राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय: जी एस टी से देश की जटिल कर व्यवस्था सरल और पारदर्शी - प्रोफेसर नागेश्वर राव
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राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय: जी एस टी से देश की जटिल कर व्यवस्था सरल और पारदर्शी - प्रोफेसर नागेश्वर राव

 


राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय: जी एस टी से देश की जटिल कर व्यवस्था सरल और पारदर्शी - प्रोफेसर नागेश्वर राव 


जीएसटी से पूरे देश में एकीकृत कर प्रणाली स्थापित -प्रोफेसर आलोक राय 


मुविवि में जीएसटी 2.0 सुधारों को जन जन तक पहुंचाने के लिए राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन 


प्रयागराज 8/5/2026: उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय, प्रयागराज एवं भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में भारत सरकार द्वारा जीएसटी 2.0 सुधारों को जन जन तक पहुंचाने के लिए शुक्रवार को विश्वविद्यालय के अटल प्रेक्षागृह में एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया। 

राष्ट्रीय संगोष्ठी के मुख्य अतिथि देश के जाने-माने प्रबंध शास्त्री एवं इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के पूर्व कुलपति प्रोफेसर नागेश्वर राव ने कहा कि जीएसटी ने भारत की कर प्रणाली को एक नई दिशा प्रदान की है और वन नेशन, वन टैक्स की अवधारणा को साकार किया है। उन्होंने बताया कि जीएसटी 1.0 और जीएसटी 2.0 के माध्यम से देश की जटिल कर व्यवस्था को सरल और पारदर्शी बनाया गया है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटलीकरण के समावेश से राजस्व प्रबंधन अधिक प्रभावी एवं सुगम हुआ है, जिससे इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय, नई दिल्ली जैसे बड़े शैक्षणिक संस्थानों को भी वित्तीय संचालन में अत्यधिक सुविधा प्राप्त हो रही है। उन्होंने कहा कि जीएसटी व्यवस्था में 5%, 12%, 18% और 28% की कर दरें मेरिट आधारित हैं, जिसमें शिक्षा एवं स्वास्थ्य बीमा जैसी आवश्यक सेवाओं को कर राहत अथवा शून्य कर का लाभ दिया गया है। इससे उपभोक्ताओं, उत्पादकों तथा सरकार सभी को लाभ प्राप्त हो रहा है और महंगाई नियंत्रण के साथ सरकारी आय में भी वृद्धि हो रही है। प्रो. राव ने विकसित भारत @2047 की परिकल्पना पर चर्चा करते हुए कहा कि भारत वर्ष 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस लक्ष्य के चार प्रमुख स्तंभ गरीब, महिलाएं, युवा और किसान हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारत विश्व की दूसरी या तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की क्षमता रखता है तथा प्रति व्यक्ति आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि विकसित भारत की यह संकल्पना केवल सरकार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें जनभागीदारी को विशेष महत्व दिया गया है। अपने संबोधन में उन्होंने अधिकारों से कर्तव्यों की ओर बढ़ने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने भारतीय संस्कृति के वसुधैव कुटुम्बकम् सिद्धांत को रेखांकित करते हुए कहा कि शैक्षणिक संस्थानों और विद्यार्थियों के बीच संबंध केवल औपचारिक न होकर परिवार जैसा स्नेहपूर्ण होना चाहिए।प्रोफेसर राव ने स्वदेशी, आत्मनिर्भरता और आत्मसम्मान को राष्ट्रीय सुरक्षा एवं आर्थिक स्थिरता के लिए अनिवार्य बताया। उन्होंने स्वयं प्लस पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि यह कार्यक्रम युवाओं के ज्ञान और कौशल को एकीकृत कर विकसित भारत की यात्रा में महत्वपूर्ण योगदान देगा।


