मा0 राज्यपाल जी की अध्यक्षता में प्रो. राजेंद्र सिंह (रज्जू भय्या) विश्वविद्यालय प्रयागराज का नवम दीक्षांत समारोह संपन्न
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मा0 राज्यपाल जी की अध्यक्षता में प्रो. राजेंद्र सिंह (रज्जू भय्या) विश्वविद्यालय प्रयागराज का नवम दीक्षांत समारोह संपन्न



 मा0 राज्यपाल जी की अध्यक्षता में प्रो. राजेंद्र सिंह (रज्जू भय्या) विश्वविद्यालय प्रयागराज का नवम दीक्षांत समारोह संपन्न


*दीक्षांत समारोह में 81,882 विद्यार्थियों को उपाधियाँ, 236 मेधावियों को 242 पदक प्रदान किए गए*


*500 आंगनबाड़ी किट वितरित, 900 बेटियों का एचपीवी टीकाकरण*


*दीक्षांत समारोह में उत्कृष्ट विद्यार्थियों, शिक्षकों, खिलाड़ियों एवं अधिकारियों का सम्मान*


*शिक्षा, कौशल विकास, एचपीवी टीकाकरण और नवाचार पर राज्यपाल ने दिए महत्वपूर्ण निर्देश*


*शिक्षा, कौशल और नवाचार से विकसित भारत का निर्माण करें युवा*


*छात्राओं की उत्कृष्ट उपलब्धियाँ महिला सशक्तीकरण का सशक्त प्रमाण*


*विद्यार्थियों को डिजिलॉकर से डिग्री डाउनलोड करने के लिए प्रेरित करें विश्वविद्यालय प्रदेश के 66,143 आंगनबाड़ी केंद्रों को किट उपलब्ध, एचपीवी टीकाकरण अभियान को और गति दें*


*महान विभूतियों के जीवन पर अध्ययन, शोध और प्रतियोगिताएँ आयोजित करें विश्वविद्यालय*


*खाली भवनों में कौशल विकास कार्यक्रम संचालित कर युवाओं को रोजगार से जोड़ें*


*राष्ट्रीय शिक्षा नीति और कौशल विकास से युवा बनेंगे विकसित भारत के शिल्पकार*


*प्रोफेसर राजेंद्र सिंह (रज्जू भय्या) विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक उत्कृष्टता की दिशा में स्थापित किए नए मानक-माननीय राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल*


*प्रयागराज 16 जुलाई, 2026*


      उत्तर प्रदेश की माननीय राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल जी की अध्यक्षता में गुरूवार को प्रोफेसर राजेंद्र सिंह (रज्जू भय्या) विश्वविद्यालय, प्रयागराज का नवम दीक्षांत समारोह संपन्न हुआ।


      समारोह में कुल 81,882 उपाधियाँ प्रदान की गईं। इनमें 42,960 छात्राएँ तथा 38,922 छात्र सम्मिलित हैं। उत्कृष्ट शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए 236 विद्यार्थियों को कुल 242 पदक प्रदान किए गए, जिसमें विभिन्न विषयों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कुल 73 विधार्थिंयों को गोल्ड मेडल, 82 विद्यार्थियों को सिल्वर मेडल व 87 विद्यार्थियों को कांस्य मेडल प्रदान किया। पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों में 158 छात्राएँ तथा 78 छात्र शामिल हैं। सभी उपाधियों को डिजीलॉकर पर उपलब्ध कराया गया। मा0 राज्यपाल जी ने विश्वविद्यालय प्रशासन को निर्देश दिए कि विद्यार्थियों को डिग्रियों की हार्ड कॉपी प्राप्त करने के बजाय डिजिलॉकर के माध्यम से अपनी डिग्रियां ऑनलाइन डाउनलोड करने के लिए प्रेरित किया जाए।



