खाद्य प्रसंस्करण नीति-2023 से निवेश व रोजगार में तेजी, प्रदेश बन रहा प्रोसेसिंग हब।
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खाद्य प्रसंस्करण नीति-2023 से निवेश व रोजगार में तेजी, प्रदेश बन रहा प्रोसेसिंग हब।



लखनऊ: 06 अप्रैल 2026

उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य 

के नेतृत्व व निर्देशन मे प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के विकास, रोजगार सृजन एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने की दिशा मे सार्थक कदम उठाये गये हैं। प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन (पीएमएफएमई) योजना के अंतर्गत उत्तर प्रदेश ने उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए ऋण स्वीकृति एवं वितरण में देश में अग्रणी स्थान पर है। यह उपलब्धि प्रदेश सरकार की प्रतिबद्धता, पारदर्शी कार्यप्रणाली एवं लाभार्थी केंद्रित दृष्टिकोण का परिणाम है।उप मुख्यमन्त्री के निर्देशो के क्रम मे योजना के प्रभावी क्रियान्वयन को और गति देने, लाभार्थियों तक अधिकतम पहुंच सुनिश्चित करने तथा सूक्ष्म उद्यमियों को तकनीकी एवं वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को बढ़ावा देने और स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने के उपायों पर विचार किया जा रहा है

इससे दूरस्थ एवं ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे उद्यमियों को सीधे लाभ मिलेगा तथा स्थानीय स्तर पर मूल्य संवर्धन को बढ़ावा मिलेगा, जिससे किसानों की आय में भी वृद्धि होगी। खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में निवेश, नवाचार एवं उद्यमिता को प्रोत्साहित कर प्रदेश को एक प्रमुख प्रोसेसिंग हब के रूप में विकसित किया जा रहा है।

अपर मुख्य सचिव उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण बी एल मीणा ने बताया कि बहुआयामी एवं निवेशकोन्मुख उत्तर प्रदेश खाद्य प्रसंस्करण नीति- 2023 अंतर्गत प्रदेश एवं प्रदेश के बाहर के साथ-साथ विदेश में पढ़े नवयुवकों द्वारा निवेशक प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण इकाईयों की स्थापना में तत्पर है।खाद्य प्रसंस्करण के विभिन्न क्षेत्रों में प्रदेश अग्रसर हो रहा है एवं आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है।योजनानातार्गत प्रदेश में 114 खाद्य प्रसंस्करण इकाईया पूर्ण रूपेण क्रियाशील हो गयी है।प्रत्येक माह लगभग 10 इकाईयों के क्रियाशील होने की सम्भावना है।114 इकाइयो को कुल अनुदान रु० 183.37 करोड़ हस्तांतरित

किया गया। सभी इकाइयो की सथापना से लगभग रु० 400 करोड़ का निवेश हुआ है यानी, प्रति इकाई औसत लागत रु० 3.5 करोड़ है। वर्ष 2023-24 में 36 इकाईयों को धनराशि रू0 45.19 करोड़, वर्ष 2024-25 में 96 इकाईयों को धनराशि रू. 76.23 करोड़ एवं वित्तीय वर्ष 2025-26 में 262 इकाईयों को धनराशि रू. 196.99 करोड़ की धनराशि वितरित की गयी।

उत्तर प्रदेश मे वित्तीय वर्ष 2025-26 के अन्त तक में उत्तर प्रदेश खाद्य प्रसंस्करण नीति- 2023 अंतर्गत कुल 114 खाद्य प्रसंस्करण इकाईया पूर्ण रूप से क्रियाशील हो गयीं तथा उनके द्वारा उत्पादन किया जा रहा है, इससे जहाँ प्रदेश में आर्थिक निवेश की सम्भावना को बल मिला है वहीँ नवयुवकों/नवयुवतियों को रोजगार सृजन में वृद्धि हो रही है। खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति 2023 के तहत 500 से अधिक इकाइयो को लेटर आफ कम्फर्ट जारी किये गये और लगभग 300 इकाइयां प्रारम्भ हुयी है।

बताया गया कि 114 कुल इकाईयों में 29 खाद्य प्रसंस्करण की क्रियाशील इकाईयों मे सोलर प्लांट की स्थापना की गयी,जिसके कारण विद्युत भार में कमी आने से इकाई लाभान्वित हुयी।

इसमे टेक होम राशन की 26 सीरियल्स ग्रेन प्रसंकरण की 15, नमकीन, चिप्स, स्नैक्स प्रसंस्करण / उत्पादन की 11. फ्रोजेन फ्रूट्स एवं वेजिटेबल प्रसंस्करण की 10, पशु/मुर्गी/मछली चारे के उत्पादन की 9, बेकरी एवं बिस्कुट उत्पादन की 4, आयल उत्पादन की 4, राइस ब्रान ऑयल की 4, जूस / बेवरेजेज की 4, मसाले उत्पादन की 4, गुड से अन्य सामग्री उत्पादन की 3, पास्ता मैकरोनी और नूडल्स उत्पादन की 3, काजू प्रसंस्करण की 2, डेयरी प्रोसेसिंग की 2, ग्लूकोज, माल्टोडेक्सट्ररन और स्टार्च उत्पादन की 2, मशरूम कैनिंग की 2, आलू पावडर/ फ्लेक्स उत्पादन की 2, सोया बड़ी उत्पादन की 2 तथा अवाला प्रसंस्करण, डीहाईटेड वेजिटेबल, सौस एवं कैचअप, सौंफ ग्रेडिंग एवं ट्रांसपोर्ट सब्सिडी,सोन पापड़ी, व बेकरी विस्तार की 1-1 इकाईयां क्रियाशील हैं।

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