जी एस टी आर्थिक दक्षता प्राप्त करने का महत्वपूर्ण साधन- प्रोफेसर सत्यकाम
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जी एस टी आर्थिक दक्षता प्राप्त करने का महत्वपूर्ण साधन- प्रोफेसर सत्यकाम

 


जी एस टी आर्थिक दक्षता प्राप्त करने का महत्वपूर्ण साधन- प्रोफेसर सत्यकाम 

मुक्त विश्वविद्यालय में जीएसटी सुधारों पर राष्ट्रीय संगोष्ठी के लिए शोध पत्र आमंत्रित

प्रोफेसर देवेश रंजन त्रिपाठी बने संयोजक, वेबसाइट पर पंजीकरण प्रारम्भ


प्रयागराज 6 /4/ 2026: उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज एवं भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में भारत सरकार द्वारा जीएसटी 2.0 सुधारों को जन जन तक पहुंचाने के लिए आगामी 8 मई 2026 को एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किया जा रहा है। जिसका उद्देश्य जीएसटी सुधारों के सामाजिक आर्थिक प्रभावों, नीति निर्माण और शैक्षणिक विमर्श को बढ़ावा देना है। यह पहल देश के जीएसटी सुधारों को  समझने, क्रियान्वित करने और उनके प्रभावों का विश्लेषण कर आवश्यक सुझावों को एकत्रित कर नीति निर्माताओं के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए है। 

दूरस्थ शिक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण स्थान रखने वाले विश्वविद्यालय के विद्वान कुलपति प्रोफेसर सत्यकाम ने बताया कि भारत का एकीकृत कर प्रणाली की ओर बढ़ना स्वतंत्रता के बाद से हुए सबसे महत्वपूर्ण वित्तीय परिवर्तनों में से एक है। भारत "विकसित भारत@2047" की आकांक्षा रखता है, ऐसे में जीएसटी समावेशी विकास, राजकोषीय सुदृढ़ीकरण और आर्थिक दक्षता प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण साधन है।इस सुधार ने औपचारिक अर्थव्यवस्था के विस्तार, डिजिटलीकरण के माध्यम से कर अनुपालन में सुधार और अंतर-राज्यीय व्यापार को बढ़ावा देने में योगदान दिया है। हालांकि, कुछ चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं जैसे कि कर दर युक्तिकरण, लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए अनुपालन की जटिलता और राज्य राजस्व प्रदर्शन में असमानताएं, जिनका समाधान भारत के विकास के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए आवश्यक है।

प्रोफेसर सत्यकाम ने बताया कि यह संगोष्ठी चार्टर्ड लेखाकारों, शिक्षाविदों, नीति निर्माताओं, निवेशकों और उद्योग विशेषज्ञों को भारत के दीर्घकालिक विकासात्मक रोडमैप के संदर्भ में जीएसटी सुधारों के बहुआयामी प्रभाव पर चर्चा करने के लिए एक मंच प्रदान करेगी।

प्रोफेसर सत्यकाम ने बताया कि संगोष्ठी में डिजिटल परिवर्तन, राजकोषीय संघवाद और पारदर्शिता को बढ़ावा देने में कर पेशेवरों की भूमिका पर गहन चर्चा की जाएगी। उभरते मुद्दों को संबोधित करके और व्यावहारिक नीतिगत सिफारिशें प्रस्तावित करके, यह आयोजन ज्ञान के निर्माण, हितधारकों के बीच संवाद को बढ़ावा देने और भारत के भविष्य को एक समावेशी, वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी और आत्मनिर्भर राष्ट्र के रूप में आकार देने में प्रमुख योगदान देगा। 

विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी डॉ प्रभात चन्द्र मिश्र ने बताया कि विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय दृष्टिकोण का समर्थन करने वाली व्यावहारिक नीतिगत सिफारिशें विकसित करना इस राष्ट्रीय संगोष्ठी का महत्वपूर्ण उद्देश्य है। इसी के दृष्टिगत शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार के अंतर्गत कार्यरत स्वायत्त संस्था भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के सहयोग से इस सेमिनार के सुव्यवस्थित आयोजन के लिए विश्वविद्यालय के प्रबंधन विद्या शाखा के आचार्य, प्रोफेसर देवेश रंजन त्रिपाठी को संयोजक नामित किया गया है। प्रोफेसर त्रिपाठी ने  उच्च शिक्षा से जुड़े सभी प्राध्यापकों, शोधार्थियों तथा छात्रों को आईसीएसएसआर के सहयोग से हो रहे इस राष्ट्रीय सेमिनार में प्रतिभाग करने हेतु आमंत्रित किया है। सेमिनार का संपूर्ण विवरण एवं पंजीकरण प्रारूप मुक्त विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर उपलब्ध कराया जा चुका है। विभिन्न विश्वविद्यालयों तथा महा विद्यालयों को आयोजन संबंधी आवश्यक सूचनाएं प्रेषित की जा रही हैं।


डॉ प्रभात चन्द्र मिश्र 

जनसंपर्क अधिकारी

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