12 वर्षों में शिक्षा, नवाचार, डिजिटल एवं कौशल विकास में अभूतपूर्व उपलब्धि - प्रोफेसर सत्यकाम
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12 वर्षों में शिक्षा, नवाचार, डिजिटल एवं कौशल विकास में अभूतपूर्व उपलब्धि - प्रोफेसर सत्यकाम

 


12 वर्षों में शिक्षा, नवाचार, डिजिटल एवं कौशल विकास में अभूतपूर्व उपलब्धि - प्रोफेसर सत्यकाम 

प्रधानमंत्री मोदी के ऐतिहासिक 12 वर्ष पूर्ण होने पर मुविवि में व्याख्यानमाला 

प्रयागराज 11/06/2026

उत्तर प्रदेश राजर्षि टण्डन मुक्त विश्वविद्यालय, प्रयागराज के सरस्वती परिसर स्थित तिलक शास्त्रार्थ सभागार में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के जनसेवा, सुशासन एवं राष्ट्र निर्माण के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के के उपलक्ष्य में उत्तर प्रदेश शासन के निर्देशानुसार व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया।विश्वविद्यालय में दिनांक 11 जून से 21 जून, 2026 तक विभिन्न शैक्षिक, बौद्धिक, सांस्कृतिक एवं जन-जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन एक विशेष पर्व के रूप में किया जा रहा है। ।

इस श्रृंखला में कुलपति प्रोफेसर सत्यकाम ने "राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 : शिक्षा जगत का एक क्रांतिकारी उद्घोष" विषय पर प्रथम व्याख्यान देते हुए कहा कि विगत 12 वर्षों में भारत ने शिक्षा, प्रौद्योगिकी, नवाचार, डिजिटल सशक्तिकरण, कौशल विकास एवं आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में अभूतपूर्व उपलब्धियाँ प्राप्त की हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 भारत की शिक्षा व्यवस्था को वैश्विक मानकों के अनुरूप विकसित करने का एक दूरदर्शी दस्तावेज है, जो विद्यार्थियों में ज्ञान, कौशल, नवाचार, अनुसंधान एवं नैतिक मूल्यों का समन्वित विकास सुनिश्चित करती है। कुलपति ने डिजिटल इंडिया अभियान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग, डिजिटल शिक्षण, ई-कंटेंट निर्माण, ऑनलाइन शिक्षा तथा तकनीक आधारित अधिगम के बढ़ते महत्व पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि आज भारत ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था की ओर तेजी से अग्रसर है तथा शिक्षा संस्थानों की भूमिका इस परिवर्तन में अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा प्रणाली की उपयोगिता को रेखांकित करते हुए कहा कि उच्च शिक्षा के प्रसार तथा सकल नामांकन अनुपात में वृद्धि के लिए मुक्त विश्वविद्यालयों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण एवं प्रभावी है। उन्होंने कहा कि "विकसित भारत-2047" के संकल्प को साकार करने में शिक्षा जगत की केंद्रीय भूमिका है। प्रत्येक शिक्षक, विद्यार्थी, कर्मचारी एवं नागरिक राष्ट्र निर्माण की इस महान यात्रा का सहभागी है। उन्होंने "मैं नहीं, हम" की भावना को विकसित भारत के निर्माण का मूल आधार बताते हुए कहा कि सामूहिक प्रयास, सहयोग, सहभागिता एवं सकारात्मक सोच से ही एक सशक्त राष्ट्र, सुदृढ़ समाज एवं उत्कृष्ट संस्थाओं का निर्माण संभव है। कुलपति प्रोफेसर सत्यकाम ने उपस्थित जनसमुदाय का आह्वान किया कि वे शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार, सामाजिक उत्तरदायित्व तथा राष्ट्रहित के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और अधिक सशक्त बनाएं तथा "दिव्य भारत, भव्य भारत" एवं "विकसित भारत-2047" के राष्ट्रीय संकल्प को साकार करने में सक्रिय योगदान दें।

नोडल अधिकारी प्रोफेसर संजय सिंह ने प्रारंभ में कुलपति, कुलसचिव एवं वित्त अधिकारी का स्वागत करते हुए विगत 12 वर्षों में प्रधानमंत्री के विराट कृत्यों को रेखांकित करते हुए दिव्य भारत भव्य भारत की रूपरेखा प्रस्तुत की। संचालन डॉ सुनील कुमार एवं धन्यवाद ज्ञापन कुलसचिव कर्नल विनय कुमार ने किया। जनसंपर्क अधिकारी डॉ प्रभात चन्द्र मिश्र ने बताया कि कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी प्रतिभागियों ने राष्ट्र निर्माण, शिक्षा के उन्नयन तथा सामाजिक विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए आगामी 21 जून, 2026 तक आयोजित होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों में सक्रिय सहभागिता का संकल्प लिया। सम्पूर्ण वातावरण राष्ट्रभक्ति, प्रेरणा, सकारात्मक ऊर्जा एवं विकासोन्मुख चिंतन से ओत-प्रोत रहा। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के समस्त विद्याशाखाओं के निदेशकगण, अधिकारीगण, शिक्षकगण, कर्मचारीगण, शोधार्थी एवं विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

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