प्रदीप बच्चन (ब्यूरो चीफ) बलिया (यूपी)। लगातार असफलताओं से निराश होकर हार मान लेने वालों के लिए बलिया के सत्यम ओझा एक नई मिसाल बनकर उभरे हैं। मनियर ब्लॉक के विशुनपुरा ग्राम पंचायत निवासी 25 वर्षीय सत्यम ने लगातार 14 बार असफल होने के बावजूद अपना हौसला नहीं खोया और 15वें प्रयास में संयुक्त रक्षा सेवा (CDS) परीक्षा में ऑल इंडिया 10वीं रैंक हासिल की। इस शानदार सफलता के साथ ही उन्होंने न केवल अपने गांव बल्कि पूरे जिले का नाम रोशन किया है। CDS में चयन के बाद सत्यम भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट पद के लिए चेन्नई स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (OTA) में प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे।
गांव में जश्न का माहौल, ढोल-नगाड़ों और आतिशबाजी से हुआ स्वागत
शुक्रवार को सत्यम के पहली बार बलिया रेलवे स्टेशन पहुंचने पर परिजनों, शुभचिंतकों और स्थानीय नागरिकों ने उनका भव्य स्वागत किया। इसके बाद गाड़ियों के काफिले के साथ वे देर शाम अपने पैतृक गांव विशुनपुरा पहुंचे। गांव पहुंचते ही ग्रामीणों ने पटाखे फोड़कर, फूल-मालाएं पहनाकर और आरती उतारकर खुशी का इजहार किया। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि एवं प्रधान संघ के जिलाध्यक्ष श्रीराम तिवारी उर्फ बबलू के नेतृत्व में ग्रामीणों ने सत्यम का अभिनंदन किया।
निराशा के दौर में भी लक्ष्य पर बनाए रखा ध्यान
सत्यम ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव के ही स्कूल से पूरी की। इसके बाद वे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए देहरादून चले गए। लगातार कई प्रयासों में सफलता न मिलने पर उनके मन में कई बार तैयारी छोड़कर निजी नौकरी (प्राइवेट जॉब) करने का विचार आया, लेकिन अपने अंतिम लक्ष्य को याद कर वे फिर से दोगुनी ऊर्जा के साथ पढ़ाई में जुट जाते थे। सत्यम ने अपनी हर असफलता के बाद कमियों की समीक्षा की और तैयारी की रणनीति को सुधारा, जिसका सुखद परिणाम आखिरकार 15वें प्रयास में मिला।
माता-पिता के त्याग और संघर्ष को दिया सफलता का श्रेय
सत्यम के पिता विद्या शंकर ओझा और माता रेखा ओझा हरियाणा के सोनीपत में एक निजी कंपनी में कार्यरत हैं। बेहद सीमित संसाधनों के बावजूद दोनों ने बच्चों की पढ़ाई-लिखाई से कभी समझौता नहीं किया। सत्यम अपनी इस सफलता का पूरा श्रेय अपने माता-पिता के कठिन परिश्रम, त्याग और अटूट विश्वास को देते हैं। प्रेरणा का यह सिलसिला यहीं नहीं थमता; उनकी बहन सत्या भी वर्तमान में सिविल सेवा (IAS) परीक्षा की तैयारी कर रही हैं।
युवाओं को संदेश: "असफलता से न डरें, प्रयास जारी रखें"
अपनी सफलता पर गर्व व्यक्त करते हुए सत्यम ने कहा, "सेना में अधिकारी के रूप में देश की सेवा और सुरक्षा करने का अवसर पाना मेरे लिए अत्यंत गौरव की बात है।" उन्होंने तैयारी कर रहे युवाओं से अपील की कि वे असफलताओं से बिल्कुल निराश न हों, अपनी गलतियों से सीख लें और लक्ष्य हासिल होने तक निरंतर मेहनत करते रहें।


