
वाराणसी: नेपाल के प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा और उनकी पत्नी तीन दिवसीय दौरे पर भारत पहुंचे. अपने दौरे के आखिरी दिन दोनों उत्तर प्रदेश के वाराणसी पहुंचे, जहां खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनका स्वागत किया. वाराणसी में नेपाल के पीएम शेर बहादुर देउबा ने कई मंदिरों में जाकर पूजा अर्चना की. इसके बाद पीएम और उनकी पत्नी ने सीएम योगी के साथ काशी विश्वनाथ मंदिर जाकर पूजा अर्चना की. पीएम की पत्नी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सीएम योगी की जमकर तारीफ की है.पीएम शेर बहादुर देउबा की पत्नी ने कहा, हम पीएम मोदी और सीएम योगी का बहुत-बहुत धन्यवाद देना चाहते हैं. यहां की जनता ने हमारा भव्य रूप से स्वागत किया है. भारत और नेपाल के बीच बहुत नजदीक का संबंध है. मुझे नहीं लगता कि कोई दो देशों के बीच इतना गहरा संबंध हो सकता है.पीएम शेर बहादुर देउबा की पत्नी आरजू राणा देउबा ने कहा, मैं पहली बार वाराणसी 1990 मे आयी थी. इसके बाद 2017 में अपनी भतीजी के मुंडन के वक्त आना हुआ था. अब पांच साल बाद फिर से काशी आना हुआ. मुझे पांच साल बाद काशी आने पर इतना बदलाव दिखा कि ऐसा लग रहा है मैं किसी अन्य शहर में आई हूं. खासकर काशी विश्वनाथ मंदिर में तो तब और अब में जमीन आसमान का अंतर हो गया है. आरजू राणा देउबा ने कहा, जब मैं पहले आती थी तो छोटी- छोटी गलियां दिखती थी. बहुत ज्यादा लंबा पैदल रास्ता होने के साथ ही गलियों में घूमकर दर्शन करने के लिए आना पड़ता था.

अब इतना घूमकर नहीं आना पड़ता है. आसपास के बिल्डिंग भी काफी भव्य नजर आ रहे हैं. बहुत सुंदर काशी नजर आ रही है.नेपाल के पीएम की पत्नी ने कहा कि गंगा का दृश्य यहां से देखने पर काफी अच्छा दिख रहा है. गंगा पहले से काफी साफ सुथरी भी दिख रही है. काशी विश्वनाथ जी से गंगा का दृश्य दिखना अति रमणीय है और हमारे पशुपतिनाथ जी के मंदिर से भी गंगा प्रत्यक्ष दिखती है. 200 वर्ष पूर्व जैसे पशुपतिनाथ के मंदिर दृश्य की परिकल्पना हमारे राजा ने की थी, मुझे लगता है, अब बिल्कुल वैसा ही दिखता है.उन्होंने कहा कि काशी विश्वनाथ मंदिर में पूजा- दर्शन करने के बाद हमारा जीवन सफल हो गया है. बाबा विश्वनाथ से यही कामना की है कि पूरे देश- विश्व में शांति- सुख- समृद्धि- प्रगति का आशीर्वाद मिले.भारत और नेपाल के सम्बन्धों को लेकर आरजू राणा देउबा ने कहा कि भारत और नेपाल एक ही सभ्यता के अंग हैं. पशुपतिनाथ और काशी विश्वनाथ हमारे लिए एक समान पूजनीय हैं. हम भी भारत के धर्म- सभ्यता से जुड़े हुए हैं. रामायण- महाभारत ग्रन्थ से हम भी जुड़े हैं. हमारी संस्कृति, धर्म, रहन-सहन, खान- पान सब कुछ एक ही है. सिर्फ राजनीतिक दायरा हमारा सीमित है. हम एक ही संस्कृति का पालन करते हैं. पशुपतिनाथ और काशी विश्वनाथ का वर्णन तो पुराणों में भी किया गया है. हमारे पुराणों में सबकुछ वर्णित है कि क्यों इन जगहों पर जाकर हमे दर्शन करना चाहिए. इसका अतुलनीय इतिहास है
