प्रयागराज: प्रयागराज के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) अजय कुमार मंगलवार को अलग भूमिका में नजर आए। शहर के बेथनी कॉन्वेंट स्कूल के बच्चों को संबोधित करते हुए अजय कुमार ने सफलता का Five Apples फार्मूला बताया। उन्होंने छात्र-छात्राओं से कहा कि मेरे पिता एक किसान हैं। वो केवल कक्षा 10 तक पढ़े हैं। मेरी मां निरक्षर हैं। मैं कक्षा पांच तक स्कूल नहीं गया हूं। जब मैं पढ़ लिखकर अपने पहले ही प्रयास में संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में 108वीं रैंक हासिल कर सकता हूं तो आप क्यों नहीं?
जानिए क्या है Five Apples फार्मूला
F फॉर फोकस
I फॉर इंटीग्रिटी,
V फॉर विजन
E फॉर एनर्जी
A फॉर एटीट्यूड
P फॉर पैशन
P फॉर प्लानिंग
L फॉर लीडरशिप
E फॉर एक्स्ट्रा वर्क
S फॉर सिनर्जी (ऊर्जा)
एसएसपी अजय कुमार ने अपनी सफलता का सूत्र बताते हुए कहा कि मैंने अपने जीवन में फाइव एप्पल फार्मूला का अक्षरश: पालन किया और आज आपके सामने आपीएस अफसर के रूप में सेवारत हूं। फाइव एप्पल्स वर्ड के हर कैरेक्टर से एक शब्द बनता है जो एक क्वालिटी है,जिसे अगर आप अपने अंदर लाते हैं और मेहनत करते हैं तो दुनिया की कोई ताकत आपको सफल होने से नहीं रोक सकती।
अगर आपने फोकस लूज किया तो कभी सफल नहीं होंगे
एसएसपी ने आगे कहा कि आप चाहे जितने ब्रिलियंट हैं, चाहे जितने स्मार्ट हों अगर आपने अपना फोकस लूट किया तो कभी सफल नहीं होंगे। कक्षा नौ से 12 तक की उम्र बड़ी नाजुक होती है। यही वह समय होता है जब आपका फोकस हटाने के लिए तमाम चीजें होती हैं। इनमें से एक है लव अफेयर्स। अपना फोकस कभी लूज न करो। हर चीज की उम्र होती है। अभी पढ़ने, आगे बढ़ने और करियर गढ़ने का समय है।
…इसपर तो ताली बजनी चाहिए
एसएसपी अजय कुमार ने अपने सम्मान के लिए स्कूल की प्रिंसिपल को धन्यवाद दिया और कहा कि मैं उन माता-पिता को सम्मान करता हूं जिन्होंने आपको ऐसे विद्यालय में भेजा है। उनको मैं प्रणाम करता हूं। इसपर जब ताली नहीं बजी तो एसएसपी ने कहा कि इसपर तो तालियां बजनी चाहिए। इसके बाद पूरा हॉल तालियों की गढ़गड़ाहट से गूंज उठा। उन्होंने आगे कहा कि मैं उन पैरेंट्स को प्रणाम और सैल्यूट करता हूं जो अपने काम पर निकल चुके होंगे। उन माताओं को प्रणाम करता हूं तो तवे पर अपने बच्चों के लिए रोटियां सेंक रही होंगी।
हमारा नेचर हमें बहुत कुछ सिखाता है
एसएसपी ने एक कविता भी पढ़कर बच्चों को सुनाई। कविता पाठ के दौरान उन्होंने एक्शन भी किया। एसएसपी ने कहा कि प्रकृति हमें बहुत कुछ सिखाती है। उन्होंने सोहन लाल द्विवेदी की पवर्त कहता शीश उठाकर तुम भी ऊंचे बन जाओ….भी पढ़कर सुनाई। अजय कुमार ने न सिर्फ कविता पढ़ी बल्कि उसके अनुरूप एक्शन भी किया।

