कार्तिक पूर्णिमा पर सरयू और मनवर नदी में हजारों श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी, यहां है उदगम स्थल
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कार्तिक पूर्णिमा पर सरयू और मनवर नदी में हजारों श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी, यहां है उदगम स्थल



कार्तिक पूर्णिमा पर सरयू और मनवर नदी में हजारों श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी, यहां है उदगम स्थल


अयोध्या के साथ ही गोंडा के कर्नलगंज स्थित सरयू नदी और मनवर नदी में आज हजारों श्रद्धालुओं ने कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर आस्था की डुबकी लगाई। जानिए मनोहर नदी के उद्गम स्थल की धार्मिक मान्यताएं


पवित्र सरयू नदी में कार्तिक पूर्णिमा पर स्नान करते श्रद्धालु


कार्तिक पूर्णिमा पर्व पर पवित्र सरयू नदी और मनवर नदी में आज हजारों श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। सरयू घाट पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। आस्था के इस महापर्व को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। इटियाथोक कस्बा से करीब 6 किलोमीटर दूरी पर स्थित तिर्रे-मनोरमा गांव में एक पोखरा मनवर नदी का उदगम स्थल माना जाता है।


गोंडा जिले के कर्नलगंज स्थित सरयू नदी में कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाकर पूजन अर्चना किया। रविवार की देर शाम से ही दूर दराज से सरयू नदी कटरा घाट पर श्रद्धालुओं का आना शुरू हो गया था। सोमवार की भोर से ही स्नान शुरू हो गया। इस मौके पर यहां आए श्रद्धालुओं ने पतित पावनी सरयू शीतल जलधारा में स्नान कर दान पुण्य कर भगवान सूर्य देव भगवान भोलेनाथ की पूजा करके अपने इष्ट देव और मां सरयू से स्वस्थ समृद्धि की कामना के साथ देश में खुशहाली की लिए प्रार्थना किया।


श्रृंगी ऋषि ने सरस्वती देवी का आह्वान मनोरमा के नाम से किया वे मनोरमा नदी के रुप में प्रकट हुईं

इटियाथोक कस्बा से 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित तिर्रे-मनोरमा में हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने मनवर उद्गम स्थल पर पहुंच कर स्नान करने के बाद भगवान शिव को जल अर्पित कर पूजा-अर्चना की। यह पवित्र स्थान ब्रह्मज्ञानी नचिकेता के पिता ऋषि उद्दालक मुनि की तपोभूमि है। यहां के बारे में कहा जाता है,कि जहां मन रमे वहीं मनोरमा और जहां मन का मांगा वर मिले वही मनवर है। यहां पर एक विशाल सरोवर है। जहां से एक पवित्र नदी निकलती है। जिसे मनवर या मनोरमा के नाम से जाना जाता है। इस स्थान के उत्पत्ति की कथा धर्म ग्रंथो में विस्तार से वर्णित है। राजा दशरथ के यहां पुत्रेष्टि यज्ञ करते समय श्रृंगी ऋषि ने सरस्वती देवी का आह्वान मनोरमा के नाम से किया था। इससे वे मनोरमा नदी के रुप में प्रकट हुईं। इस स्थान पर प्रत्येक वर्ष कार्तिक मास में पूर्णमासी को विशाल मेला लगता है। श्रद्धालु यहां आकर सरोवर में स्नान कर दान करते हैं। यहां प्राचीन मंदिर औऱ सरोवर आज भी देखने को मिलता है। सोमवार भोर से ही लोग घाटों पर पहुंचने लगे थे। लोगों ने सूर्योदय के पूर्व और बाद में घाट पर पहुंच कर स्नान-ध्यान कर मंदिर में पूजा-अर्चना की। कई श्रद्धालु दूर-दराज से आने के चलते घाट पर ही अपना डेरा जमाए रहे। सूर्य की पहली किरण के साथ हजारों भक्तों ने आस्था की डुबकी लगा भगवान भास्कर को नमन किया। महिलाओं और पुरुषों का जत्था रविवार की रात से घाटों पर अपना डेरा जमाने लगे थे। पुरुषों से ज्यादा महिलाओं की भीड़ घाटों पर दिखी। स्नान करने के लिए पहुंची महिलाओं ने स्नान के बाद भगवान सूर्य देव को अर्घ्य देकर नमन किया। यहां के नकुल सिंह व वीरेंद्र सिंह ने बताया,कि मेले में लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ जमा होती है। सैकड़ों दुकानें मेले से दो दिन पूर्व ही लगी हैं। मेले में सर्कस, नृत्य, झूले, प्रदर्शनी व मिठाइयों की दुकानें आकर्षण का मुख्य केंद्र बिंदु रहीं।यहां का चीनी से निर्मित मिठाई गट्टा और बरसोला दूर-दूर तक प्रसिद्ध है। इसी कड़ी में मेहनौन स्थित ईश्वर नंद कुट्टी व जयप्रभा ग्राम के धुसवा मेला में भारी भीड़ रही।ग्राम प्रधान दीप नारायण तिवारी सहित अन्य लोग मौजूद 


गोण्डा से ब्यूरो रिपोर्ट शिव शरण

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