प्रयागराज के मेजा क्षेत्र में मेंड़रा गांव समेत दर्जनभर गांवों में बाढ़ का पानी पांचवें दिन भी खेतों से नहीं निकला है। इससे किसानों की हजारों बीघा फसलें जलमग्न हैं। धान, उड़द और सब्जियों की फसलें सड़ने लगी हैं। किसानों की मेहनत बेकार होती दिख रही है। गांव के किसान राजेश पटेल ने बताया कि खेतों में कमर तक पानी भरा है। फसलें पूरी तरह खराब हो चुकी हैं। मेंड़रा, सराय नन्हे, डेरवा, गंगापुर, रामनगर और हनुमानगंज समेत कई गांवों के किसान इस संकट से जूझ रहे हैं। बारिश और गंगा में आई बाढ़ के कारण खेतों का पानी निकलने का कोई रास्ता नहीं बचा है।
किसानों का कहना है कि सरकार या प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस राहत या मुआवजे की घोषणा नहीं हुई है। इससे ग्रामीणों में रोष है। बाढ़ से खेतों के साथ ही कई कच्चे मकानों को भी नुकसान पहुंचा है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द राहत शिविर, फसल मुआवजा और जल निकासी की व्यवस्था की मांग की है। वे चाहते हैं कि बर्बादी और नुकसान से कुछ राहत मिल सके।
प्रयागराज के मेजा तहसील में मेंड़रा सहित दर्जनभर गांवों में पांच दिनों से जलभराव की स्थिति है, जिससे किसानों की फसलें, खासकर धान, उड़द और सब्जियों की फसलें, जलमग्न होकर सड़ रही हैं। किसानों का कहना है कि सरकार या प्रशासन से अभी तक कोई राहत या मुआवजे की घोषणा नहीं हुई है, जिससे ग्रामीणों में रोष है।
विस्तार:
जलभराव:
मेजा के मेंड़रा, सराय नन्हे, डेरवा, गंगापुर, रामनगर और हनुमानगंज जैसे गांवों में पांच दिनों से खेतों में पानी भरा हुआ है।
फसलों का नुकसान:
जलभराव के कारण धान, उड़द और सब्जियों की फसलें सड़ रही हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान हो रहा है।
किसानों की प्रतिक्रिया:
किसान राजेश पटेल ने बताया कि उनके खेतों में कमर तक पानी भरा है और फसलें पूरी तरह से खराब हो चुकी हैं।
प्रशासन से राहत की मांग:
ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन से जल्द राहत शिविर, फसल मुआवजा और जल निकासी की व्यवस्था करने की मांग की है।
अन्य नुकसान:
बाढ़ के कारण कुछ कच्चे मकानों को भी नुकसान पहुंचा है।