
करछना महाशिवरात्रि के शुभ अवसर पर नैनी सरगम से एडीए, जीसी मेवा लाल की बघिया शंकर ढाल, कॉटन मिल तक शिव बारात निकाली गई। इस बारात में सैकड़ों की संख्या में शिव भक्त मौजूद रहे। साथ ही भोलेनाथ की बारात में बिच्छू, बंदर के रूप में शिव भक्त डीजे की धुन पर नाचते गाते चल रहे थे। बीच-बीच में भक्त ठंडाई पिला कर पुण्य के भागीदार बने ।
इसके पहले माघ मेले का अंतिम स्नान पर्व पर लाखों श्रद्धालुओं ने संगम में आस्था की डुबकी लगाई। बारात में शिव भक्त हर हर महादेव के उद्घोष के साथ श्रद्धालु आगे बढ़ रहे थे। पण्डित राम प्रसाद शुक्ल बताते हैं कि महाशिवरात्रि हिंदुओं का एक धार्मिक त्योहार है, जिसे हिंदू धर्म के प्रमुख देवता महादेव अर्थात शिव जी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। महाशिवरात्रि का पर्व फाल्गुन मास में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है। इस दिन शिवभक्त एवं शिव में श्रद्धा रखने वाले लोग व्रत- उपवास रखते हैं और विशेष रूप से भगवान शिव की आराधना करते हैं।
उन्होंने बताया की ऐसा माना जाता है कि इस विशेष दिन ही ब्रम्हा के रूद्र रूप में मध्यरात्रि को भगवान शंकर का अवतरण हुआ था। यह भी मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव ने तांडव कर अपना तीसरा नेत्र खोला था और ब्रम्हांड को इस नेत्र की ज्वाला से समाप्त किया था। इसके अलावा कई स्थानों पर इस दिन को भगवान शिव के विवाह से भी जोड़ा जाता है और यह माना जाता है कि इसी पावन दिन भगवान शिव और मां पार्वती का विवाह हुआ था।
उन्होंने बताया की वैसे तो प्रत्येक माह में एक शिवरात्रि होती है, लेकिन फाल्गुन माह की कृष्ण चतुर्दशी को आने वाली इस शिवरात्रि का अत्यंत महत्व है, इसलिए इसे महाशिवरात्रि कहा जाता है। इस अवसर पर नयन कुशवाहा, पंडित वीरेंद्र शर्मा, बबलू तिवारी, दिलीप केसरवानी, बृजेश सिंह, प्रमोद सिंह, राजकुमार कुशवाहा, दिनेश केसरवानी, धीरेंद्र यादव, विजय कुशवाहा, अरविंद कुमार सहित एक से अधिक भक्त मौजूद रहे।
