बलिया (यूपी)। उत्तर प्रदेश और बिहार की सीमा को जोड़ने वाले खरीद (बलिया) और दरौली (सीवान) के बीच घाघरा नदी पर निर्माणाधीन पक्का पुल वर्षों से अधूरा पड़ा है। प्रतिदिन स्टीमर के सहारे नदी पार करने को मजबूर शिक्षकों, व्यापारियों और आम जनता ने इस गंभीर समस्या को लेकर जिलाधिकारी (डीएम) को ज्ञापन सौंपकर निर्माण कार्य शीघ्र पूरा कराने की गुहार लगाई है।
ब्यूरो चीफ प्रदीप बच्चन की रिपोर्ट के अनुसार, शिक्षक हरिबंश बहादुर सिंह समेत अन्य शिक्षकों और स्थानीय व्यापारियों ने अपनी व्यथा साझा करते हुए बताया कि उन्हें हर दिन यूपी के खरीद घाट से स्टीमर के जरिए बिहार के स्कूलों और बाजारों तक जाना पड़ता है। वर्तमान में घाघरा नदी पूरे उफान पर है, जिससे यात्रा के दौरान किसी बड़े हादसे की आशंका लगातार बनी रहती है।
शिक्षकों और व्यापारियों का कहना है कि इस पक्के पुल के निर्माण कार्य की स्वीकृति वर्ष 2016 में ही मिल गई थी और इसे 2022 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। हालांकि, तय सीमा बीत जाने के बाद भी परियोजना अधर में लटकी हुई है।
अंतर्राजीय संपर्क और क्षेत्रीय विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण:
ज्ञापन में स्पष्ट किया गया है कि यह पुल दोनों राज्यों के सीमावर्ती इलाकों के लिए एक प्रमुख अंतर्राजीय मार्ग है। इसके बन जाने से यूपी के गोरखपुर, बेल्थरारोड, नगरा, सिकंदरपुर, मनियर, बेरुआरबारी, बांसडीह और खरीद का संपर्क सीधे बिहार के दरौली, मैरवा, सीवान, मांझी और सारण क्षेत्रों से आसान हो जाएगा। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार, कृषि, दुग्ध व्यवसाय और रोजगार के सिलसिले में रोज सफर करने वाले हजारों यात्रियों के समय और पैसों की भारी बचत होगी।
ज्ञापन में की गई प्रमुख मांगें:
कारणों की समीक्षा: परियोजना की वर्तमान प्रगति और निर्माण में हुए विलंब के कारणों की उच्च स्तरीय समीक्षा कराई जाए।
कार्य प्रारंभ की तिथि: ठप पड़े निर्माण कार्य को तत्काल फिर से शुरू करने के लिए एक निश्चित समय-सीमा तय की जाए।
एप्रोच रोड का निर्माण: मुख्य पुल के साथ-साथ दोनों तरफ की एप्रोच रोड का निर्माण समयबद्ध तरीके से पूरा कराया जाए।
नियमित निगरानी: संबंधित विभाग और कार्यदायी संस्था के कामकाज की नियमित समीक्षा और मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए।
प्रशासनिक समन्वय: आवश्यकतानुसार उत्तर प्रदेश और बिहार प्रशासन के अधिकारियों के बीच आपसी तालमेल बिठाकर काम में तेजी लाई जाए।
वर्षों से लटकी यह परियोजना अब क्षेत्रवासियों के लिए बेहद जरूरी जनसुविधा बन चुकी है। जनहित को ध्यान में रखते हुए स्थानीय लोगों ने शासन-प्रशासन से इस मामले में तत्काल और प्रभावी हस्तक्षेप की मांग की है।


