प्रयागराज में अर्बन फ्लड नियंत्रण एवं स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज योजना पर मंडल स्तरीय समन्वय बैठक संपन्न
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प्रयागराज में अर्बन फ्लड नियंत्रण एवं स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज योजना पर मंडल स्तरीय समन्वय बैठक संपन्न

 


प्रयागराज में अर्बन फ्लड नियंत्रण एवं स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज योजना पर मंडल स्तरीय समन्वय बैठक संपन्न


*जलभराव की समस्या के समाधान हेतु पंपिंग स्टेशन स्थापित करने की योजना को अनुमोदन*


मंडलायुक्त श्रीमती सौम्या अग्रवाल की अध्यक्षता तथा जिलाधिकारी श्री मनीष कुमार वर्मा, उपाध्यक्ष, प्रयागराज विकास प्राधिकरण श्री ऋषिराज, नगर आयुक्त श्री साई तेजा तथा अन्य संबंधित विभागीय अधिकारियों की उपस्थिति में आयुक्त कार्यालय स्थित गांधी सभागार में अर्बन फ्लड, जल प्लावन नियंत्रण एवं स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज योजना के संबंध में मंडल स्तरीय प्रशासनिक समन्वय समिति की बैठक संपन्न हुई। बैठक में वर्षा ऋतु के दौरान शहर के निचले क्षेत्रों में उत्पन्न होने वाली जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान पर विस्तार से चर्चा की गई। नगर निगम के सहयोग से चिन्हांकित ऐसे क्षेत्रों, जहां बरसात के समय जलजमाव की समस्या अधिक देखने को मिलती है, वहां वर्षा जल की निकासी सुनिश्चित करने के लिए नालों पर डैम, गेट और पंपिंग स्टेशन स्थापित कर अतिरिक्त वर्षा जल की निकासी हेतु बनाई गई योजना को प्रशासनिक समिति द्वारा अनुमोदन प्रदान किया गया। इस योजना का उद्देश्य शहर के निचले और संवेदनशील इलाकों में जलभराव की स्थिति को नियंत्रित करना तथा नागरिकों को होने वाली असुविधा को कम करना है।


यह प्राक्कलन सी एंड डी एस, उत्तर प्रदेश जल निगम (नगरीय), प्रयागराज द्वारा नगर निगम के समन्वय से तैयार किया गया है, जिसमें परियोजना के निर्माण के साथ-साथ पांच वर्षों के संचालन एवं अनुरक्षण व्यय को भी शामिल किया गया है, ताकि प्रणाली का सुचारु संचालन लंबे समय तक सुनिश्चित किया जा सके। बैठक में अधिकारियों ने अवगत कराया कि तीव्र शहरीकरण, बढ़ती जनसंख्या तथा कई स्थानों पर प्राकृतिक जल निकासी मार्गों के अवरुद्ध होने के कारण वर्षा के समय जल निकासी की समस्या गंभीर हो जाती है। पूर्व में खुले रहने वाले निचले क्षेत्रों में निर्माण कार्य होने से भी जलभराव की समस्या बढ़ी है।


मंडलायुक्त श्रीमती सौम्या अग्रवाल ने निर्देशित किया कि योजना के क्रियान्वयन से पूर्व प्रस्तावित स्थलों का संयुक्त निरीक्षण संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा किया जाए तथा स्थानीय वार्ड के नागरिकों को प्रस्तावित डिजाइन की जानकारी देते हुए उनका फीडबैक भी लिया जाए, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की व्यावहारिक समस्या उत्पन्न न हो। उन्होंने यह भी कहा कि परियोजना के क्रियान्वयन में सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित किया जाए।


समिति द्वारा यह भी निर्णय लिया गया कि सभी कार्य नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की गाइडलाइन के अनुरूप किए जाएंगे। पंपिंग सिस्टम से निकलने वाले कुल जल प्रवाह की निगरानी और सटीक माप के लिए फ्लो-मीटर लगाए जाएंगे। साथ ही पंप कंट्रोल पैनल में रिमोट मॉनिटरिंग एवं कम्युनिकेशन की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे केंद्रीय मॉनिटरिंग कक्ष को वास्तविक समय में आवश्यक सूचनाएं प्राप्त होती रहेंगी और प्रणाली की प्रभावी निगरानी संभव हो सकेगी।

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