राजर्षि टण्डन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज: योग और वैदिक ज्ञान से ही विश्वगुरु बनेगा भारत - स्वामी महेश योगी
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राजर्षि टण्डन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज: योग और वैदिक ज्ञान से ही विश्वगुरु बनेगा भारत - स्वामी महेश योगी

 


संस्कृति और परंपराओं को संजोकर आगे बढ़ रहा देश- प्रोफेसर सत्यकाम 


प्रयागराज 18 जून, 2026

प्रयागराज, 18 जून। केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में संचालित व्याख्यानमाला श्रृंखला के अंतर्गत उत्तर प्रदेश राजर्षि टण्डन मुक्त विश्वविद्यालय, प्रयागराज में आयोजित सात दिवसीय व्याख्यानमाला के क्रम में बृहस्पतिवार को एक प्रेरणादायी व्याख्यान का ऑनलाइन आयोजन किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता श्री श्री 1008 महंत महामंडलेश्वर डॉ. स्वामी महेश योगी जी महाराज, हनुमानगढ़ी, अयोध्या ने कहा कि भारत केवल एक भौगोलिक इकाई नहीं, बल्कि संतों, ऋषियों, मुनियों और तपस्वियों की पुण्यभूमि है। योग, वैदिक ज्ञान और सनातन संस्कृति की शक्ति के आधार पर ही भारत पुनः विश्वगुरु का स्थान प्राप्त कर सकता है। उन्होंने कहा कि भारत खोज और शोध दोनों की भूमि है, जहाँ ज्ञान और अध्यात्म का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है।

उन्होंने भगवान श्रीराम के आदर्शों, श्रीकृष्ण के योग, हनुमान जी के ज्ञान, पराक्रम और गुरु-भक्ति का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों से उनके जीवन-मूल्यों को आत्मसात करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि माता-पिता और गुरु का सम्मान, संस्कारयुक्त शिक्षा, ज्ञान, भक्ति और कर्म का समन्वय ही व्यक्ति को श्रेष्ठ नागरिक बनाता है।स्वामी जी ने युवाओं में ऊर्जा, पुरुषार्थ, अनुशासन एवं चरित्र निर्माण की आवश्यकता पर बल देते हुए धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष रूपी चार पुरुषार्थों तथा भारतीय संस्कृति के षोडश संस्कारों का महत्व बताया। उन्होंने चेतना शक्ति, तपोवन की वैज्ञानिक परंपरा, टेलीपैथी, अष्टांग योग, सप्त चक्रों की साधना तथा मानव चेतना के विकास जैसे विषयों पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि आत्मचेतना को परमचेतना से जोड़ने का माध्यम है, जिससे परम ज्ञान की प्राप्ति होती है। उन्होंने कहा कि विनम्रता, आध्यात्मिक चेतना और सतत प्रयास से ही व्यक्ति जीवन के चारों पुरुषार्थों को प्राप्त कर सकता है। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि वे स्वामी विवेकानंद और महर्षि दयानंद सरस्वती के विचारों से प्रेरणा लेकर भारत को पुनः विश्वगुरु बनाने में योगदान दें।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सत्यकाम ने कहा कि यह व्याख्यानमाला भारत को विश्वगुरु बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण बौद्धिक पहल है। उन्होंने कहा कि भारत प्रगति के पथ पर अपनी संस्कृति और परंपराओं को संजोकर आगे बढ़ रहा है।पिछले 12 वर्षों में देश की सांस्कृतिक गरिमा, विरासत और राष्ट्रीय चेतना के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर कार्य किया गया है।कुलपति ने मुख्य वक्ता श्री श्री 1008 महंत महामंडलेश्वर डॉ. स्वामी महेश योगी जी का विश्वविद्यालय परिवार की ओर से विशेष आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके विचार नई पीढ़ी को भारतीय जीवन मूल्यों से जोड़ने और राष्ट्र निर्माण की दिशा में प्रेरित करने वाले हैं।

जनसंपर्क अधिकारी डॉ प्रभात चन्द्र मिश्र ने बताया कि प्रारंभ में अतिथियों का स्वागत एवं विषय की प्रस्तावना नोडल अधिकारी प्रोफेसर संजय सिंह ने प्रस्तुत की। संचालन डॉ. सुनील कुमार, सहायक आचार्य, प्राचीन इतिहास विभाग ने तथा धन्यवाद ज्ञापन प्रोफेसर आनन्दानंद त्रिपाठी ने किया। डॉ मिश्र ने बताया कि व्याख्यानमाला का उद्देश्य विद्यार्थियों में राष्ट्रभाव, सांस्कृतिक चेतना और नैतिक मूल्यों का संवर्धन करना है, ताकि वे ज्ञान, कौशल और संस्कार से युक्त होकर विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभा सकें। कार्यक्रम का उद्देश्य केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं एवं उपलब्धियों को जन-जन तक पहुँचाने के साथ-साथ भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और जीवन मूल्यों के प्रति नई पीढ़ी को जागरूक करना था।इस अवसर पर विश्वविद्यालय के शिक्षकगण, अधिकारी, कर्मचारी, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।

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