हैं। परीक्षाएं शुरू होने से पहले और उसके साथ ही छात्र-छात्राओं के आत्महत्या करने का सिलसिला भी शुरू हो चुका है। बीते 9 दिनों में यूपी में पांच स्टूडेंट मौत को गले लगा चुके हैं। इन आत्मघाती कदमों का कारण छात्रों के मन में बसा फेल होने का वो डर है, जिसे हर साल हजारों छात्र महसूस करते हैं।
आत्महत्या करने वाले इन छात्रों में किसी का पेपर खराब हो गया, तो किसी को डर था कि वो इस बार भी पास नहीं होगा। अच्छे अंक लाने का तनाव इस कदर छात्रों के मन में बैठ गया कि उन्होंने पेपर देने से पहले ही मौत को गले लगा लिया।
फेल होने से अच्छा है कि मर जाऊं
प्रयागराज के बरहल गांव के 16 साल के अकालू ने बोर्ड परीक्षा से एक दिन पहले खुदखुशी करके जान दे दी। अकालू के पिता लालजी कुशवाहा ने रोते हुए बताया कि तीन बेटों में सबसे छोटा अकालू था। हम तो किसानी करके बच्चों को पढ़ा रहे हैं। अबकी बार अकालू को दसवीं की परीक्षा दिलानी थी, लेकिन इससे पहले ही वह आत्मघाती कदम उठा लेगा, यह सोचा नहीं था। अकालू का शव महुआ के पेड़ पर फंदे से लटका मिला।
पेड़ के पास दफ्ती में लिखा सुसाइड नोट मिला, जिसमें अकालू ने खुदखुशी का कारण फेल होने का वो डर बताया था, जो पिछले एक साल से उसके मन में चल रहा था। अकालू उस डर को अपने अंदर एक साल से दबाए हुए था। बोर्ड परीक्षा शुरू होने के साथ ही वह डर फूट पड़ा। पिछले साल अकालू हाईस्कूल में फेल हो गया था। उसे डर था कि इस बार भी वह फेल हो जाएगा और इसी डर की वजह से उसने आत्महत्या कर ली।
पेपर से एक दिन पहले यमुना में कूदी अंजली
यूपी बोर्ड की 12वीं की परीक्षा के एक दिन पहले यमुनापार थाना पुलिस के पास खबर आई कि यमुना में कोई लाश तैर रही है। पुलिस ने गोताखोरों की मदद से लाश निकलवाई, शिनाख्त की तो पता चला ये वह बारहवीं की छात्रा थी, जिसका एक दिन बाद बोर्ड पेपर था। अलीगढ़-मथुरा मार्ग पर बने यमुना पुल से इस लड़की ने छलांग लगाकर जान दे दी थी। उसे पेपर में फेल होने का खौफ था।
पता चला कि यमुनापार थाना, लक्ष्मीनगर के रहने वाले राजेश की 17 साल की बेटी अंजली बाजार गई और फिर वापस घर नहीं लौटी। चिंता पर परिजन उसे खोजते हुए यमुना पुल पहुंचे, तो वहां पुल के पास बेटी की चप्पलें मिलीं। MTS स्कूल में पढ़ने वाली अंजली ने एग्जाम से एक दिन पहले ही जान दे दी। अंजली के पिता राजेश होमगार्ड हैं, पुलिस को बताया कि बेटी सामान लाने बाजार गई थी, उसकी पढ़ाई सही चल रही थी। हमने कभी उस पर नंबरों का दबाब नहीं बनाया फिर उसने ऐसा क्यों किया?
पेपर की तैयारी न होने पर फंदे पर लटकी मुरादाबाद की छात्रा 23 मार्च को मुरादाबाद के थाना छजलैट गांव में बीते गुरुवार को छात्रा ने फांसी लगाकर जान दे दी। परिजनों का कहना है कि बेटी का इंटर का पेपर था। पेपर में तैयारी अच्छी न होने के कारण वह बहुत परेशान थी। हमने उसे रात को समझाया था कि पेपर अच्छा होगा, चिंता मत करो। ये कहकर हम लोग दूसरे कमरे में सोने चले गए। बेटी पढ़ने लगी, लेकिन सुबह कमरे में गए तो बेटी को फंदे पर लटका पाया। परीक्षा से पहले ही बेटी ने हार मान ली।
पेपर लीक हुआ, तो छात्रा ने दे दी जान
पेपर खराब होने और नंबर कम होने के डर से छात्र-छात्राएं सुसाइड कर रहे हैं। मगर, उन्नाव में दो दिन पहले जो हुआ, उसकी कहानी बिल्कुल अलग है। इंटर की छात्रा ने पेपर लीक होने के कारण फांसी लगा ली। उन्नाव के माखी इलाके में रुदाई खेड़ा गांव की 12वीं की शिवांकी ने अंग्रेजी का पेपर लीक होने के कारण पंखे से लटककर जान दे दी। पुलिस को छात्रा के शव के पास से सुसाइड नोट भी मिला है।
