गोंडा। उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में यूपी कोऑपरेटिव बैंक की बड़गांव शाखा एक बार फिर वित्तीय हेराफेरी को लेकर चर्चा में है। बैंक में 20.10 लाख रुपये के गबन का नया मामला उजागर होने के बाद, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) के आदेश पर नगर कोतवाली पुलिस ने मंगलवार देर शाम दो तत्कालीन शाखा प्रबंधकों सहित आठ लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और गबन की गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की है।
फर्जीवाड़े का पूरा खेल: लोन के पैसों में ऐसे हुई हेराफेरी
यह कार्रवाई कौड़िया थाना क्षेत्र के चैनापुर निवासी पीड़िता रुकमनी सिंह की याचिका पर हुई है। रुकमनी सिंह ने जुलाई 2024 में बैंक में बचत व ऋण खाता खुलवाया था, जिसमें 30 लाख रुपये का लोन स्वीकृत हुआ था। पीड़िता का आरोप है कि बैंक अधिकारियों ने अपने बाहरी सहयोगियों के साथ मिलकर उनके खाते की रकम में सेंधमारी की:
अवैध ट्रांसफर: ऋण खाते से 7.50 लाख और 5 लाख रुपये अवैध तरीके से किसी अन्य व्यक्ति के खाते में भेज दिए गए।
रकम हड़पना: शाखा प्रबंधक के कहने पर जमा करने के लिए दिए गए 4.60 लाख रुपये खाते में जमा ही नहीं किए गए।
किश्त में कटौती: 1 लाख रुपये की किश्त में से सिर्फ 40 हजार रुपये जमा दिखाए गए और शेष 60 हजार रुपये हड़प लिए गए।
साक्ष्य मिटाना: धोखाधड़ी का पता न चले, इसलिए पीड़िता के खाते से पंजीकृत मोबाइल नंबर हटा दिया गया और उन्हें बैंक स्टेटमेंट देने से भी मना कर दिया गया।
बैंक के चक्कर काटने के बाद जब सुनवाई नहीं हुई, तो पीड़िता ने अदालत का दरवाजा खटखटाया, जिसके बाद पुलिस को प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश जारी हुआ।
इन 8 आरोपियों पर दर्ज हुआ मुकदमा
नगर कोतवाल विंदेश्वरी मणि त्रिपाठी के अनुसार, कोर्ट के निर्देश पर दर्ज एफआईआर में निम्नलिखित अधिकारियों और सहयोगियों को नामजद किया गया है:
- अजय कुमार पाल (तत्कालीन शाखा प्रबंधक)
- पवन कुमार पाल (तत्कालीन शाखा प्रबंधक)
- सुशील कुमार गौतम (सहायक प्रबंधक)
- पवन कुमार तिवारी (कैशियर)
- करतार तिवारी (सहयोगी)
- संजीत कुमार जायसवाल (सहयोगी)
- शिवाकांत वर्मा उर्फ पंकज (सहयोगी)
- राघवराम उर्फ रग्घू (सहयोगी)
पहले भी हो चुका है 21.47 करोड़ का बड़ा घोटाला
गौरतलब है कि बड़गांव शाखा का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले बैंक की आंतरिक ऑडिट रिपोर्ट में 210 फर्जी खातों के जरिये करीब 21.47 करोड़ रुपये के विशाल गबन का खुलासा हुआ था। उस मामले में जनवरी 2026 में 16 आरोपियों पर मुकदमा दर्ज किया गया था, जिनमें से 7 की गिरफ्तारी हो चुकी है।
पुलिस अब इस बात की गहनता से जांच कर रही है कि क्या 20.10 लाख रुपये के इस नए गबन के तार भी उसी पुराने 21.47 करोड़ रुपये वाले बड़े घोटाले से जुड़े हुए हैं।

