चौकी के विद्यार्थियों ने शिक्षकों के सहयोग से वार्षिक पत्रिका उड़ान का प्रकाशन शुरू किया है
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चौकी के विद्यार्थियों ने शिक्षकों के सहयोग से वार्षिक पत्रिका उड़ान का प्रकाशन शुरू किया है


प्रयागराज:- शासन की मंशा के अनुरूप परिषदीय स्कूलों में भी बदलाव दिखने लगा है। आधारभूत ढांचे जहां मजबूत हो रहे हैं वहीं विद्यार्थियों का बौद्धिक स्तर बढ़ाने के साथ उनके क्रियाकलाप भी बदल रहे हैं। इसी कड़ी में उरुवा ब्लाक के उच्च प्राथमिक विद्यालय चौकी के विद्यार्थियों ने शिक्षकों के सहयोग से वार्षिक पत्रिका उड़ान का प्रकाशन शुरू किया है। यह पहला अवसर है जब विद्यालय के विद्यार्थियों और शिक्षकों ने पत्रिका निकाली है। इसके लिए आवश्यक धन प्रधानाध्यापक साजिया ने निजी तौर पर उपलब्ध कराया है। कान्वेंट स्कूलों की तरह संसाधन जुटाकर बदलाव की हो रही कोशिश साजिया ने बताया कि विद्यालय में 465 विद्यार्थी पंजीकृत हैं। उन्हें स्तरीय सुविधा देने की कोशिश हो रही है। बैठने के लिए अच्छी डेस्क बेंच के साथ अन्य सुविधाएं भी जुटाई जा रही हैं। छात्र छात्राओं की सृजनशीलता बढ़े वह भी निजी स्कूलों की तरह अपने विद्यालय की वार्षिक पत्रिका खुद पढ़ें और दूसरों को भी दिखा सकें इसके लिए पत्रिका उड़ान का प्रकाशन पहली बार किया गया है। इसमें करीब 15 विद्यार्थियों की रचनाएं प्रकाशित की गई हैं।
वर्ष भर होने वाली गतिविधियों का भी विवरण है। कुछ महापुरुषों के बारे में भी लेख समाहित है। खास बात यह कि पत्रिका की विषयवस्तु को तैयार करने में भी विद्यार्थियों को साथ रखा गया। प्रत्येक छात्र को प्रेरित किया गया कि वह कुछ न कुछ लिखे। यह क्रम जारी रखा जाएगा। विद्यालय में पठन पाठन को लेकर किस तरह का नवाचार चल रहा है इसका भी उल्लेख उड़ान पत्रिका में है।
विद्यालय में स्कूल बैंक का हो रहा संचालन
प्रधानाध्यापक साजिया ने बताया कि विद्यालय में 2018 से स्कूल बैंक का संचालन किया जा रहा है। इसके तहत विद्यार्थी को कापी, पेंसिल, रबर के साथ अन्य स्टेशनरी की सुविधा दी जाती है। यह सुविधा वर्षभर मिलती है। किसी छात्र या छात्रा से शुल्क नहीं लिया जाता है। इस स्कूल बैंक के संचालन के लिए आर्थिक सहयोग शिक्षक, सक्षम अभिभावक व अन्य संस्थाओं से मिलता है। इसे शुरू करने के पीछे का उद्देश्य यह कि सरकार की तरफ से बच्चों को मिड डे मील, पुस्तक, ड्रेस, जूता मोजा तो मिलता है लेकिन स्टेशनरी की कोई सुविधा नहीं मिलती। कई बार बच्चे कापी, पेंसिल के अभाव में परेशान भी दिखते हैं। स्कूल बैंक शुरू होने से बच्चों की यह समस्या खत्म हो गई है। विद्यालय की वार्षिक पत्रिका में इस नवाचार का भी उल्लेख किया गया है।

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