दीक्षांत समारोह के अवसर पर कुलाधिपति जी के द्वारा विश्वविद्यालय की तीन महत्वपूर्ण शैक्षणिक सुविधाओं-अकादमिक भवन-सी, लर्निंग रिसोर्स सेंटर (प्रथम तल) एवं समेकित सुविधा भवन का लोकार्पण किया गया। इन भवनों से हजारों विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा और शोध की सुविधा उपलब्ध होगी। कुलाधिपति जी के द्वारा समाजसेवी श्री खत्री अब्दुल सत्तार बापू को उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए मानद डी.लिट. उपाधि से सम्मानित किया। उन्होंने मानद उपाधि प्राप्तकर्ता ने अपने उद्बोधन में कहा कि शिक्षा के साथ मानवता की सेवा ही सच्ची उपाधि है। इस दौरान विश्वविद्यालय की वार्षिक स्मारिका एवं विभिन्न प्रतिवेदनों का लोकार्पण किया गया।


     अध्यापन के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले 04 शिक्षकों, खेलकूद में राष्ट्रीय स्तर पर पदक प्राप्त करने वाले 14 खिलाड़ियों तथा एचपीवी टीकाकरण अभियान में उल्लेखनीय सहयोग देने वाले अधिकारियों को सम्मानित किया गया। साथ ही विश्वविद्यालय द्वारा सामाजिक दायित्व के अन्तर्गत गोद लिए गए गांवों में आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेता छात्र-छात्राओं को पुरस्कार प्रदान किए गए। प्राथमिक विद्यालयों के बच्चों के लिए जन भवन की ओर से पुस्तकें भेंट स्वरूप प्रदान की गईं। कार्यक्रम में प्राथमिक विद्यालयों के बच्चों के द्वारा पर्यावरण सुरक्षा ही जीवन सुरक्षा हैं, विषय पर आधारित मनमोहक प्रस्तुती दी गयी। कार्यक्रम में राजकीय बालिका गृह की बालिकाओं द्वारा ‘‘आरम्भ है, प्रचण्ड है’’ गीत पर प्रस्तुती देकर सभी का मन मोह लिया। समारोह में स्कूली बच्चों ने आकर्षक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए, जिनकी माननीय राज्यपाल जी ने सराहना करते हुए प्रतिभागी बच्चों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया। महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा देते हुए मा0 कुलाधिपति ने महोदया द्वारा 5 आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को स्वास्थ्य किट प्रदान की गयी। समारोह में दीक्षोत्सव की लघु फिल्म प्रदर्शित की गयी। मा0 राज्यपाल जी के द्वारा प्रो0 राजेन्द्र सिंह ‘‘रज्जू भैया’’ विश्वविद्यालय परिसर में पौधरोपण भी किया गया।

 

      मा0 राज्यपाल जी ने बताया कि आज जनपद प्रयागराज एवं जनपद कौशांबी के आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए 500 आंगनबाड़ी किट प्रदान की गई हैं। इस कार्य के लिए उन्होंने दोनों जनपदों के अधिकारियों को बधाई देते हुए कहा कि प्रदेश में अब तक कुल 66,143 आंगनबाड़ी केंद्रों को आंगनबाड़ी किट उपलब्ध कराई जा चुकी है। उन्होंने कहा कि आज जनपद प्रयागराज एवं जनपद कौशांबी में पुलिस कर्मियों की बेटियों सहित 900 बेटियों का एचपीवी टीकाकरण किया गया, जिसके लिए उन्होंने संबंधित अधिकारियों को बधाई दी। उन्होंने संकल्प लेने का आह्वान करते हुए कहा कि सभी स्कूलों एवं कॉलेजों में अभियान चलाकर अधिक से अधिक बेटियों का एचपीवी टीकाकरण सुनिश्चित किया जाए। मा0 राज्यपाल जी ने कहा कि प्रधानमंत्री जी द्वारा यह वैक्सीन निःशुल्क उपलब्ध करा दी गई है, इसलिए सभी पात्र बेटियों को इसका लाभ अवश्य मिलना चाहिए।


