07 जनवरी। माघ मेला स्थित परेड सेक्टर 3 में संस्कृति विभाग उप्र के कला संगम पंडाल में आज लोक गीतों, नृत्य नाटिका एवं शास्त्रीय संगीत के मनोहारी गीतों का भी मेला था। दर्शक लोक गीतों, शास्त्रीय संगीत की गंगा में डुबकी लगा रहे थे।
--अनुराधा पाल मुंबई की सेलिब्रिटी कलाकार है, कई पुरुस्कारों से सम्मानित, अपने तबला वादन से इन्होंने देश में ही नहीं अपितु विदेशों में भी धाक जमाई है। गंगा पंडाल में इनकी प्रस्तुति "तबला गाये कहानियां" से दर्शक दीर्घा में सुई पटक सन्नाटा छाया रहा,तबले से ही डमरू की ध्वनि को निकाला, मेले में सामान को खरीदने को लेकर पति, पत्नी के बीच होती नोंक झोंक को तबले से उकेरा। लोगों ने मन्त्र मुग्ध हो तबला वादन का रसास्वादन किया।
--प्रयागराज के पं प्रेम कुमार मलिक दरभंगा घराना के 12वीं पीढ़ी के कलाकार, राष्ट्रपति द्वारा स्वर्ण पदक से सम्मानित हैं, देश विदेश में अपनी मधुर आवाज में शास्त्रीय संगीत के गीतों द्वारा अपनी अलग पहचान बनाई है। राग भीमपलासी, राग संकरा की रचना से शिव स्तुति व गंगा स्तुति के मोहक संगीत को पेश किया।..........
--लोक नृत्य ढेड़िया की मशहूर अदाकारा बीना सिंह प्रयागराज ने अपने साथियों के साथ मिल कर श्रीराम के जीत कर आने के पश्चात इस खुशी के मौके किय जाने वाला ढेड़िया नृत्य का ऐसा उत्कृष्ट प्रदर्शन किया कि जनता अपने स्थान से हिल न सकी ।
--प्रयागराज के ही प्रख्यात कलाकार भूपेंद्र कुमार ने प्रसिद्ध भजनों "जरा हल्के गाड़ी हांकों मेरे गाड़ी वाले" "सीताराम सीताराम कहिए" गजल " न जी भर के देखा, न बात की".को गाकर श्रोतागणों को झूमने को मजबूर कर दिया।
--पांडाल में आज के मुख्य आकर्षण में माधवी मधुकर भारत की पहली संस्कृत की स्त्रोत गायिका हैं जिन्होने संस्कृत के स्रोतों को स्वरबद्ध किया है "त्रिवेणी स्रोतम", "प्रयाग अष्टकम प्रारम्भ" के " तीर्थराजो जयति प्रयाग:" "अच्युतम केशवम" आदि कई स्वरबद्ध स्त्रोत को गाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया । माधवी मधुकर के 1 करोड़ से ज्यादा श्रोता हर माह उनके गाये स्वरबद्ध स्त्रोतों का आनन्द लेते हैं।
ऐसा समां बांधा कि दर्शक गण अपनी जगह से हिल तक न पाए।
मंच का कुशल संचालन रेनू राज ने किया।
सभी कलाकारों व टीमों के उत्कृष्ट प्रदर्शन पर, संस्कृति विभाग के अधिकारीयों द्वारा अंगवस्त्र व प्रमाण पत्र देकर उन्हें सम्मानित किया गया।
