बलिया (यूपी)। माता-पिता के निधन के बाद महज 19 वर्ष की उम्र में अपने तीन छोटे भाई-बहनों की जिम्मेदारी संभाल रही मनियर नगर पंचायत (वार्ड नंबर 13) की खुशबू की संघर्षगाथा समाज के लिए एक प्रेरणा बन गई है।
खुशबू के पिता वीरेंद्र गोंड़ राजमिस्त्री का काम करके परिवार का पालन-पोषण करते थे। वर्ष 2016 में पैर के जख्म के इलाज के दौरान बीएचयू में उनका निधन हो गया था। इसके बाद मां रंजू देवी ने मजदूरी करके परिवार का संभाला, लेकिन कुछ समय बाद उनका भी निधन हो गया। माता-पिता के साए से वंचित होने के बाद परिवार के भरण-पोषण और देखभाल की पूरी जिम्मेदारी बड़ी बेटी खुशबू के कंधों पर आ गई।
वर्तमान में खुशबू अपनी छोटी बहन खुशी (16), भाई आदित्य (14) और बहन सुधानी (11) का पालन-पोषण कर रही हैं। परिवार के सामने रोजमर्रा के खर्चों के साथ-साथ बच्चों की पढ़ाई जारी रखना एक बड़ी चुनौती बनी हुई थी।
स्थानीय प्रशासन और समाजसेवी आए आगे
रोजगार की पहल: परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए नगर पंचायत मनियर के चेयरमैन प्रतिनिधि कुंवर विजय सिंह पप्पू ने खुशबू को नगर पंचायत में आउटसोर्सिंग के तहत रोजगार उपलब्ध कराया है, जिससे परिवार को आर्थिक सहारा मिला है।
मुफ्त शिक्षा का संकल्प: क्रिएटिव किड्स प्ले स्कूल (मनियर) की डायरेक्टर सुषमा ने बच्चों को किताबें, कॉपी और शैक्षणिक सामग्री वितरित की। उन्होंने संकल्प लिया कि खुशबू के भाई-बहन आगे जहां तक भी पढ़ना चाहेंगे, वे उन्हें घर पर मुफ्त कोचिंग देंगी। सुषमा के अनुसार, वे कक्षा शून्य से इंटरमीडिएट तक अंग्रेजी और जीव विज्ञान पढ़ाने में सक्षम हैं।
सरकारी मदद का आश्वासन: मामले का संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी ने भी खुशबू से मुलाकात कर परिवार को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का आश्वासन दिया है।
प्रशासन और स्थानीय समाजसेवियों की यह संयुक्त पहल इन अनाथ बच्चों की शिक्षा और उज्ज्वल भविष्य के लिए उम्मीद की एक नई किरण बनकर सामने आई है।