      मा0 राज्यपाल जी ने टीका लगवाने वाली बेटियों से संवाद किया, उनका उत्साहवर्धन किया तथा उन्हें स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने और एचपीवी टीकाकरण के महत्व को अन्य लोगों तक भी पहुँचाने के लिए प्रेरित किया।


      मा0 राज्यपाल जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि तीर्थराज प्रयागराज की पुण्यधरा, जहाँ ज्ञान, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का दिव्य संगम अनादि काल से मानवता का मार्ग आलोकित करता आया है, उस पावन भूमि पर स्थित प्रोफेसर राजेंद्र सिंह (रज्जू भय्या) विश्वविद्यालय के नवम दीक्षांत समारोह में उपस्थित होकर उन्हें अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। उन्होंने कहा कि महान शिक्षाविद्, प्रख्यात वैज्ञानिक एवं राष्ट्रनिष्ठ व्यक्तित्व प्रोफेसर राजेंद्र सिंह (रज्जू भय्या) का सरल जीवन, वैज्ञानिक चिंतन, राष्ट्रसेवा तथा मानवीय मूल्यों के प्रति समर्पण हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत है। राज्यपाल जी ने विश्वविद्यालय को निर्देश दिया कि जिस महान व्यक्तित्व के नाम पर विश्वविद्यालय का नाम रखा गया है, उनके जीवन एवं कृतित्व से विद्यार्थियों को परिचित कराने के लिए विद्यार्थियों को पुस्तकालय में अध्ययन के लिए प्रेरित किया जाए, उनके जीवन पर विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाए तथा पुस्तक का प्रकाशन भी कराया जाए। उन्होंने कहा कि प्रतियोगिताओं के विजेताओं को जन भवन में आमंत्रित कर सम्मानित किया जाएगा।


      मा0 राज्यपाल जी नेे सभी विद्यार्थियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ देते हुए दीक्षांत समारोह की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं और उपाधियों एवं पदकों में छात्राओं की उल्लेखनीय बढ़त की सराहना करते हुए कहा कि यह उपलब्धि भारतीय समाज में महिलाओं की शिक्षा, आत्मविश्वास और उत्कृष्टता का सशक्त प्रमाण है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने माता-पिता के प्रति सदैव कृतज्ञ रहने का आह्वान किया तथा कहा कि माताएं अपने बच्चों के लिए सर्वाधिक त्याग करती हैं, इसलिए उनका सम्मान प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है। माननीय प्रधानमंत्री जी द्वारा प्रारंभ किया गया एक पेड़ माँ के नाम अभियान मातृ सम्मान का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने माता-पिता एवं दादा-दादी की सेवा और सम्मान को जीवन का लक्ष्य बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि समाज में वृद्धाश्रमों की आवश्यकता कम होना हम सभी का सामूहिक लक्ष्य होना चाहिए।


       मा0 राज्यपाल जी ने मुख्य अतिथि, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र, नई दिल्ली के सदस्य सचिव श्री सच्चिदानंद जोशी जी का स्वागत करते हुए कहा कि उन्होंने शिक्षा, पत्रकारिता, इतिहास, संस्कृति एवं कला के क्षेत्र में अपने ज्ञान, नेतृत्व और सृजनात्मक योगदान से विशिष्ट पहचान बनाई है। एक शिक्षाविद्, इतिहासकार, लेखक, कवि, अभिनेता एवं प्रभावशाली वक्ता के रूप में श्री जोशी जी का सान्निध्य विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायी है।


