प्रयागराज। उत्तर प्रदेश में धार्मिक पर्यटन, व्यापार और क्षेत्रीय आवागमन को रफ्तार देने के उद्देश्य से प्रयागराज मंडल में दो प्रमुख सड़क परियोजनाओं पर काम शुरू होने जा रहा है। मंडलायुक्त डॉ. लोकेश एम. की अध्यक्षता में आयोजित मंडल स्तरीय समन्वय बैठक में नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) की ₹8,316.39 करोड़ लागत वाली इन महत्वाकांक्षी परियोजनाओं की समीक्षा की गई।
चित्रकूट–राजापुर–प्रयागराज 4-लेन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर ₹3,820.96 करोड़ की लागत से 49.655 किमी लंबाई में विकसित किया जाएगा, जिससे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी एवं यातायात सुगमता के साथ धार्मिक-पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा
लेप्रोसी चौराहा, प्रयागराज से मिर्जापुर बाईपास तक एनएच-35 को ₹4,495.43 करोड़ की लागत से 80.791 किमी लंबाई में 2-लेन से 4-लेन में उन्नत किया जाएगा, जिससे यातायात क्षमता, सड़क सुरक्षा तथा प्रयागराज-मिर्जापुर के बीच यात्री एवं माल परिवहन में सुगमता आएगी
दक्षिण प्रयागराज की कनेक्टिविटी, एयरोसिटी-नैनी, मेट्रो, रिंग रोड एवं मेला यातायात को ध्यान में रखते हुए वैकल्पिक कनेक्टिविटी के विभिन्न प्रस्तावों पर चर्चा की गई। दक्षिण प्रयागराज की आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए संभावित कनेक्टिविटी के संबंध में मंत्रालय को पत्र भेजने के निर्देश दिए गए
मंडलायुक्त डॉ. लोकेश एम. की अध्यक्षता में एनएचएआई की प्रस्तावित सड़क परियोजनाओं के संबंध में मंडल स्तरीय समन्वय बैठक आयोजित की गई, जिसमें उपाध्यक्ष, प्रयागराज विकास प्राधिकरण श्री ऋषि राज, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, एनएचएआई श्री एस के सिंह तथा संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
सर्वप्रथम, चित्रकूट से राजापुर होते हुए प्रयागराज तक 49.655 किमी लंबे 4-लेन ग्रीनफील्ड एक्सेस-कंट्रोल्ड मार्ग के निर्माण पर चर्चा की गई। ₹3,820.96 करोड़ की लागत वाली इस परियोजना से चित्रकूट-राजापुर-प्रयागराज क्षेत्र की कनेक्टिविटी सुदृढ़ होने के साथ यातायात का बेहतर वितरण सुनिश्चित होगा। यह मार्ग मौजूदा आबादी वाले क्षेत्रों एवं यातायात बाधाओं से अलग एक सुगम वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराएगा, जिससे यात्रा समय एवं वाहन परिचालन लागत में कमी आएगी। साथ ही, चित्रकूट धाम, राजापुर एवं प्रयागराज जैसे प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों की कनेक्टिविटी बेहतर होने से कृषि, व्यापार, पर्यटन एवं अन्य आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी।
इसके उपरांत लेप्रोसी चौराहा, प्रयागराज से मिर्जापुर बाईपास तक 80.791 किमी लंबे एनएच-35 को 2-लेन से 4-लेन में उन्नयन किए जाने की परियोजना पर चर्चा की गई। ₹4,495.43 करोड़ की लागत वाली इस परियोजना में आवश्यक रियलाइन्मेंट एवं बाईपास भी प्रस्तावित हैं। परियोजना के पूर्ण होने से प्रयागराज-मिर्जापुर मार्ग की यातायात क्षमता में वृद्धि, सड़क सुरक्षा में सुधार तथा यात्री एवं माल परिवहन में सुगमता आएगी। इससे कृषि उत्पादों, औद्योगिक एवं वाणिज्यिक सामग्री के आवागमन के साथ क्षेत्रीय व्यापार, पर्यटन एवं आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
