ईमान चक्रवर्ती ने हिंदी, असमी बंगाली और राजस्थानी भजनों से गंगा पण्डाल को झूमा दिया
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ईमान चक्रवर्ती ने हिंदी, असमी बंगाली और राजस्थानी भजनों से गंगा पण्डाल को झूमा दिया



ईमान चक्रवर्ती ने हिंदी, असमी बंगाली और राजस्थानी भजनों से गंगा पण्डाल को झूमा दिया


राग भूप में ध्रुपद की बंदिश से उदय भावेलकर ने मंत्रमुग्ध किया


गंगा पण्डाल में आज दिनांक 20 फरवरी को शास्त्रीय एवं सुगम संगीत का संगम हुआ। कार्यक्रम की पहली प्रस्तुति के रूप में अकादमी पुरस्कार के लिए नॉमिनेट हो चुकीं बंगाली गायिका ईमान चक्रवर्ती के भजनों से गंगा पण्डाल में भक्ति रस की धार बही। अपनी पहली प्रस्तुति में ईमान चक्रवर्ती ने ए गिरी नंदिनीं गाकर माँ भगवती दुर्गा का आवाहन किया। उसके बाद भगवान विष्णु को समर्पित भजन " जो भजे हरि को सदा" प्रस्तुत किया जिसे सभी ने खूब पसंद किया। उन्होंने अपनी गायिका में विविधता दिखाते हुए बिहू गीत भी प्रस्तुत किया। उन्होंने राजस्थानी "फोक मारे हिमबर में " गाकर सभी को झूमा दिया। अपनी अंतिम प्रस्तुति में उन्होंने पंजाबी फोक गाया। 


कार्यक्रम की दूसरी प्रस्तुति के रूप में उस्ताद फरीदुद्दीन डागर और रुद्र वीणा वादक उस्ताद ज़िया मोहिउद्दीन डागर से ध्रुपद की दीक्षा और शिक्षा ले चुके तथा संगीत नाटक अकादमी, राष्ट्रीय कालिदास सम्मान से सम्मानित श्री उदय भावेलकर ने राग भूप में अलाप से ध्रुपद की एक बंदिश "साथ रे सुरन को" से कार्यक्रम की शुरुआत की। उसके बाद उन्होंने राग सरस्वती में "गंगा कालिंदी सरस्वती पावनी" गाकर सभी को ध्रुपद की गहराई से परिचित कराया। अपनी अंतिम प्रस्तुति के लिए लिए उन्होंने आदि शंकराचार्य द्वारा रचित शिव पंचाक्षर स्त्रोत से सभी को आनंदमय कर दिया। 


आज के कार्यक्रम की तीसरी प्रस्तुति के लिए कश्मीरी और हिंदी भाषा मे गायन करने वाली सूफी शैलियों को पॉप में मिश्रण कर प्रस्तुति करने वाली आभा हंजुरा ने अपने सुप्रसिद्ध गीतों से सभी को रिझाया। आपको फैमिली मैन वेब सीरीज में गाये गीत हुकुस बुकुस के लिए दर्शकों का बहुत प्यार मिला है। ये अपने संगीत को उदार लोक पॉप कहती हैं। इनके पहले कार्यक्रम में हुकुस बुकुस से शुरुआत किया। उसके बाद साँसों की माला ऑड झीनी रे झीनी से दर्शकों को झूमा दिया। उसके बाद कश्मीरी फोक मेलोडी और शिव तांडव स्त्रोत से अपने कार्यक्रम की अंतिम प्रस्तुति दी। 



कार्यक्रम में अगली प्रस्तुति संगीता भूषणम प्रो० टी० एस० कृष्णास्वामी की शिष्या रजनी एवं गायत्री ने शास्त्रीय गीत के साथ संगीत की जुगलबन्दी की विशिष्ट प्रदर्शन किया। अपने प्रथम प्रस्तुति में राग केदार में आदि ताल प्रस्तुत किया। अपनी दूसरी प्रस्तुति में राग पंतूरवाली में रूपक ताल प्रस्तुत किया। 



कार्यक्रम की अंतिम प्रस्तुति के लिए कुचिपुड़ी नृत्य से देश विदेश में अपना नाम कमाने वाले श्रीमती विजयानथी काशी ने कुचिपुड़ी नृत्य के अंतर्गत भगवान गणेश की "महा गणपति" स्तुति कर प्रस्तुति की। इस कार्यक्रम में भगवान के विभिन्न स्वरूप को दर्शाया गया है। 


कार्यक्रम के अंत में संस्कृति विभाग के कार्यक्रम अधिषासी श्री कमलेश कुमार पाठक, संस्कृति विभाग के नोडल अधिकारी श्री सुभाष यादव और संस्कृति मंत्रालय की वरिष्ठ सलाहकार सुश्री गौरी बसु ने सभी कलाकारों को अंगवस्त्रम और प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया।

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