मुख्य वक्ता राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कोलकाता के निदेशक प्रोफेसर आलोक कुमार राय ने कहा कि भारत की कर प्रणाली ने समय के साथ एक लंबी और महत्वपूर्ण यात्रा तय की है। पहले देश में सेल्स टैक्स लागू था, जिसे बाद में कमर्शियल टैक्स और फिर वैट प्रणाली में परिवर्तित किया गया। अंततः पूरे देश में एक समान और सरल कर व्यवस्था स्थापित करने के उद्देश्य से वस्तु एवं सेवा कर लागू किया गया। उन्होंने कहा कि जी एस टी लागू होने से पहले देश में विभिन्न प्रकार के कर और राज्यों के बीच चेक-पोस्ट व्यवस्था थी, जिसके कारण व्यापार और परिवहन में काफी समय और लागत लगती थी। जी एस टी ने इन बाधाओं को समाप्त कर पूरे देश में एकीकृत कर प्रणाली स्थापित की, जिससे व्यापार और उपभोक्ताओं दोनों को सुविधा मिली। प्रोफेसर राय ने कहा कि प्रारंभ में यह आशंका थी कि जी एस टी लागू होने से राज्यों के राजस्व में कमी आ सकती है, लेकिन इसके विपरीत जी एस टी संग्रह में लगातार वृद्धि दर्ज की गई। प्रोफेसर राय ने बताया कि मार्च 2024 में जीएसटी संग्रह लगभग ₹2.01 लाख करोड़ और अप्रैल 2024 में लगभग ₹2.10 लाख करोड़ तक पहुंच गया। यह प्रतिवर्ष लगभग 8% से 9% की स्थिर वृद्धि को दर्शाता है। उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास द्वारा वर्णित रामराज्य की अवधारणा का उल्लेख करते हुए कहा कि कर संग्रह ऐसा होना चाहिए जैसे सूर्य धीरे-धीरे जल को वाष्पित करता है और बाद में वर्षा के रूप में जनता के कल्याण हेतु वापस देता है। अर्थात कर संग्रह जनता पर बोझ न बनकर जनहित में उपयोग होना चाहिए। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र जी एस टी संग्रह में आज भी अग्रणी राज्य है और कुल संग्रह में लगभग 10-12% का योगदान देता है। वहीं उत्तर प्रदेश ने उल्लेखनीय प्रगति की है और अब देश के शीर्ष राज्यों में तीसरे या चौथे स्थान पर पहुंच चुका है। उत्तर प्रदेश का लक्ष्य $1 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था बनना है, जिससे भारत को $5 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था बनाने के राष्ट्रीय लक्ष्य में महत्वपूर्ण योगदान मिल सके। इसके लिए राज्य अपने जीडीपी में जीएसटी योगदान को 20% तक पहुंचाने का लक्ष्य रखता है।


अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रोफेसर सत्यकाम ने कहा कि जीएसटी केवल एक कर प्रणाली नहीं, बल्कि संविधान में निहित कल्याणकारी राज्य की अवधारणा को साकार करने का प्रभावी माध्यम है। डिजिटलीकरण और ऑनलाइन भुगतान व्यवस्था के कारण कर संग्रह प्रणाली में पारदर्शिता आई है तथा राजस्व रिसाव में उल्लेखनीय कमी हुई है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि कर दरों में कमी के बावजूद कर संग्रह में निरंतर वृद्धि देश की आर्थिक सुदृढ़ता को दर्शाती है। प्रोफेसर सत्यकाम ने कहा कि जीएसटी को सामान्यतः वाणिज्य एवं प्रबंधन विषय तक सीमित समझा जाता है, जबकि इसका सामाजिक, सांस्कृतिक, शैक्षिक एवं आर्थिक जीवन पर व्यापक प्रभाव है। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा डिजिटल शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की चर्चा करते हुए बताया कि स्वयं प्रभा प्लेटफॉर्म हेतु विश्वविद्यालय अब तक 410 शैक्षिक वीडियो तैयार कर चुका है। साथ ही, स्वयं प्लेटफॉर्म पर जीएसटी आधारित विशेष पाठ्यक्रम विकसित करने तथा रोजगारोन्मुख कार्यक्रम प्रारंभ करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति की सराहना करते हुए कहा कि वर्ष 2014 के बाद भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने की दिशा में अभूतपूर्व प्रयास हुए हैं, जिससे भारतीय ज्ञान परंपरा और स्थानीय भाषाओं को नई पहचान मिली है। 