      मा0 राज्यपाल जी ने प्रसन्नता व्यक्त की कि प्रोफेसर राजेंद्र सिंह (रज्जू भय्या) विश्वविद्यालय ने नैक में ए ग्रेड प्राप्त कर अपनी शैक्षणिक उत्कृष्टता का परिचय दिया है। यदि विश्वविद्यालय थोड़ा और प्रयास करता तो ए प्लस प्लस ग्रेड भी प्राप्त कर सकता था। उन्होंने कहा कि जिन विश्वविद्यालयों को ए प्लस प्लस ग्रेड प्राप्त हुआ है, एनआईआरएफ और वर्ल्ड रैंकिंग में भी बेहतर स्थान मिला है, ऐसे विश्वविद्यालयों में विदेशी विद्यार्थियों की संख्या बढ़ी है। राज्यपाल जी ने विश्वविद्यालय द्वारा परीक्षा एवं मूल्यांकन प्रणाली में आधुनिक तकनीक अपनाने, उत्तर पुस्तिकाओं के ऑनलाइन अवलोकन जैसी पारदर्शी व्यवस्था लागू करने की सराहना करते हुए कहा कि किसी भी विद्यार्थी के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए और उत्तर पुस्तिकाओं का निष्पक्ष एवं गुणवत्तापूर्ण मूल्यांकन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।


       मा0 राज्यपाल जी विश्वविद्यालय प्रशासन को निर्देश दिया कि यदि किसी विद्यार्थी को उच्च शिक्षा, विशेषकर विदेश में अध्ययन, रोजगार अथवा अन्य आवश्यक कार्यों के लिए अपनी डिग्री अथवा प्रमाण-पत्र की आवश्यकता हो, तो उसे दीक्षांत समारोह की प्रतीक्षा न कराई जाए। ऐसे विद्यार्थियों को आवश्यक प्रक्रिया पूर्ण होने पर तत्काल डिग्री एवं प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराए जाएँ, ताकि उनके शैक्षणिक एवं व्यावसायिक अवसर किसी भी प्रकार से प्रभावित न हों।


      अपने उद्बोधन में मा0 राज्यपाल जी ने भारत के महान पौराणिक पुरुषों, ऋषि-मुनियों तथा ऐतिहासिक महापुरुषों के जीवन एवं आदर्शों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हमें उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व से प्रेरणा लेनी चाहिए तथा उनके जीवन पर गंभीर अध्ययन एवं शोध को बढ़ावा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि महर्षि भारद्वाज ने विमान निर्माण की अवधारणा और उसका प्रारूप प्रस्तुत किया था तथा रामायण के पात्र कुंभकर्ण के संबंध में भी अनेक प्राचीन संदर्भ उपलब्ध हैं, जिनका गंभीर अध्ययन किया जाना चाहिए। मा0 राज्यपाल जी ने विश्वविद्यालयों को निर्देश दिया कि ऐसे विषयों पर शोध, अध्ययन, संगोष्ठियों एवं प्रतियोगिताओं का नियमित आयोजन किया जाए, ताकि विद्यार्थी भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा और ऐतिहासिक विरासत से परिचित होकर उससे प्रेरणा प्राप्त कर सकें।


      उन्होंने कहा कि भारत का भविष्य उसकी युवा शक्ति और शिक्षा व्यवस्था पर आधारित है। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि इस वर्ष के केंद्रीय बजट में शिक्षा क्षेत्र को विशेष प्राथमिकता देते हुए उच्च शिक्षा के बजट में लगभग 11 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। आज विद्यार्थियों को कौशल, नवाचार, उद्यमिता एवं वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप तैयार करना समय की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य से केंद्रीय बजट में 15,000 माध्यमिक विद्यालयों तथा 500 महाविद्यालयों में एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग एवं कॉमिक्स कंटेंट क्रिएटर लैब स्थापित करने का प्रस्ताव दूरदर्शी पहल है। इससे युवाओं को रचनात्मक एवं डिजिटल अर्थव्यवस्था में नए अवसर प्राप्त होंगे तथा भारत वैश्विक क्रिएटिव इंडस्ट्री में अपनी सशक्त पहचान स्थापित करेगा।


