दबंगों का कब्जा,1971 की जंग में शहीद हुए थे दीना नाथ,जवान के परिवार को भारत सरकार की ओर से जमीन दी गई थी..
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दबंगों का कब्जा,1971 की जंग में शहीद हुए थे दीना नाथ,जवान के परिवार को भारत सरकार की ओर से जमीन दी गई थी..


     
प्रयागराज-:एक तरफ प्रदेश की योगी सरकार भूमाफिया के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। दूसरी ओर कुछ ऐसे भूमाफिया है जिनको बाबा के बुलडोजर का खौफ नहीं है। यही कारण है कि शहीद के परिवार को दी गई जमीन पर कब्जा कर लिया है। 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान शहीद हुए सेना के जवान के परिवार को भारत सरकार की ओर से जमीन दी गई थी। इस पर अब भूमाफिया की ओर से कब्जा कर बाउंड्रीवाल बना ली गई है। इसको लेकर पीड़ित परिवार ने झूसी थाने में शिकायत की, उसके बाद भी दबंगों ने निर्माण करा लिया। अब शहीद के परिजनों ने CM योगी को पत्र भेजकर गुहार लगाई है। - शहीद दीनानाथ के छोटे भाई त्रिलोकीनाथ यादव ने मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश को पत्र लिखकर गुहार लगाई है। उन्होंने पत्र में लिखा है कि योगी जी मेरे बड़े भाई सेना में नाइनगार्ड बटालियन में थे। वे भारत-पाक युद्ध 1971 में शहीद हो गए थे, जिसमें मरणोपरांत शहीद के परिजनों को जो भूमि सरकार द्वारा दी गई थी उस जमीन पर पड़ोसी गांव छिवैया के दबंग अपराधीगण कब्जा कर मकान का निर्माण कर रहे हैं। कृपया हमारी मदद करें 23 मार्च को दी थी झूसी थाने में तहरीर शहीद के छोटे भाई की ओर से झूसी थाने में 23 मार्च 2022 को दबंगों की ओर से शहीद के परिजनों को दी गई भूमि पर कब्जे को लेकर तहरीर दी गई। पर दबंगों की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ा, पिछले 1 सप्ताह के भीतर दबंगों ने जमीन की चारों ओर दीवार बनाने के साथ मकान का निर्माण जारी रखा है। गत वर्ष शहीद के गांव पहुंची थी PM की मशाल 50 साल पूर्व भारत-पाक युद्ध के दौरान शहीद हुए प्रयागराज के छोटे से गांव सुमेरपुर मुरारपट्टी, थाना झूसी के माटी के लाल शहीद दीनानाथ के गांव पिछले साल PM की ओर से स्वर्णिम विजय मशाल पहुंची थी। उस दौरान शहीद की मूर्ति का अनावरण भी किया गया था।छह भाई-बहनों में सबसे बड़े थे दीनानाथ मुरारपट्टी सुमेरपुर गांव में 9 सितंबर 1944 को दीनानाथ का जन्म एक साधारण परिवार में हुआ था। शहीद दीनानाथ के पिता झल्लर यादव और मां चुन्नू देवी थी। दीनानाथ अपने पांच भाई और एक बहन में सबसे बड़े थे। परिवार का खर्चा चलाने के लिए वे मध्य प्रदेश के सतना स्थित बिड़ला फैक्ट्री में नौकरी करने लगे, लेकिन उनका मन ज्यादा दिनों तक नहीं लगा। देश की सेवा के लिए 1962 में भारतीय सेना में 9 गार्ड्स बटालियन में बतौर गार्ड्समैन भर्ती हो गए। 9 सालों तक की देश की सेवा भारत-चीन युद्ध के बाद भारतीय सेना में शामिल गार्ड्समैन दीनानाथ ने 1965 में भारत-पाकिस्तान युद्ध में भाग लिया। इन्हें समर सेवा स्टार एवं रक्षा मेडल से नवाजा गया। इसके बाद 1971 में भारत-पाक युद्ध में भी लड़ाई में पूरे दमखम के साथ भाग लिया।14 दिनों तक चले युद्ध में पाकिस्तान को मुंह की खानी पड़ी। इस दौरान बांग्लादेश के जाकीगंज में बहादुर शेर दीनानाथ 21 नवंबर 1971 में वीर गति को प्राप्त हो गए। तीन वर्ष में बनकर तैयार हुआ था शहीद का मंदिर शहीद दीनानाथ के भतीजे दशरथ लाल यादव ने बताया कि ताऊ का मंदिर बनाने को लेकर 2014 से प्रयास शुरू हुआ। इस मंदिर का काम 2018 में शुरू हुआ, जो लगभग तीन साल में बनकर तैयार हुआ। शहीद दीनानाथ की प्रतिमा का अनावरण पिछले वर्ष सेना के अधिकारी द्वारा किया गया था। PM की ओर से स्वर्णिम विजय वर्ष मशाल भी 21 नवंबर को प्रयागराज के सुमेरपुर गांव में आई थी।

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