आज दिनांक 07.02.2026 को निदेशक महोदय रहमानखेड़ा की अध्यक्षता में 5 दिवसीय विराट किसान मेला, माघ मेला क्षेत्र के सेक्टर-3 में स्थित गंगा पंडाल, प्रयागराज में आयोजन किया गया। जिसमें कृषि विभाग के अन्तर्गत खाद, बीज, कृषि रक्षा रसायन, सोलर पम्प, ड्रोन एवं विभिन्न प्रकार के कृषि यंत्रों का प्रदर्शन किया गया, डेयरी विभाग, उद्यान विभाग एवं विभिन्न कृषक उत्पादक संगठनों द्वारा 40 से अधिक मेले में स्टाल लगाये गये जिसका मुख्य अतिथियो द्वारा अवलोकन किया गया।
कार्यक्रम के तृतीय दिवस के मुख्य अतिथि श्री राजेन्द्र कुमार सिंह, निदेशक, रहमानखेड़ा उ0प्र0 लखनऊ द्वारा दीप प्रज्जवलन कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया गया। संयुक्त कृषि निदेशक, प्रयागराज मण्डल, प्रयागराज एवं उप कृषि निदेशक, प्रयागराज द्वारा पुष्प गुच्छ देकर निदेशक महोदय का स्वागत किया गया। कार्यक्रम में उप कृषि निदेशक (कृषि रक्षा) प्रयागराज मण्डल-प्रयागराज, प्रसार निदेशक, शुआट्स, उप कृषि निदेशक, जिला कृषि अधिकारी, जिला कृषि रक्षा अधिकारी, सहायक निदेशक (मृदा परीक्षण/ कल्चर) क्षेत्रीय भूमि परीक्षण प्रयोगशाला, भूमि संरक्षण अधिकारी प्रयागराज, एवं कृषि वैज्ञानिक, कृषि विश्वविद्यालय शुआट्स नैनी, कुलभाष्कर आश्रम महाविद्यालय एवं वैज्ञानिक-कृषि विज्ञान केन्द्र, कौशाम्बी समेत कृषि विभाग के अन्य अधिकारी/कर्मचारी, तथा जनपद के लगभग 7,50 कृषकों द्वारा प्रतिभाग किया गया। कार्यक्रम का संचालन श्रीमती प्रीती त्रिपाठी द्वारा किया गया।
निदेशक महोदय ने फसल प्रबन्धन पर चर्चा करते हुए बताया कि फसलों की अच्छी वृद्धि, विकास एवं अच्छे उत्पादन के लिए एकीकृत फसल प्रबन्धन अति आवश्यक है। जिसके माध्यम से एक उद्यम का बचा हुआ अवशेष अगले उद्यम के लिए संसाधन बन जाता है। खेती में पशुपालन, बकरी पालन, भेड़ पालन आदि को शामिल करने से एक तरफ किसान की आय में वृद्धि होती है वहीं दूसरी तरफ उनका अपशिष्ट खाद के रूप में उपयोग में लाया जाता है। जो रासायनिक उर्वरकों की निर्भरता को कम करता है एवं खाद्यान्न की गुणवत्ता को सुधारता है। कृषकों को गन्ने की खेती के साथ उर्द-मूंग की समेकित खेती से गन्ने एवं सहयोगी फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। सिंचाई में सिंचाई की लागत को कम करने एवं समुचित जल प्रबन्धन के लिए स्प्रिंगकलर सिंचाई का उपयोग करने से फसलोत्पादन में वृद्धि होती है। विभाग द्वारा ऑनलाईन पोर्टल के माध्यम से टोकन विधि से कृषकों को अनुदानित कृषि यंत्रों का वितरण किया जाता है। जिसकी जानकारी समाचार पत्रों के माध्यम से दी जाती है। फसल चक्र परिवर्तन एवं हरी खाद का उपयोग करने से मृदा में पोषक तत्व की कमी को पूरा किया जा सकता है। समय से फसलों की बुवाई, सिंचाई एवं पोषक तत्वों की कमी की पूर्ति करने के लिए उर्वरकों का प्रयोग एवं समुचित मशीनरी के उपयोग से उत्पादकता में वृद्धि प्राप्त की जा सकती है।