       मा0 राज्यपाल जी ने कहा कि आज के समय में शिक्षा और कौशल विकास एक-दूसरे के पूरक हैं। इसी सोच के अनुरूप स्किल इंडिया मिशन पर विशेष बल दिया जा रहा है, ताकि युवाओं को उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षित कर उन्हें अधिक रोजगारयोग्य बनाया जा सके। यह पहल युवाओं को केवल रोजगार प्राप्त करने वाला नहीं, बल्कि रोजगार सृजित करने वाला भी बनाएगी। उच्च शिक्षा को अधिक सुलभ एवं वैश्विक अवसरों से जोड़ने की दिशा में केंद्र सरकार द्वारा लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों का उल्लेख करते हुए राज्यपाल जी ने कहा कि विदेश में अध्ययन हेतु भेजी जाने वाली राशि पर टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स की दर 5 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत कर दी गई है। इससे प्रतिभाशाली विद्यार्थियों एवं उनके परिवारों पर आर्थिक बोझ कम होगा तथा उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट शिक्षा प्राप्त करने में सुविधा मिलेगी।


        मा0 राज्यपाल जी ने कहा कि विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग एवं गणित विषयों में बालिकाओं की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से प्रत्येक जिले में एक बालिका छात्रावास स्थापित करने का प्रावधान किया गया है। यह कदम न केवल बेटियों की उच्च शिक्षा को प्रोत्साहित करेगा, बल्कि उन्हें सुरक्षित, सुलभ एवं अनुकूल शैक्षिक वातावरण भी उपलब्ध कराएगा। जब हमारी बेटियाँ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आगे बढ़ेंगी, तभी भारत ज्ञान एवं नवाचार की वैश्विक महाशक्ति बनने की दिशा में और अधिक सशक्त होगा।


        उन्होंने कहा कि बजट में प्रमुख औद्योगिक एवं लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर के आसपास पाँच यूनिवर्सिटी टाउनशिप स्थापित करने का प्रस्ताव शिक्षा एवं उद्योग के बीच मजबूत सेतु का निर्माण करेगा। इससे अनुसंधान, नवाचार, स्टार्टअप, उद्योग तथा अकादमिक जगत के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित होगा और विद्यार्थियों को अध्ययन के साथ-साथ व्यावहारिक अनुभव एवं बेहतर रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। इसी प्रकार एजुकेशन टू एम्प्लॉयमेंट एंड एंटरप्राइज नामक उच्चस्तरीय स्थायी समिति का गठन शिक्षा व्यवस्था को उद्योगों एवं सेवा क्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। यह समिति समय-समय पर आवश्यक सुझाव देकर शिक्षा को अधिक प्रासंगिक, व्यावहारिक एवं भविष्य उन्मुख बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।


       मा0 राज्यपाल जी ने कहा कि आज का भारत केवल परिवर्तन का साक्षी नहीं, बल्कि परिवर्तन का नेतृत्व कर रहा है। यह वह भारत है, जो अपनी युवा शक्ति, नवाचार और सामर्थ्य के बल पर विश्व मंच पर नई पहचान बना रहा है। उन्होंने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री जी द्वारा संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं से विदेशी देश भी प्रभावित हैं तथा उन्हें समझने और अपनाने का प्रयास कर रहे हैं। आज भारत विश्व की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अग्रणी है। भारत विश्व का सबसे बड़ा वैक्सीन उत्पादक, दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल विनिर्माता तथा दूसरा सबसे बड़ा दूरसंचार बाज़ार है। कृषि के क्षेत्र में भारत दूसरा सबसे बड़ा गेहूँ उत्पादक, सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक तथा दूसरा सबसे बड़ा मत्स्य उत्पादक देश बन चुका है। मा0 राज्यपाल जी ने निर्देश दिया कि मिलेट (श्री अन्न) के उत्पादन को और अधिक बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास किए जाए।