विशिष्ट अतिथि उपायुक्त, जीएसटी, लखनऊ दिव्येंदु शेखर गौतम ने कहा कि जीएसटी व्यवस्था एक जटिल, कागज़ी एवं मैनुअल प्रणाली से विकसित होकर अब तकनीक-आधारित, पारदर्शी और सरल कर व्यवस्था बन चुकी है।उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य है जिसने वर्ष 2021 से जीएसटी प्रशासन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग प्रारम्भ किया। वर्तमान में राष्ट्रीय स्तर पर अल्फा एवं बीटा चैटबॉट्स का परीक्षण किया जा रहा है, जो करदाताओं को सहायता प्रदान करेंगे। पहले जहां डेटा प्रोसेसिंग में लगभग 10 दिन का समय लगता था, वहीं अब इनवॉइस रेफरेंस नंबर के माध्यम से मात्र 30 सेकंड में रियल-टाइम डेटा उपलब्ध हो रहा है। एआई आधारित प्रणाली व्यापारियों को हाई, मिडिल एवं लो रिस्क श्रेणियों में वर्गीकृत कर टैक्स चोरी एवं फर्जी कार्ट ऑपरेशनों की पहचान करने में सहायक सिद्ध हो रही है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2027-28 तक जीएसटी प्रणाली को वॉयस-इंटरैक्टिव सहायता प्रणाली सिरी एवं अलेक्सा की तरह से जोड़ने का लक्ष्य है, जिससे करदाता बिना त्रुटि के कार्य कर सकेंगे। राजस्व एवं आर्थिक प्रभावों पर चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि वर्ष 2024-25 में ₹20.6 लाख करोड़ का राजस्व संग्रह हुआ, जो 2025-26 में बढ़कर ₹22.57 लाख करोड़ हो गया। अप्रैल 2026 में रिकॉर्ड ₹2.43 लाख करोड़ का संग्रह दर्ज किया गया। उन्होंने बताया कि उच्च उपभोग एवं बेहतर अनुपालन के कारण उत्तर प्रदेश राजस्व संग्रह में देश में सातवें स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। उन्होंने जीएसटी के सामाजिक प्रभावों पर भी प्रकाश डाला। घरेलू उपयोग की वस्तुओं जैसे टीवी एवं फ्रिज पर कर दर 28% से घटाकर 18% कर दी गई है, जबकि अधिकांश आवश्यक खाद्य वस्तुओं पर 0% या 5% कर लागू है। गंभीर बीमारियों, विशेषकर कैंसर जांच जैसी स्वास्थ्य सेवाओं को शून्य कर श्रेणी में रखा गया है। उन्होंने कहा कि जीएसटी प्रणाली ने कोषागार आधारित मॉडल से बैंकिंग आधारित मॉडल की ओर परिवर्तन किया है, जिसमें भारतीय रिजर्व बैंक एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक भागीदार बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि जीएसटी 2.0 तीन प्रमुख स्तंभों सरलता, पारदर्शिता एवं विश्वास पर आधारित है। इसका उद्देश्य ऐसी व्यवस्था विकसित करना है जिसे सामान्य कंप्यूटर ज्ञान रखने वाला व्यक्ति भी आसानी से समझ सके।

प्रारंभ में राष्ट्रीय संगोष्ठी की रूपरेखा संगोष्ठी के संयोजक प्रोफेसर देवेश रंजन त्रिपाठी ने प्रस्तुत की। इस अवसर पर डॉ साधना सिंह की पुस्तक का विमोचन अतिथियों ने किया। राष्ट्रीय सेमिनार के छह तकनीकी सत्रों में देशभर के 10 राज्यों से 520 प्रतिभागियों ने शोध पत्र प्रस्तुत किए। इन 6 तकनीकी सत्रों में प्रतिष्ठित विषय विशेषज्ञ प्रोफेसर लवकुश मिश्रा, प्रोफेसर शैलेंद्र कुमार, सीए सुमित अग्रवाल, डॉ नीरज शुक्ला, डॉ एस टी जोसेफ डॉ रेजिना जॉन, प्रोफेसर मानस पांडेय, डॉ ए सी पांडेय, डॉ अंजनी कुमार, प्रोफेसर विनोद कुमार पांडेय, डॉ ऋचा सिन्हा, डॉ हिमांशु कुमार पांडेय, प्रोफेसर माधवेंद्र मिश्रा, डॉ प्रदीप कुमार सिंह, राहुल चटर्जी, डॉ अवधेश कुमार गुप्ता, डॉ श्रुतिका मिश्रा, डॉ अभय पांडेय, डॉ सुधीर शर्मा तथा डॉ बी बी अग्रवाल ने अपने बहुमूल्य विचार व्यक्त किए।


डॉ प्रभात चन्द्र मिश्र 

जनसंपर्क अधिकारी

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