प्रदीप बच्चन (ब्यूरो चीफ)
बलिया (यूपी) रमजान इस्लामी कैलेंडर का पवित्र महीना है, लेकिन इसका संदेश केवल एक धर्म तक सीमित नहीं है। यह महीना पूरी इंसानियत को आत्मसंयम, करुणा, सेवा, समानता और आपसी भाईचारे का पाठ पढ़ाता है। आज के समय में, जब समाज को एकता और सद्भाव की सबसे अधिक आवश्यकता है, रमजान इन मूल्यों को मजबूत करने का अवसर प्रदान करता है। यह कहना है नगरा,बलिया के लेखक/ पत्रकार डॉ० सैयद सेराज अहमद का। उन्होंने आगे बताया कि रमजान का सबसे बड़ा संदेश है—सब्र (धैर्य) और आत्मनियंत्रण। सूर्योदय से सूर्यास्त तक रोज़ा रखना केवल भोजन और पानी से दूर रहना नहीं, बल्कि बुरे विचारों, गलत आदतों और नकारात्मक व्यवहार से भी बचना है। यह अभ्यास व्यक्ति के चरित्र को मजबूत बनाता है और उसे अनुशासित जीवन जीने की प्रेरणा देता है।
2. समानता और भाईचारा
रोज़ा हमें यह एहसास कराता है कि भूख और प्यास क्या होती है। इससे अमीर-गरीब के बीच की दूरी कम होती है और समाज में सहानुभूति बढ़ती है। जब हर व्यक्ति एक साथ इफ्तार करता है, तो सामाजिक एकता और भाईचारे की भावना मजबूत होती है। यह संदेश पूरी इंसानियत के लिए है कि सभी इंसान बराबर हैं।
3. दान और सामाजिक जिम्मेदारी
रमजान में ज़कात और सदक़ा देने पर विशेष जोर दिया जाता है। जरूरतमंदों की मदद करना इस महीने का अहम हिस्सा है। इससे समाज में आर्थिक संतुलन और सामाजिक न्याय को बढ़ावा मिलता है। यह भावना केवल मुसलमानों तक सीमित नहीं, बल्कि हर इंसान को जरूरतमंदों की सहायता के लिए प्रेरित करती है।
4. स्वास्थ्य लाभ
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी रोज़ा रखने के कई फायदे बताए गए हैं। नियंत्रित उपवास (Intermittent Fasting) से शरीर को डिटॉक्स करने, पाचन तंत्र को आराम देने और मेटाबॉलिज्म को संतुलित करने में मदद मिलती है। इससे मानसिक एकाग्रता और आत्मिक शांति भी बढ़ती है। इस तरह रमजान आध्यात्मिक के साथ-साथ शारीरिक रूप से भी लाभकारी है।
5. आध्यात्मिक उन्नति
रमजान में नमाज़, कुरआन की तिलावत और इबादत पर विशेष ध्यान दिया जाता है। Qur'an का अवतरण भी इसी महीने में हुआ माना जाता है, इसलिए यह महीना आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह व्यक्ति को आत्ममंथन और ईश्वर के करीब आने का अवसर देता है।
आत्मसंयम और चरित्र निर्माण
रमजान में रोज़ा रखना केवल भूखे-प्यासे रहना नहीं, बल्कि अपनी इच्छाओं, क्रोध और नकारात्मक सोच पर नियंत्रण रखना भी है। यह अभ्यास इंसान को अनुशासन, धैर्य और सहनशीलता सिखाता है। जब व्यक्ति स्वयं को बेहतर बनाता है, तो समाज भी स्वतः बेहतर होता है।
सेहत के लिए लाभकारी
वैज्ञानिक दृष्टि से नियंत्रित उपवास (Intermittent Fasting) शरीर के लिए लाभकारी माना गया है। इससे पाचन तंत्र को आराम मिलता है, शरीर की सफाई (डिटॉक्स) में मदद मिलती है और मानसिक एकाग्रता बढ़ती है। इस प्रकार रमजान आध्यात्मिक उन्नति के साथ-साथ शारीरिक स्वास्थ्य का भी संदेश देता है।
दया, दान और सामाजिक जिम्मेदारी
रमजान में ज़कात और सदक़ा के माध्यम से जरूरतमंदों की सहायता की जाती है। यह सामाजिक समानता और आर्थिक संतुलन को बढ़ावा देता है। जब समाज का संपन्न वर्ग गरीबों की मदद करता है, तो सामाजिक दूरी कम होती है और मानवता मजबूत होती है।
हिंदू–मुस्लिम भाईचारे को बढ़ावा
रमजान का असली सौंदर्य तब दिखता है जब विभिन्न धर्मों के लोग एक-दूसरे के पर्वों में सहभागिता करते हैं। कई स्थानों पर सामूहिक इफ्तार का आयोजन होता है, जहां हिंदू और मुस्लिम एक साथ बैठकर रोज़ा खोलते हैं। यह दृश्य आपसी विश्वास, प्रेम और सौहार्द का प्रतीक होता है।
दूसरे धर्मों के पर्वों पर मुस्लिम समुदाय भी सम्मान और सहयोग की भावना दिखाता है। इस पारस्परिक आदान-प्रदान से यह संदेश मिलता है कि धर्म अलग हो सकते हैं, लेकिन इंसानियत एक है।
साझा मानवीय मूल्य
हर धर्म प्रेम, शांति और सेवा की शिक्षा देता है। रमजान इन मूल्यों को व्यवहार में उतारने का अवसर देता है। जब हिंदू–मुस्लिम मिलकर सेवा कार्य, दान और सामाजिक कार्यक्रमों में भाग लेते हैं, तो समाज में एकता और सद्भाव मजबूत होता है।
निष्कर्ष
रमजान केवल इबादत का महीना नहीं, बल्कि इंसानियत को जोड़ने वाला अवसर है। यह आत्मसंयम, स्वास्थ्य, सेवा और भाईचारे का संगम है। यदि हम रमजान के संदेश—सब्र, करुणा, समानता और प्रेम—को अपने दैनिक जीवन में अपनाएं, तो एक ऐसा समाज बना सकते हैं जहां धर्म की विविधता के बीच भी एकता और सम्मान कायम रहे। यही रमजान का असली संदेश है, जो पूरी इंसानियत के लिए प्रेरणादायक और लाभकारी है।
