"भारतीय ज्ञान प्रणाली : पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक चुनौतियों के बीच सेतु" विषयक राष्ट्रीय सम्मेलन के अवसर पर राजकीय पांडुलिपि पुस्तकालय द्वारा भारतीय ज्ञान प्रणाली के ग्रंथीय साक्ष्य विषयक पांडुलिपियों की छायाचित्र प्रदर्शनी का आयोजन दिनांक 10 अक्टूबर 2026 को प्रातः 10 बजे गोविन्द वल्लभ पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान झूँसी में किया जा रहा है l
भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण, संवर्धन को आधुनिक ज्ञान की चुनौतियों से जोड़ने के उद्देश्य से गोविंद बल्लभ पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान, झूँसी एवं एसोसिएशन ऑफ इंडियन लॉ लाइब्रेरीज के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा हैं।
हस्त लिखित ग्रंथों की इस प्रदर्शनी में ऋग्वेद संहिता, वाजसनेयी संहिता, सामवेद एवं यजुर्वेद संहिता, भागवत् महापुराण से सम्बन्धित गोपिकागीत, सन् 1611 ई0 की महाभारत, नवरत्नकाव्य, सन् 1635 ई0 में लिखित अभिज्ञान शाकुंतलम, सन् 1659 के पाण्डवगीता, सन् 1713 ई0 में लिखित मेघदूत, सन् 1794 ई0 की रामचरितमानस, सन् 1802 ई0 की लघु चाणक्य नीति,, सन् 1833 ई0 की गीत गोविन्द, सन् 1868 ई0 की लीलावती, आदि सचित्र पाण्डुलिपि के छायाचित्र के अतिरिक्त सन् 1873 ई0 में लिखित राजतरंगिणी, भागवत् पुराण, रघुवंश महाकाव्य, नैषधीयचरित, योगसूत्र, विल्हण कवि की विक्रमांक देवचरित, शिशुपाल वध, भगवान श्रीकृष्ण से सम्बन्धित पाण्डुलिपियों के मनोहारी चित्र, ताड़पत्र की पाण्डृलिपियों के छायाचित्र तथा, बल्लभाचार्य जयति स्तोत्र, महर्षि भृगु की भृगु संहिता के साथ-साथ फारसी भाषा में वर्णित महाभारत, भागवत महापुराण, पद्मपुराण, लीलावती, रामायण मसीही के छायाचित्र प्रदर्शित किए जाएंगे l
इस राष्ट्रीय सम्मेलन में देश के नामचीन विद्वानों सहित विभिन्न प्रांत से लगभग 150 प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। इनमें दिल्ली पब्लिक लाईब्रेरी, नीति आयोग पुस्तकालय सहित विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों के पुस्तकालयाध्यक्ष, सूचना विज्ञान विशेषज्ञ, शिक्षाविद और शोधकर्ता भाग लेंगे।
इनमें भारतीय ज्ञान परंपरा, डिजिटलीकरण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, आधुनिक सूचना सेवाओं और बदलते दौर में पुस्तकालयों की भूमिका पर चर्चा होगी ।
गुलाम सरवर
पांडुलिपि अधिकारी
संस्कृति विभाग
उ० प्र०,प्रयागराज

