प्रयागराज: प्रदेश में गुणवत्ता युक्त पान उत्पादन की प्रोत्साहन योजना अंतर्गत औद्यानिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र खुसरोबाग प्रयागराज में संगोष्ठी का आयोजन शनिवार 8 अगस्त 2026 को किया गया कार्यक्रम का उद्घाटन फीता काटकर डॉ वीरेंद्र सिंह संयुक्त निदेशक उद्यान विभाग लखनऊ द्वारा किया गया, दीप प्रज्वलन उपरांत संयुक्त निदेशक द्वारा प्रदेश में पान की खेती को बढ़ावा दिए जाने तथा पान पर हो रहे शोध कार्यों की चर्चा करते हुए कहा कि पान एक नगदी फसल है इसका क्षेत्र का विस्तार निरंतर हो रहा है शेड नेट लगाकर भी सामान्य भूमियों में पान की खेती की जा सकती है कार्यक्रम के तकनीकी सत्र में डॉ इखलाख अहमद सिद्दीकी सेवानिवृत्ति वायरोलॉजिस्ट उद्यान विभाग द्वारा फसलों में लगने वाले प्रमुख रोग फफूंदी एवं जीवाणु रोगों के पहचान करते हुए कहा कि रोग बीमारी से बचने का सबसे अच्छा तरीका फसल चक्र होता है पान की खेतों पर भूमि उपचार तथा पान की बेल लता का उपचार करने के उपरांत ही पान की बेल का रोपण करना चाहिए इसके अलावा डॉ निवेश सिंह पान शोध अधिकारी महोबा द्वारा पान की जैविक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए बल दिया, पान की खेती में फफूंदी तथा जीवाणु जनित रोगों के बचाव के लिए मेटाराइजम ट्राईकोडरमा, विवेरिया बैंसियाना की पहचान कराते हुए बताया कि जैविक विधि से कीट नियंत्रण के लिए प्रकाश प्रपंच तथा फेरोमोन ट्रैप आदि का प्रयोग भी लाभकारी होता है कृषि विज्ञान केंद्र कौशांबी के वैज्ञानिक डॉ मनोज सिंह द्वारा मृदा परीक्षण की बारीकियां को बताते हुए कहा कि हर कृषक को मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनवाना आवश्यक है कृषि विज्ञान केंद्र के उद्यान वैज्ञानिक डॉ जितेंद्र प्रताप सिंह द्वारा पान के खेतों के किनारे किनारे पपीता की खेती करके अतिरिक्त लाभ लेने की तकनीक दी गई इसके अलावा डॉ शैलेंद्र सिंह वैज्ञानिक उद्यान प्रसार निदेशालय शुआटस नैनी, विजय किशोर सिंह, मनीष कुमार, विवेक श्रीवास्तव, अमित सिंह आदि द्वारा अपने विचार व्यक्त किए गए संगोष्ठी के समापन सत्र में प्रतिभागियों की बीच एक प्रतियोगिता आयोजित की गई इस प्रतियोगिता में विजेता सुरेश चौरसिया एवं आयुष चौरसिया को पुरस्कार दिया गया इसके अलावा प्रतापगढ़ प्रयागराज के साथ-साथ अन्य जनपदों से आए हुए कृषकों को वृक्षारोपण हेतु निःशुल्क फल पौधों का भी वितरण किया गया