       उन्होंने कहा कि ऑटोमोबाइल उद्योग, स्टार्टअप संस्कृति तथा अक्षय ऊर्जा सहित प्रत्येक क्षेत्र में भारत नई ऊँचाइयों को प्राप्त कर रहा है। आज भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल बाज़ार तथा तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है। सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भी भारत अपनी तेज़ प्रगति से विश्व का ध्यान आकर्षित कर रहा है। भारत विश्व के सबसे बड़े डिजिटल पहचान मंच का सफल संचालन कर रहा है तथा यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस ने डिजिटल भुगतान को जन-जन तक पहुँचाकर आर्थिक लेन-देन को सरल, सुरक्षित एवं पारदर्शी बनाया है। ड्रोन प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर, अंतरिक्ष विज्ञान तथा डिजिटल नवाचार के क्षेत्र में भारत जिस गति से आगे बढ़ रहा है, वह स्वर्णिम भविष्य का संकेत है। उन्होंने कहा कि आज विश्व भारत को केवल एक विशाल बाज़ार के रूप में नहीं, बल्कि समाधान प्रस्तुत करने वाले राष्ट्र के रूप में देख रहा है, जहाँ तकनीक के साथ मानवीय संवेदना, आर्थिक प्रगति के साथ सामाजिक समावेशन तथा आधुनिकता के साथ सांस्कृतिक मूल्यों का समन्वय दिखाई देता है।


       विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए राज्यपाल जी ने कहा कि भारत की विकास यात्रा केवल सरकारों की योजनाओं से नहीं, बल्कि युवाओं के सपनों, प्रतिभा, नवाचार एवं अथक परिश्रम से आगे बढ़ेगी। विद्यार्थी केवल अपने भविष्य के निर्माता नहीं, बल्कि विकसित भारत के शिल्पकार हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस नीति ने शिक्षा को अनिवार्यता की सीमाओं से निकालकर योग्यता, रुचि एवं प्रतिभा के अनुरूप नई दिशा प्रदान की है। अब विद्यार्थी अपनी रुचि एवं क्षमता के अनुसार विषयों का चयन कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि व्यक्तित्व का समग्र विकास, कौशल, नवाचार, अनुसंधान, सृजनात्मकता एवं उद्यमिता को बढ़ावा देना है। विश्वविद्यालय अब केवल डिग्री प्रदान करने वाले संस्थान नहीं, बल्कि विचारों को दिशा देने, नवाचार को गति देने तथा राष्ट्र निर्माण के लिए नेतृत्व तैयार करने वाले केंद्र बन रहे हैं।


       मा0 राज्यपाल जी ने कहा कि वर्ष 2014 में देश में लगभग 350 स्टार्टअप थे, जबकि आज उनकी संख्या 2 लाख से अधिक हो चुकी है और भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047, जब भारत स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूर्ण करेगा, तब आज के विद्यार्थी ही विकसित भारत के निर्माता, नीति-निर्माता, वैज्ञानिक, शिक्षक, उद्योगपति, कलाकार एवं समाज के पथप्रदर्शक होंगे। इसलिए प्रत्येक विद्यार्थी को अपने भीतर छिपी प्रतिभा को पहचानना चाहिए तथा ज्ञान को केवल अंक प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन को सार्थक बनाने का साधन बनाना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से जिज्ञासा को अपनी शक्ति, नवाचार को अपनी पहचान और उत्कृष्टता को अपना लक्ष्य बनाने का आह्वान किया। राज्यपाल जी ने कहा कि ऐसी शिक्षा व्यवस्था का निर्माण किया जाना चाहिए, जिसमें ज्ञान की गहराई, कौशल की दक्षता, विचारों की मौलिकता, चरित्र की नैतिकता और हृदय में राष्ट्रसेवा का भाव समाहित हो।


