प्रदीप बच्चन (व्यूरो चीफ)
बलिया (यूपी) डॉ. रामसेवक विकल साहित्य कला संगम सेवा ट्रस्ट (न्यास), इसारी सलेमपुर, बलिया के कार्यालय पर शनिवार सायं 7 बजे भोजपुरी के शेक्सपियर एवं महान लोक कलाकार भिखारी ठाकुर की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता शैलेन्द्र श्रीवास्तव (पंकज) ने की, जबकि संचालन वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. आदित्य कुमार 'अंशु' ने किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ गुड्डू गुलशन (सिवान, बिहार) द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ। इसके बाद उपस्थित साहित्यकारों एवं अतिथियों ने मां सरस्वती, भिखारी ठाकुर तथा डॉ. रामसेवक 'विकल' के चित्रों पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
मुख्य वक्ता डॉ. (प्रो.) शैलेश सिंह 'शौर्य' ने भिखारी ठाकुर के संघर्षपूर्ण जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने साधारण जीवन से उठकर भोजपुरी लोकनाट्य को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उन्होंने बताया कि कलकत्ता और जगन्नाथ पुरी की यात्राओं के बाद अपने गांव लौटकर रामलीला से लोकनाट्य की शुरुआत की और बाद में अपनी नाटक मंडली बनाकर देशभर में मंचन किया।
डॉ. आदित्य कुमार 'अंशु' ने कहा कि भिखारी ठाकुर सांस्कृतिक चेतना के प्रतीक थे। उनके नाटक आज भी देश-विदेश में मंचित किए जाते हैं और अनेक कलाकार उनकी रचनाओं के माध्यम से आजीविका अर्जित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बिदेसिया, बेटी बेचवा, विधवा विलाप, गबर घिचोर, पुत्रवधु, भाई-विरोध और कलयुग प्रेम जैसे नाटकों ने भोजपुरी समाज को नई दिशा दी तथा उनकी सैकड़ों पुस्तकों ने भोजपुरी साहित्य को समृद्ध बनाया।
कार्यक्रम में अशहर खुर्शीद ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की, जबकि शेषनाथ विद्यार्थी ने देवी गीत (पचरा) से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कुमारी प्रज्ञा शर्मा ने लोक साहित्य और लोकनाट्य में भिखारी ठाकुर के योगदान पर विचार व्यक्त किए। सतीश कुमार गुप्ता, हरिओम श्रीवास्तव, विनोद राजवंशी, अफजल अहमद तथा डॉ. सेराज अहमद ने भी अपने विचार रखते हुए भिखारी ठाकुर के साहित्य और रंगकर्म को संरक्षित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
अध्यक्षीय संबोधन में शैलेन्द्र श्रीवास्तव (पंकज) ने बताया कि संजय उपाध्याय द्वारा बिदेसिया नाटक का 800 से अधिक बार सफल मंचन किया जा चुका है, जो भिखारी ठाकुर की लोकप्रियता का प्रमाण है।
इस अवसर पर आशुतोष तिवारी, विजय राम, इमरान अली, सद्दाम अली सहित अनेक साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में डॉ. आदित्य कुमार 'अंशु' ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
