राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय: भारतीय जीवन मूल्यों के सशक्त प्रहरी थे राजर्षि टंडन- प्रोफेसर सत्यकाम
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राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय: भारतीय जीवन मूल्यों के सशक्त प्रहरी थे राजर्षि टंडन- प्रोफेसर सत्यकाम



 राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय: भारतीय जीवन मूल्यों के सशक्त प्रहरी थे राजर्षि टंडन- प्रोफेसर सत्यकाम


राजर्षि टंडन की पुण्यतिथि पर मुक्त विश्वविद्यालय ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि 


प्रयागराज, 01 जुलाई, 2026।

भारत रत्न, महान स्वतंत्रता सेनानी, प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक, हिन्दी भाषा के अप्रतिम पुरोधा तथा भारतीय संस्कृति एवं मूल्यों के संवाहक राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन की पुण्यतिथि पर उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय, प्रयागराज में उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सत्यकाम ने विश्वविद्यालय के गंगा परिसर एवं सरस्वती परिसर में स्थापित भारत रत्न राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन की आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें विनम्र श्रद्धासुमन अर्पित किए। श्रद्धांजलि कार्यक्रम में उपस्थित सभी अधिकारियों, शिक्षकों, कर्मचारियों एवं विश्वविद्यालय परिवार के सदस्यों ने भी पुष्प अर्पित कर महान विभूति के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। कुलपति प्रोफेसर सत्यकाम ने अपने संबोधन में कहा कि राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन केवल एक महान स्वतंत्रता सेनानी ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, राष्ट्रीय अस्मिता, मातृभाषा हिन्दी तथा भारतीय जीवन-मूल्यों के सशक्त प्रहरी थे। उनका संपूर्ण जीवन राष्ट्रसेवा, सादगी, सत्यनिष्ठा, त्याग और जनकल्याण के लिए समर्पित रहा। उन्होंने हिन्दी भाषा को राष्ट्रजीवन में प्रतिष्ठित करने के लिए जो ऐतिहासिक योगदान दिया, वह सदैव स्मरणीय रहेगा।

उन्होंने कहा कि राजर्षि टंडन का जीवन आज की युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का अक्षय स्रोत है। उनके विचार हमें यह संदेश देते हैं कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञानार्जन नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व, नैतिक मूल्यों, सामाजिक समरसता तथा मानवीय संवेदनाओं का विकास भी होना चाहिए। कुलपति ने कहा कि उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय अपने नाम के अनुरूप राजर्षि टंडन के आदर्शों को आत्मसात करते हुए गुणवत्तापूर्ण, समावेशी एवं भारतीय जीवन-दृष्टि पर आधारित शिक्षा के प्रसार के लिए सतत कार्य कर रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 के आलोक में विश्वविद्यालय भारतीय ज्ञान परंपरा, मातृभाषा, सामाजिक उत्तरदायित्व तथा नवाचार आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

उन्होंने विश्वविद्यालय परिवार का आह्वान करते हुए कहा कि राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन के आदर्शों को केवल स्मरण करने तक सीमित न रखें, बल्कि उन्हें अपने आचरण, कार्यसंस्कृति एवं जीवन-मूल्यों में आत्मसात करें। यही उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के अधिकारीगण, विभिन्न विद्याशाखाओं के निदेशक एवं प्रभारी, शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी तथा विश्वविद्यालय परिवार के अन्य सदस्य उपस्थित रहे और सभी ने दो मिनट का मौन रखकर राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन के महान व्यक्तित्व एवं कृतित्व का स्मरण करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।


डॉ प्रभात चन्द्र मिश्र

जनसंपर्क अधिकारी

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