शिवांकी के पिता अशोक पाल ने पुलिस को बताया कि बेटी पेपर के लिए बहुत चिंतित थी। दिन रात पढ़ रही थी, लेकिन अचानक से अंग्रेजी का पेपर लीक होने के कारण तनाव में आ गई। वो पेपर देने गई, लेकिन पर्चा लीक होने की वजह से कैंसल हो गया। 17 साल की शिवांकी सेंटर से जब घर लौटी, तब घर पर कोई नहीं था। वो इतने तनाव में थी कि फांसी लगाकर जान दे दी।
पुलिस को मिले सुसाइड नोट में भी शिवांकी ने अपनी मर्जी से सुसाइड करना लिखा है। अशोक मुंबई में कंपनी में नौकरी करता है, पूरा परिवार बेटी के इस कदम से दुखी है।
हिंदी का पेपर बिगड़ा तो कर ली आत्महत्या
हरदोई के हरियावा थाना के पुरेला गांव में इंटरमीडिएट की छात्रा पूजा ने सिर्फ इसलिए फांसी लगा ली, क्योंकि उसका हिंदी का पेपर बिगड़ गया था। पूजा को डर था कि पेपर में अच्छे नंबर नहीं मिलेंगे और वो फेल हो जाएगी। इस डर को वो सह नहीं पाई और फांसी लगा ली। 17 साल की बेटी के इस तरह जाने से परिजन परेशान हैं। मां अनीता ने बताया कि तीन बहनों में दूसरे नंबर की पूजा पढ़ाई के लिए चिंतित रहती थी। पेपर खराब होने की बात उसने मुझे बताई थी, तब मैंने उसे समझाया था कि दूसरे पेपर पर ध्यान दे। सुबह बेटी की लाश फंदे पर लटकती मिली।
छात्रों को एग्जाम स्ट्रेस से निकालें- डॉ. पूनम देवदत्त
CBSE बोर्ड एग्जाम की नेशनल काउंसलर रहीं डॉ. पूनम देवदत्त कहती हैं छात्रों को भी पेपर के लिए गंभीर होना पड़ेगा और समझना पड़ेगा। डॉ. देवदत्त कहती हैं किसी भी बोर्ड के स्टूडेंट्स हों एग्जाम स्ट्रेस सभी को होता है। अब सभी स्टेट गर्वमेंट, बोर्ड्स इसलिए एग्जाम से पहले से रिजल्ट आने के बाद तक काउंसलिंग कराते हैं, ताकि छात्र कोई गलत कदम न उठाए। मगर, स्टूडेंट्स को एग्जाम स्ट्रेस से निकालने की जिम्मेदारी पेरेंट्स, टीचर्स, सोसाइटी सभी की है।
माता, पिता, शिक्षक, समाज की जिम्मेदारी
मनोचिकित्सक डॉ. रवि राणा कहते हैं हर साल परीक्षा के समय मेरे पास ऐसे केस बढ़ जाते हैं जब युवाओं की सबसे बड़ी परेशानी याद न होना, याद किया हुआ भूल जाना होती है, लेकिन हमें इसके लिए छात्रों को समझाना है, अभिभावक भी अपनी जिम्मेदारी समझें
मनोचिकित्सक डॉ. रवि राणा
छात्रों पर बहुत अच्छे नंबर लाने या बड़ी सफलता का दबाव न बनाएं।
छात्र को हर समय पढ़ते रहने को न कहें, बल्कि उसे गाइड करें।
दूसरे बच्चों की या अपनी सफलता की तुलना बच्चों से न करें, उन पर थोपें नहीं।
पेपर के समय घर में खुशनुमा माहौल रखें, जहां बच्चा पढ़ सके।
करियर में क्या बनना है, इसमें बच्चों की भी राय लें।
बच्चे को पेपर होने तक जो भी परेशानी हो टीचर्स उसे डांटकर नहीं, बल्कि प्यार से समझाकर हल करें।
स्टूडेंट्स समझें सुसाइड सॉल्यूशन नहीं
छात्र एकदम परीक्षा के समय सारी पढ़ाई न करें, बल्कि साल भर जो पढ़ाया जा रहा है उसे पढ़ते रहें।
लगातार रिवीजन करते रहें, जो भी डाउट हों, वो क्लास के बाद या क्लास में क्लियर करते रहें। इससे पेपर में पढ़ाई का बोझ नहीं बढ़ेगा।
ध्यान रखें ये बोर्ड एग्जाम है, लेकिन जिंदगी में सफलता के बहुत से मुकाम अभी बाकी हैं।
कम नंबर आने पर भी अच्छा करियर बनाया जा सकता है।
पेपर या सब्जेक्ट में परेशानी है, तो फौरन उसे क्लियर करें, पालकर न बैठें।
टाइम टेबल बनाकर पढ़ाई करें, पेपर को टाइम मैनेजमेंट से ही हल करें।
पढ़ाई के साथ मनोरंजन, परिवार से बात और हॉबी को भी टाइम जरूर दें।
दूसरों को देखकर खुद न पढ़ें, न दूसरों से अपनी तुलना करें। हर किसी की पढ़ाई की क्षमता अलग होती है।
