राजर्षि टण्डन मुक्त विश्वविद्यालय: त्रिभाषा सूत्र राष्ट्रीय एकता का सशक्त माध्यम : प्रो. योगेन्द्र प्रताप सिंह
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राजर्षि टण्डन मुक्त विश्वविद्यालय: त्रिभाषा सूत्र राष्ट्रीय एकता का सशक्त माध्यम : प्रो. योगेन्द्र प्रताप सिंह

 


भाषाओं के संरक्षण में जनभागीदारी आवश्यक : प्रोफेसर सत्यकाम


प्रयागराज 19-06-2026

प्रयागराज, 19 जून। केंद्र सरकार के 12 साल बेमिसाल कार्यक्रमों के अंतर्गत उत्तर प्रदेश राजर्षि टण्डन मुक्त विश्वविद्यालय, प्रयागराज में आयोजित व्याख्यानमाला के छठे दिन शुक्रवार को भारत की बहुभाषिकता एवं त्रिभाषा सूत्र विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया। 

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता गोविन्द बल्लभ पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान, प्रयागराज के निदेशक प्रोफेसर योगेन्द्र प्रताप सिंह ने भारत की भाषाई विविधता की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक परंपरा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भाषा किसी व्यक्ति की नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक चेतना की अभिव्यक्ति है। भाषा संवाद का माध्यम होने के साथ-साथ सभ्यता, संस्कृति और सामाजिक स्मृतियों की संवाहक भी है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की अनुशंसाओं के अनुरूप भारतीय भाषाओं के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु भारतीय भाषा समिति का गठन किया गया है। विश्व में लगभग 6800 से 7000 भाषाएँ बोली जाती हैं और भाषा का निर्माण समाज द्वारा होता है। प्रोफेसर सिंह ने कहा कि भारत की बहुभाषिक परम्परा उसकी सांस्कृतिक अखण्डता का प्रतीक है। प्राचीन काल में चारधाम यात्राएँ भाषाई संवाद और सांस्कृतिक एकात्मता का माध्यम थीं। भाषाओं के बीच संवाद उन्हें लोकतांत्रिक बनाता है। रामायण के लगभग 250 भाषायी स्वरूप इसका उत्कृष्ट उदाहरण हैं। 

उन्होंने कोठारी आयोग (1968) द्वारा प्रतिपादित त्रिभाषा सूत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि मातृभाषा, संपर्क भाषा तथा अन्य भारतीय भाषा का अध्ययन राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करता है। उन्होंने कहा कि व्यवहार में लोकतांत्रिकता, भाषा में लोकतांत्रिकता के माध्यम से ही संभव है तथा भाषा के माध्यम से ही अतुल्य भारत की अवधारणा साकार हो सकती है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सत्यकाम ने कहा कि प्रत्येक हिंदीभाषी को कम से कम एक दक्षिण भारतीय भाषा अवश्य सीखनी चाहिए। हिंदी को जन-जन तक पहुँचाने के लिए उसकी भगिनी भाषाओं के प्रति सम्मान तथा उन्हें सीखने की प्रवृत्ति विकसित करनी होगी। उन्होंने कहा कि भाषा केवल सरकार का नहीं, अपितु आमजन का विषय है। भाषा का संरक्षण और संवर्धन जनभागीदारी से ही संभव है।

जनसंपर्क अधिकारी डॉ प्रभात चन्द्र मिश्र ने बताया कि कार्यक्रम के प्रारंभ में नोडल अधिकारी प्रोफेसर संजय सिंह ने अतिथियों का वाचिक स्वागत एवं विषय प्रवर्तन किया। संचालन डॉ. सुनील कुमार ने तथा प्रोफेसर आनंदानंद त्रिपाठी ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के शिक्षकगण, अधिकारी, कर्मचारी, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।

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