CM योगी आदित्यनाथ ने तोड़े कई मिथक, 37 साल बाद भाजपा को सत्ता में दूसरी बार काबिज करा दिखाया दम
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CM योगी आदित्यनाथ ने तोड़े कई मिथक, 37 साल बाद भाजपा को सत्ता में दूसरी बार काबिज करा दिखाया दम

 

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लखनऊ। उत्‍तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 में प्रचंड जीत के बाद यूपी में उपयोगिता साबित करने के साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कई मिथक भी तोड़े। 37 साल बाद प्रदेश में भाजपा को सत्ता में लगातार दूसरी बार काबिज कराकर अपना दम दिखाया। सत्ता में रहते दोबारा वापसी का यह करिश्मा वर्ष 1985 में कांग्रेस पार्टी ने करके दिखाया था। यही नहीं पूर्ण बहुमत की सरकार का चौका लगाकर ऐतिहासिक जीत का तोहफा दिया। वर्ष 2007 से लगातार पूर्ण बहुमत की सरकार बन रही है। योगी यूपी में भाजपा के ऐसे पहले नेता हो गए हैं जो लगातार दूसरी बार सीएम बनेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खाते में दर्ज हुई ये उपलब्धि : प्रदेश में 1951-52 के बाद से अब तक ऐसी उपलब्धि डा. संपूर्णानंद, चंद्रभानु गुप्त, हेमवती नंदन बहुगुणा, नारायण दत्त तिवारी, मुलायम सिंह जैसे नेताओं के साथ ही मायावती भी हासिल नहीं कर सकीं। इन्हें दो बार मुख्यमंत्री बनने का तो मौका मिला लेकिन लगातार दूसरा पूर्ण कार्यकाल नहीं मिला। मुलायम सिंह यादव और मायावती दो से अधिक बार यूपी की सीएम बनी पर इन नेताओं ने भी वह उपलब्धि हासिल नहीं की जो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खाते में दर्ज हो गई है। टूट गया नोएडा का मिथक भी : यूपी की राजनीति में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बने इस इतिहास के साथ ही कई मिथक धराशायी हुए है। प्रदेश की राजनीति में अब तक माना जाता रहा है कि नोएडा जाने वाले मुख्यमंत्री की कुर्सी सुरक्षित नहीं रहती है। उसकी सत्ता में वापसी नहीं होती। इस कारण कुछ मुख्यमंत्री तो नोएडा जाने से बचते रहे। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव तो नोएडा जाने से परहेज करते रहे। नोएडा में उद्घाटन या शिलान्यास के कार्यक्रम को लेकर वहां जाने की जरूरत पड़ी, तो अखिलेश यादव ने नोएडा न जाकर अगल-बगल या दिल्ली के किसी स्थान से इस काम को पूरा किया। इसके विपरीत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नोएडा जाने से डरने के बजाय वहां कई बार गए। उन्होंने नोएडा जाने के बाद भी लगातार पांच साल मुख्यमंत्री रहकर और भाजपा को बहुमत से साथ फिर सत्ता में वापसी करते हुए इस मिथक को तोड़ दिया है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने अयोध्या में राम मंदिर में पूजा करने जाने को लेकर भी नेताओं का मिथक तोड़ा है। पहले अयोध्या जाकर भी तमाम नेता राममंदिर जाने से परहेज करते थे। अब हर नेता राममंदिर में पूजा करने का रहा है। यूपी के इतिहास पर नजर डाले तो पता चलता है कि नोएडा का यह मिथक वर्ष 1988 से शुरू हुआ था। वर्ष 1988 में राजनीति में सक्रिय नेता नोएडा जाने से बचने लगे, क्योंकि यह कहा जाने लगा था कि नोएडा जाने वाले मुख्यमंत्री की कुर्सी चली जाती है। तब वीर बहादुर सिंह प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। वे नोएडा गए और संयोग से उनकी मुख्यमंत्री की कुर्सी चली गई। नारायण दत्त तिवारी को मुख्यमंत्री बनाया गया। वे 1989 में नोएडा के सेक्टर-12 में नेहरू पार्क का उद्घाटन करने गए। कुछ समय बाद चुनाव हुए, लेकिन वे कांग्रेस की सरकार में वापसी नहीं करा पाए। इसके बाद कल्याण सिंह और मुलायम सिंह यादव के साथ भी ऐसा ही हुआ कि वे नोएडा गए और कुछ दिन बाद संयोग से मुख्यमंत्री पद छिन गया।

राजनाथ सिंह मुख्यमंत्री थे तो उन्हें नोएडा में निर्मित एक फ्लाई ओवर का उद्घाटन करना था। पर, उन्होंने नोएडा की जगह दिल्ली से उद्घाटन किया। अखिलेश यादव ने भी पांच साल मुख्यमंत्री रहते हुए नोएडा जाने से परहेज किया। साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह साबित किया है कि जनता के दुखदर्द का निदान करने का जो सरकार कार्य करती है, वह फिर सत्ता में आती है। मुख्यमंत्री ने दो सौ से ज्यादा जनसभाएं और रोड शो किए।

भगवाधारी हैं रिकार्डधारी : दरअसल नंबर एक पर रहना मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की फितरत है। गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ जब ढाई दशक पहले इस सुविख्यात पीठ के उत्तराधिकारी बने तब से उनके नाम रिकार्ड जुड़ते गये। मसलन 1998 में जब वह गोरखपुर से पहली बार सांसद चुने गए तब वह सबसे कम उम्र के सांसद थे। 42 की उम्र में एक ही क्षेत्र से लगातार 5 बार सांसद बनने का रिकॉर्ड भी उनके ही नाम है। सीएम बनने के पहले सिर्फ 42 वर्ष की आयु में एक ही सीट से लगातार पांच बार चुने जाने वाले वह देश के इकलौते सांसद रहे हैं।

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