गोंडा जिले में घाघरा नदी का जलस्तर एक बार फिर तेजी से बढ़ रहा है। रविवार सुबह 9:30 बजे एल्गिन ब्रिज पर नदी खतरे के निशान से महज 6 सेंटीमीटर नीचे बह रही थी। पिछले 24 घंटों में जलस्तर 9 सेंटीमीटर बढ़ा है। इस दौरान 2 लाख 71 हजार क्यूसेक पानी छोड़े जाने से नदी का बहाव और तेज हो गया है। बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन तटीय क्षेत्रों के लोगों को लगातार सतर्क रहने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील कर रहा है।
बढ़ते जलस्तर का असर तटीय गांवों में साफ दिखाई देने लगा है। ऐली परसौली समेत कई गांवों में लोगों को आने-जाने और रोजमर्रा का सामान लाने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। ग्रामीण आटा, चावल, पशुओं का चारा और अन्य जरूरी सामान नाव से ढो रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि कई स्थानों पर नावें वे स्वयं चला रहे हैं, क्योंकि वहां प्रशासन की ओर से नाविकों की व्यवस्था नहीं की गई है। कुछ गांवों में लोग निजी या किराए की नावों के सहारे आवागमन करने को मजबूर हैं।
20 से अधिक नावें तैनात, फिर भी कई गांवों में कमी
जिला प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में विभिन्न गांवों के पास 20 से अधिक नावें उपलब्ध कराई हैं। हालांकि, कई तटीय गांवों में अभी भी नावों की पर्याप्त व्यवस्था नहीं हो सकी है। ऐसे क्षेत्रों में ग्रामीण अपने स्तर पर नावों की व्यवस्था कर रहे हैं।
कटान से खेत और कच्चे मकान खतरे में
घाघरा के बढ़ते जलस्तर के साथ करनैलगंज और तरबगंज तहसील के तटीय क्षेत्रों में कटान भी तेज हो गया है। नदी लगातार किसानों की उपजाऊ जमीन और फसलों को नुकसान पहुंचा रही है। वहीं नवाबगंज क्षेत्र के कई तटीय इलाकों में कच्चे मकान भी कटान की जद में आ गए हैं, जिससे ग्रामीणों में चिंता बढ़ गई है।
डीएम बोलीं- जहां जरूरत होगी, वहां उपलब्ध कराई जाएगी नाव
जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन ने कहा कि जिन स्थानों पर नाव की आवश्यकता है, वहां प्रशासन की ओर से नावें उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों को किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होने दी जाएगी और हालात पर प्रशासन लगातार नजर बनाए हुए है।
गोण्डा से ब्यूरो रिपोर्ट शिव शरण