बैठक में अवगत कराया गया कि दोनों परियोजनाओं के अलाइनमेंट से संबंधित निर्णय मंत्रालय स्तर पर लिया जा चुका है। वर्तमान मंडल स्तरीय बैठक का उद्देश्य विभिन्न विभागों के मध्य आवश्यक समन्वय स्थापित करना है। इस दौरान संबंधित अधिकारियों द्वारा परियोजनाओं का लेआउट प्रस्तुत किया गया तथा विभिन्न विभागों से संबंधित बिंदुओं पर चर्चा की गई।
लेआउट का अवलोकन करने के उपरांत मंडलायुक्त ने दक्षिण प्रयागराज की आर्थिक गतिविधियों को सुदृढ़ करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित कनेक्टिविटी मुख्यतः उत्तरी प्रयागराज की ओर है, जबकि दक्षिण प्रयागराज में आर्थिक गतिविधियों को और बढ़ावा दिए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि परियोजना से संबद्ध किसी संभावित मार्ग अथवा कनेक्टिविटी को दक्षिण प्रयागराज से भी जोड़े जाने की संभावनाओं का परीक्षण किया जाए। इस संबंध में उन्होंने उनके स्तर से मंत्रालय को पत्र प्रेषित करने के निर्देश दिए।
उपाध्यक्ष, प्रयागराज विकास प्राधिकरण श्री ऋषि राज ने राष्ट्रीय राजमार्ग की कनेक्टिविटी को प्रस्तावित एयरोसिटी, नैनी के इंडस्ट्रियल एरिया हब, मेट्रो अलाइनमेंट तथा नैनी स्थित लेप्रोसी चौराहा से बेहतर रूप से जोड़ने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित कनेक्टिविटीज के बेहतर समन्वय एवं एकीकरण से क्षेत्र में औद्योगिक, वाणिज्यिक एवं आर्थिक गतिविधियों को और अधिक गति प्रदान की जा सकेगी।
उन्होंने माघ मेला एवं कुंभ के दौरान मिर्जापुर की ओर से आने वाले भारी यातायात को प्रयागराज शहर में प्रवेश न दिए जाने की स्थिति में उत्पन्न यातायात दबाव का उल्लेख करते हुए वैकल्पिक मार्ग के माध्यम से यातायात डायवर्ट किए जाने की आवश्यकता बताई। इस पर एनएचएआई अधिकारियों द्वारा अवगत कराया गया कि रिंग रोड के माध्यम से इस प्रकार की कनेक्टिविटी पर कार्य पहले से किया जा रहा है।
मेला अवधि में यातायात व्यवस्था को और सुगम बनाने के दृष्टिगत सिरसा क्षेत्र की कनेक्टिविटी बेहतर करने तथा मौजूदा ब्राउनफील्ड मार्ग की कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करने का सुझाव भी दिया गया। इससे माघ मेला एवं कुंभ के दौरान यातायात के प्रभावी डायवर्जन एवं सुगम संचालन में सहायता मिलेगी।
बैठक के दौरान मंडलायुक्त ने निर्देश दिए कि विकास योजनाओं का दायरा केवल उत्तरी प्रयागराज तक सीमित न रहे। दक्षिण प्रयागराज की आर्थिक क्षमता को देखते हुए इसे मुख्य कनेक्टिविटी से जोड़ने का प्रस्ताव केंद्रीय मंत्रालय को भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
एयरोसिटी व नैनी इंडस्ट्रियल हब: प्रयागराज विकास प्राधिकरण (PDA) के उपाध्यक्ष श्री ऋषि राज ने इन राजमार्गों को प्रस्तावित एयरोसिटी, नैनी इंडस्ट्रियल एरिया और मेट्रो अलाइनमेंट से एकीकृत करने का सुझाव दिया।
कुंभ व माघ मेला ट्रैफिक डायवर्जन: महाकुंभ और माघ मेले के दौरान मिर्जापुर की ओर से आने वाले भारी वाहनों के दबाव को नियंत्रित करने के लिए सिरसा क्षेत्र की कनेक्टिविटी और आउटर रिंग रोड के माध्यम से प्रभावी ट्रैफिक डायवर्जन पर सहमति बनी।
इस समन्वय बैठक में PDA उपाध्यक्ष ऋषि राज और NHAI के प्रोजेक्ट डायरेक्टर एस.के. सिंह समेत विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। मंत्रालय स्तर से अलाइनमेंट की मंजूरी मिलने के बाद अब अंतर-विभागीय समन्वय के जरिए कार्य को गति दी जा रही है।

