अयोध्या जनपद में झोलाछाप चिकित्सकों की भरमार, मुख्यमंत्री का आदेश बेअसर
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अयोध्या जनपद में झोलाछाप चिकित्सकों की भरमार, मुख्यमंत्री का आदेश बेअसर


कस्बों से लेकर गांवों तक फैले झोलाछाप चिकित्सक लुट रही है जनता, स्वास्थ्य विभाग बना नेत्रहीन

सरकारी अस्पतालों में रोगियों को लिखी जाती हैं बाहर से लाने को दवाएं, स्वास्थ्य ब्यवस्था बदहाल या यूपी की योगी सरकार को बदनाम करने की साजिश

झोलाछाप चिकित्सकों को लेकर बार बार प्रिंट मीडिया व सोशल मीडिया पर खबरें प्रकाशित होती हैं लेकिन स्वास्थ्य विभाग पर कोई असर नहीं है

रिपोर्ट-----_ सचिन तिवारी अयोध्या

उत्तर प्रदेश के अयोध्या जिले में झोलाछाप चिकित्सकों की भरमार है इनपर लगाम लगाने की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग की है और स्वास्थ्य विभाग नेत्रहीन बना बैठा है जनपद का कोई ऐसा गाँव अथवा कस्बा, बाजार, चौराहा नहीं है जहाँ इनकी संख्या चार - छ: से कम हो। कुकुरमुत्तों के भातिं क्लीनिक खुले हैं सूत्रों की माने तो ये अवैध चिकित्सक ठेका और जिम्मेदारी भी लेने लगे हैं हम रोगी का रोग दूर कर देंगे, गैर पढ़े लिखे क्या पढ़े लिखे भी इन झोलाछापों के झांसे में आ ही जाते हैं। दुर्भाग्य की बात है कि इन झोलाछाप चिकित्सकों की नकेल कसने की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग पर है लेकिन ये विभाग मौन व्रत धारण किए है। कारण है इस विभाग की झोलाछाप चिकित्सकों से या तो सांठगांठ है या फिर उत्तर प्रदेश की योगी सरकार को बदनाम किया जा रहा है जिले की सामुदायिक स्वास्थ्य केद्रों में रोगियों के परिजनों को बाहर से दवाएं लाने को पर्चा थमा दिया जाता है, जबकि सरकारी निर्देश है कि किसी भी रोगी को बाहर से दवाएं लाने को न लिखा जाए लेकिन चिकित्सक जब बाहर से लेने के लिए दवाएं लिखते तो यही तो होगा सरकारी अस्पतालों में दवाएं नहीं हैं। दूसरी बात शायद कोई सरकारी चिकित्सक समय से आता हो। बाकी सब बे समय ही रहते हैं। जो अपनी ड्यूटी समय से नहीं निभाते ओ झोलाछाप चिकित्सकों पर क्या कार्यवाई करेंगे सच तो यह है कि इन झोलाछाप चिकित्सकों के जनक ही सरकारी अथवा गैर सरकारी शिक्षित चिकित्सक ही हैं, क्योंकि निजी चिकित्सक कि अपनी सुविधा के लिए एक पढ़े लिखे युवक दो चार साल अपने पास रखते हैं उसको मामूली अनुभव होता है तो वह युवक स्वयं चिकित्सक बन जाता है और यही हाल सरकारी चिकित्सकों का भी है ये सरकारी चिकित्सक सरकारी रोक के बावजूद भी अपना निजी दवाखाना चलाते हैं और ये भी अपनी सुविधा के लिए पढ़े लिखे युवकों को शिकार बनाकर झोलाछाप चिकित्सकों की फौज खड़ी कर दिए हैं। आज आलम यह है कि उत्तर प्रदेश को छोडिए अकेले अयोध्या जनपद लगभग एक हजार अवैध चिकित्सक हैं इन अवैध चिकित्सकों के इलाज से जब किसी की मृत्यु होती है तो नाम मात्र के लिए स्वास्थ्य विभाग हरकत में आता है और दिखावा करके अपने कर्तव्यों की इत श्री कर लेता है। गत 17 नवंबर को हमारे प्रतिनिधि ने एसीएमओ अयोध्या से वार्ता की तो उन्होंने कहा अभियान चल रहा है और कल हम रुदौली बाबा बाजार की तरफ निकलते हैं लेकिन न साहब निकले और न कोई अभियान चल रहा है और न चलने की उम्मीद है इस संबंध में आज मुख्य चिकित्सा अधिकारी अयोध्या से वार्ता करने की कोशिश की गई तो उनका फोन पहुँच से बाहर रहा मतलब वार्ता नहीं हो सकी जबकि बार बार सोशल मीडिया व प्रिंट मीडिया में खबरें दिख रही हैं लेकिन स्वास्थ्य विभाग कुछ करने को तैयार नहीं है। जाहिर सी बात है कि यह विभाग ही नाकारा है।

*सीएससी बीकापुर की हालत तो काबिले तारीफ है*

11 बजाकर बजकर 30 मिनट बजे जब हमारे प्रतिनिधि मनोज तिवारी ने भौतिक सत्यापन किया तो अधिकांश कुर्सियां यहां तक की अधीक्षक के अलावा आधा दर्जन डॉक्टर तथा सफाई कर्मी गायब थे। हालत यह है कि सीएससी बीकापुर में बीकापुर में सरकार की योजनाएं नहीं बल्कि अधीक्षक और कर्मचारियों क मरीजों के लिए विभिन्न बीमारियों की एक ही दवा हनुमानगढ़ी के प्रसाद की तरफ विशेष की जाती है सूत्रों ने बताया कि इस सीएससी की हालात बदल से बदतर है। गरीब लोगों को छोड़कर इस अस्पताल में अन्य लोग जाने से करते हैं इस अस्पताल में एक्स-रे तू है लेकिन कर्मचारी नजर रहते हैं उन्हें ढूंढना पड़ता है लैब में भी मरीज से लोग तेश में ही बात करते हैं। बीकापुर सीएससी की खबर कई बार सभी लेकिन अधिकारियों के कान में जुट तक नहीं देख रहा जिसका खामियाजा आम जनता भुगत रहेगी

*अयोध्या से मनोज तिवारी की रिपोर्ट*

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