       अपने उद्बोधन में मा0 राज्यपाल जी ने स्कूली बच्चों द्वारा बनाई गई पेंटिंग्स एवं उनमें प्रदर्शित विचारों की सराहना की। उन्होंने बच्चों की गतिविधियों पर आधारित प्रदर्शनी की प्रशंसा करते हुए निर्देश दिया कि इन गतिविधियों पर एक पुस्तक तैयार कर सभी विद्यालयों को उपलब्ध कराई जाए, ताकि अन्य विद्यालय भी इससे प्रेरणा प्राप्त कर सकें। बच्चों की सुंदर हस्तलेखन (हैंडराइटिंग) की प्रशंसा करते हुए राज्यपाल जी ने कहा कि जिन विद्यार्थियों की लिखावट अच्छी नहीं है, उन्हें विशेष प्रशिक्षण दिया जाए तथा अक्षर सुधार के लिए विद्यालयों में अलग से एक पीरियड निर्धारित किया जाए। मंच पर बच्चों द्वारा प्रस्तुत कार्यक्रमों की भी उन्होंने सराहना की। राज्यपाल जी ने कहा कि बाल गृह में रह रही बच्चियों के कौशल एवं प्रतिभा को आगे बढ़ाने के लिए सभी को मिलकर प्रयास करना चाहिए। उन्होंने इस दिशा में विश्वविद्यालय द्वारा किए जा रहे कार्यों की प्रशंसा करते हुए विश्वविद्यालय को बधाई दी। राज्यपाल जी ने विश्वविद्यालय परिसर की स्वच्छता, सुव्यवस्थित भवनों एवं समग्र वातावरण की सराहना की तथा निर्माणाधीन भवनों को और अधिक सुविधाजनक एवं उपयोगी बनाने के निर्देश दिए। मा0 राज्यपाल जी ने विश्वविद्यालय को निर्देश दिए कि परिसर में खाली पड़े भवनों का उपयोग कौशल विकास कार्यक्रमों के संचालन के लिए किया जाए। जो विद्यार्थी किसी कारणवश अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ चुके हैं, उन्हें कौशल आधारित प्रशिक्षण प्रदान कर रोजगार एवं स्वरोजगार से जोड़ने के लिए प्रभावी पहल की जाए।

 

इस अवसर पर मा0 कैबिनेट मंत्री, उच्च शिक्षा विभाग श्री योगेन्द्र उपाध्याय जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि प्रयागराज की धरती ऐतिहासिक, पौराणिक नगरी है, यहां पर मां गंगा, मां यमुना, मां सरस्वती का पावन संगम है। प्रयागराज की महान धरती पर कुम्भ मेले का आयोजन होता है, जिसमें देश-विदेश से लोग यहां पर आकर इस अद्भुत समागम में सम्मिलित होते है। मा0 मंत्री जी ने प्रो0 राजेन्द्र सिंह के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि उनके लिए राष्ट्र सर्वोपरि था, इसके लिए उन्होंने अपने जीवन के सारे सुखो का त्याग कर दिया था। प्रो0 राजेन्द्र सिंह भारत मां की सेवा के लिए दृढ़संकल्पित थे। मा0 मंत्री जी ने कहा कि ऐसे महानुभाव के विश्वविद्यालय से आप लोगो ने शिक्षा प्राप्त की, आप सभी विद्यार्थी इसके लिए बधाई के पात्र है। मा0 मंत्री जी ने मेडल व उपाधि प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को ह्रदय की गहराईयों से बधाई व शुभकामनाएं दी। मा0 मंत्री जी ने कहा कि आपकी इस उपलब्धि में आपके देवतुल्य माता-पिता, गुरूजनों का विशिष्ट योगदान सम्मिलित है। आपको उनके श्रम, तपस्या को जीवन पर्यन्त याद रखना चाहिए, यही हमारी संस्कृति है। मा0 मंत्री जी ने विद्यार्थियों को राष्ट्र के प्रति उनके कर्तव्यों का बोध कराते हुए राष्ट्र की प्रगति के लिए समर्पित होकर काम करने के लिए कहा। मा0 मंत्री जी ने प्रदेश के विश्वविद्यालयों में शिक्षा का स्तर उठाने में मा0 राज्यपाल महोदया के प्रयासों की सराहना करते हुए शिक्षा में सुधार के लिए मा0 राज्यपाल महोदया के द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों, मार्गदर्शन का ही यह परिणाम है कि उत्तर प्रदेश देश के सर्वाधिक ग्रेडिंग विश्वविद्यालयों में से एक बन चुका है, यह राष्ट्र के प्रति समर्पण व राष्ट्र निर्माण का बड़ा ही सुंदर उदाहरण है। मा0 मंत्री जी ने प्रदेश के विश्वविद्यालयों की प्रगति रैंकिंग के बारे में बताते हुए कहा कि आज देश व विश्व के विश्वविद्यालयों में प्रदेश के विश्वविद्यालयों का नाम सम्मिलित है। मा0 राज्यपाल महोदया ने प्रदेश के डिग्री कालेज व एडेड कालेजों को कैसे ग्रेड प्राप्त हो, इसके लिए उनका मार्गदर्शन किया है तथा इन कालेजों को आगे बढ़ाने के लिए चयनित किया है। इस व्यवस्था से प्रदेश की शिक्षा पूरे विश्व में स्थापित होगी।


