प्रयागराज। उत्तर प्रदेश को क्लबफुट (जन्मजात पैर का टेढ़ापन) से मुक्त बनाने के संकल्प के साथ अनुष्का फाउंडेशन द्वारा शनिवार (10 अक्टूबर) को जिला चिकित्सालय तेज बहादुर सप्रू (बेली अस्पताल), प्रयागराज में सहयोगात्मक पर्यवेक्षण (Collaborative Supervision) का सफल आयोजन किया गया। इस दौरान फाउंडेशन के मास्टर ट्रेनर और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने संयुक्त रूप से क्लबफुट से पीड़ित 40 बच्चों का परीक्षण एवं नि:शुल्क उपचार किया।
अनुष्का फाउंडेशन के मास्टर ट्रेनर डॉ. अवनीश कुमार सिंह, डॉ. विकास, डॉ. अजय राज पाल, डॉ. राधेश्याम मौर्या तथा डॉ. प्रदीप पाण्डेय समेत अन्य वरिष्ठ चिकित्सकों ने बच्चों को देखा और पोंसेटी पद्धति (Ponseti Method) के तहत आवश्यक चिकित्सीय देखभाल प्रदान की।
800 में से 1 नवजात बच्चा होता है प्रभावित
विशेषज्ञों के अनुसार, क्लबफुट एक जन्मजात विकृति है जो भारत में औसतन 800 में से 1 नवजात शिशु को प्रभावित करती है। यदि समय पर इसका इलाज न कराया जाए तो बच्चा जीवनभर के लिए शारीरिक विकलांगता का शिकार हो सकता है। हालांकि, सही समय पर पोंसेटी पद्धति द्वारा इसका पूर्ण इलाज संभव है, जिससे बच्चा सामान्य जीवन जी सकता है।
तीन चरणों में होता है इलाज:
तीन चरणों में होता है इलाज:
प्रथम चरण: प्लास्टर/कास्टिंग (Casting)
द्वितीय चरण: टेनोटॉमी (Tenotomy - छोटा सा माइनर प्रोसीजर)
तृतीय चरण: बच्चे को 5 वर्ष की आयु तक विशेष जूते (Brace) पहनाना
राज्य सरकार व RBSK के साथ साझेदारी
अनुष्का फाउंडेशन उत्तर प्रदेश सरकार के स्वास्थ्य विभाग, राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK), आशा कार्यकर्ताओं और स्थानीय चिकित्सा तंत्र के साथ मिलकर प्रदेश भर में जागरूकता अभियान और उपचार क्लिनिक चला रहा है। फाउंडेशन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश का कोई भी बच्चा क्लबफुट की वजह से विकलांगता का शिकार न बने।
कार्यक्रम में अनुष्का फाउंडेशन की ओर से ब्रांच मैनेजर सौरभ शुक्ला और प्रोग्राम एग्जीक्यूटिव विक्रांत विश्वास समेत अस्पताल के अन्य कर्मचारी उपस्थित रहे। फाउंडेशन ने सभी दानदाताओं और समर्थकों का आभार व्यक्त किया।