डा0 निमिषा नटराजन, कृषि वैज्ञानिक शुआट्स, नैनी, प्रयागराज ने मोटे अनाज और पोषण के बारे में चर्चा करते हुए कृषकों को अवगत कराया कि मोटे अनाजों के प्रयोग से शरीर में होने वाली पोषक तत्वों की कमी को पूर्ण किया जा सकता है। मोटे अनाज प्रोटीन, कार्बोहाईड्रेड, वसा, पोषक तत्व, विटामिन से भरपूर होते हैं। इनके सेवन से शरीर में रोगों से लड़ने की क्षमता में वृद्धि होती है तथा शरीर स्वस्थ रहता है।
डा0 आशीष श्रीवास्तव, कृषि वैज्ञानिक कृषि विज्ञान केन्द्र कौशाम्बी ने कृषकों को सम्बोधित करते हुए बताया कि प्शुपालन को कृषि में अपनाने से कृषकों की आय में वृद्धि होती है, अपशिष्टों को फसलों में कार्बनिक रासायन के तौर पर मिट्टी में उपयोग करने से जीवांशों की संख्या में वृद्धि होती है जिससे मृदा उर्वरता में वृद्धि होती है। देशी नश्ल के गौवंश के दूध की गुणवत्ता विदेशी नश्ल की गायों की अपेक्षा अधिक होती है।
उप कृषि निदेशक, प्रयागराज द्वारा जनपद में संचालित कृषक उत्पादक संगठनों के बारे में जानकारी कृषकों के मध्य साझा करते हुए बताया गया कि बीज उत्पादन एवं अन्य उत्पादों को कृषक उत्पादक संगठनों के माध्यम से बेचकर कृषक बन्धु अपने उत्पादन का सही मूल्य प्राप्त कर सकते है। मेले का उद्देश्य कृषि विभाग एवं अन्य सहयोगी विभागों में संचालित होने वाली समस्त योजनाओं एवं तकनीकी जानकारी को कृषकों के मध्य साझा करना है। अन्त में सभी कृषक बन्धुओं से निवेदन किया कि सभी कृषक भाई फार्मर रजिस्ट्री अवश्य करायें जिससे उन्हें कृषि से जुड़ी योजनाओं का लाभ मिलता रहे।
डा0 शिशिर कुमार, कृषि वैज्ञानिक शुआट्स, नैनी, प्रयागराज द्वारा चर्चा करते हुए कहा कि फसल पद्धति समय पर बुवाई, सिंचाई, पोषक तत्व प्रबन्धन से कृषक अच्छा उत्पादन कर सकते हैं।
डा0 सुभाष कुमार यादव, कृषि वैज्ञानिक कृषि विज्ञान केन्द्र-नैनी, प्रयागराज द्वारा चर्चा करते हुए कहा गया कि प्शुओं को खुरपका, मुंहपका आदि रोगांे से बचाव के लिए टीकाकरण अवश्य कराना चाहिए जिससे उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है। कृषि विज्ञान केन्द्र-नैनी में संचालित प्शुपालन की विधियों के बारे में प्रशिक्षण दिया जाता है एवं प्रशिक्षणोपरान्त प्रमाण पत्र का वितरण किया जाता है जिससे उन्हें प्शु लोन लेने में बैंको से सुविधा प्राप्त होती है।
ब्रह्माकुमारी से आयी हुई प्रतिनिधि द्वारा यौगिक खेती की अनूठी पद्धति के बारे में चर्चा की जो जैविक खेती को ध्यान के साथ जोड़ती है। फसलों को प्राकृतिक खाद देने के साथ-साथ मानसिक ऊर्जा दी जाती है जिससे बीजों की जमाव शक्ति एवं फसल की गुणवत्ता में सुधार होता है। साथ ही यह रासायन मुक्त और सात्विक उत्पादन को बढ़ावा देती है।
संयुक्त कृषि निदेशक, प्रयागराज मण्डल, प्रयागराज द्वारा किसान मेले में कृषि विभाग में संचालित योजनाओं के बारे में पोषक तत्व प्रबन्धन, फसल स्वास्थ्य प्रबन्धन के बारे में चर्चा की गयी।
संयुक्त कृषि निदेशक, प्रयागराज मण्डल, प्रयागराज द्वारा मा0 मंत्री जी की अनुमति से कृषकों, अधिकारियों, मीडिया सेल को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कार्यक्रम समाप्ति की घोषणा की गयी।
उप कृषि निदेशक
प्रयागराज।