      मा0 मंत्री जी ने कहा कि मा0 प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में भारत का परचम देश ही नहीं बल्कि विश्व स्तर पर फहरा रहा है। उन्होंने देश के सामने भारत को 2047 तक विकसित भारत बनाने का विजन दिया है। माननीय प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में देश की अर्थव्यवस्था विश्व में चौथे नम्बर पर आ चुकी है। भारत को विकसित बनाने के कार्य में युवाओं की बड़ी भूमिका है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि आप संकल्प लें कि आपने जो सीखा, समझा, समाज से जो पाया व लिया, उसे हम समाज को समर्पित करें।


मा0 राज्य मंत्री, उच्च शिक्षा विभाग श्रीमती रजनी तिवारी ने कहा कि प्रो0 राजेन्द्र सिंह रज्जू भैया विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शामिल होने पर मुझे अत्यंत प्रसन्नता तथा विद्यार्थियों व विश्वविद्यालय की उपलब्धि को देखकर गौरव की अनुभूति हो रही है। मा0 मंत्री जी ने उपाधि व पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई व शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्जवल भविष्य की कामना की। उन्होंने विद्यार्थियों की इस उपलब्धि पर उनके माता-पिता, गुरूजनों को भी बधाई दी। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि आप जीवन में आगे बढ़ेगे, तो चुनौतियां आपके सामने होंगी। उन्होंने विश्वास जताया कि आप चुनौतियों को पार करते हुए आगे बढं़ेगे, जो सफलता की ओर आपको ले जायेगा। उन्होंने कहा कि आप इस विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त कर जीवन के नए पथ पर आगे बढ़ रहे है, तो रज्जू भैया के आदर्श आपके जीवन प्रेरणा का स्थायी स्वरूप बने रहे, यही मेरी कामना है। मा0 मंत्री जी ने कहा कि प्रयागराज ज्ञान, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना, महर्षि भारद्वाज, गंगा-यमुना-सरस्वती की पावन भूमि है। प्रयागराज की धरती ने देश को अनेक साहित्यकार, न्यायविद, वैज्ञानिक, शिक्षाविद और स्वतंत्रता सेनानी दिए है। इस महान परम्परा का हिस्सा होना अपने आप में एक बड़ा उत्तदायित्व है। मा0 मंत्री जी ने कहा कि 2047 में हमारा देश पूर्ण विकसित बनेगा, तो उसमें सबसे बड़ी भूमिका हमारे युवाओं

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