प्रयागराज :
उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र परिसर में आयोजित 'दिव्यांग समागम एवं संस्कृति महोत्सव' में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने दिव्यांग बच्चों की प्रतिभा, आत्मविश्वास और स्वाभिमान की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजन समाज पर बोझ नहीं हैं, बल्कि यह हमारी सामाजिक जिम्मेदारी है। सक्षम संस्था और शिक्षकों द्वारा इन बच्चों की प्रतिभा को निखारने का कार्य अत्यंत सराहनीय है।
प्रमुख बिंदु एवं घोषणाएं:
सम्मानजनक शब्द की पहल: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 'विकलांग' के स्थान पर 'दिव्यांग' संबोधन की पहल से इन्हें एक नई गरिमा और सम्मान मिला है।
प्रमाण पत्र बनवाने में न भटके दिव्यांग: उपमुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनवाने के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कार्यालय आने वाले लोगों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो और उन्हें पूरी सम्मानपूर्वक सुविधा मिले।
समस्याओं का प्राथमिकता पर समाधान: सरकार दिव्यांगजनों की व्यावहारिक समस्याओं को लिखित रूप में लेकर उनका समयबद्ध और प्राथमिकता पर समाधान कराएगी। लापरवाही बरतने वालों पर सख्त निर्देश दिए जाएंगे।
आर्थिक सुरक्षा व पेंशन: प्रदेश सरकार ने दिव्यांगजन पेंशन राशि को ₹300 से बढ़ाकर ₹1,500 प्रतिमाह कर दिया है। साथ ही गरीब दिव्यांग परिवारों को 'मुख्यमंत्री आवास योजना' के तहत आवास उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
विवाह और उपकरण सहायता: मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के अंतर्गत सामान्य जोड़ों की तरह दिव्यांगजनों के विवाह के लिए भी समान सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही जरूरतमंदों को मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल और अन्य सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
डिप्टी सीएम ने अंत में कहा कि दिव्यांगजनों को दया की नहीं, बल्कि सम्मान, सहयोग और समान अवसरों की आवश्यकता है। सरकार और समाज को मिलकर इनके कल्याण के लिए निरंतर कार्य करना होगा।


