प्रेमी जोड़ों को फर्जी विवाह प्रमाणपत्र जारी करने में नौ पर केस, आर्य समाज ने दर्ज कराया मुकदमा
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प्रेमी जोड़ों को फर्जी विवाह प्रमाणपत्र जारी करने में नौ पर केस, आर्य समाज ने दर्ज कराया मुकदमा


प्रेमी जोड़ों को आर्य समाज के नाम से फर्जी विवाह प्रमाणपत्र जारी करने के मामले में शहर में एक और केस दर्ज हुआ है। आर्य समाज, चौक ने यह केस कोतवाली थाने में दर्ज कराया है। इसमें प्रदेश के अलग-अलग जनपदों के चार प्रेमी जोड़ाें व जाली दस्तावेजों से याचिका दायर करने के आरोपी को नामजद किया गया है। पीएन मिश्रा आर्य समाज चौक, के 2006 से निर्वाचित मंत्री हैं। उन्होंने पुलिस को बताया कि उनकी संस्था से विवाह संस्कार सम्पन्न कराने से पूर्व वर-वधू का निवास प्रमाण, शैक्षिक प्रमाण, जन्म प्रमाण, फोटोग्राफ आदि लेकर कराए जाते हैं और फिर प्रमाण स्वरूप विवाह प्रमाण पत्र दिया जाता है। प्रमाणपत्र विवरण रजिस्टर में अंकित किया जाता है व उसकी छायाप्रति व वर-वधू पक्ष से दिए गए दस्तावेज प्रमाण स्वरूप सुरक्षित रखे जाते हैं। संज्ञान में आया है कि संस्था के नाम से फर्जी विवाह प्रमाण पत्र नाबालिग लड़के लड़कियों को जारी किए जा रहे हैं। यही नहीं न्यायालयों में इन्हें ही लगाकर याचिकाएं दाखिल की जा रही हैं। इनमें से एक याचिका सुमन एवं अन्य बनाम राज्य सरकार अधिवक्ता रऊफ अली की ओर से दाखिल किया गया। इसमें 22 जुलाई 2023 का फर्जी विवाह प्रमाण जयहिन्द सिंह निवासी मोहनापुर शनिचरा जनपद संत कबीर नगर व सुमन निवासी ग्राम सनीडीह पोस्ट खजनी सोनबरसा बाबू जनपद गोरखपुर लगाया गया। इस केस में रिपोर्ट पंजीकृत है। प्रमाणपत्र सत्यापन के लिए आया तब उन्हें जानकारी हुई कि यह फर्जी है।

उपरोक्त केस की तरह 09.01.2023 का फर्जी विवाह प्रमाण पत्र राम प्रकाश एवं पूनम, 7.05.2022 का फर्जी विवाह प्रमाण पत्र राज व खुशबू और दिनांकित 20.06.2023 का फर्जी विवाह प्रमाण पत्र वासु एवं भानवी के नाम से जारी किया गया। इसमें उनका जाली दस्तखत भी किया गया। इस प्रकार से फर्जी विवाह प्रमाण पत्र जारी करके दुरुपयोग किया जा रहा है। कोतवाली प्रभारी रोहित कुमार तिवारी ने बताया कि तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। जांच की जा रही है।

क्राइम ब्रांच के पास विवेचना, ठंडे बस्ते में मामला

फर्जी विवाह प्रमाणपत्र लगाकर याचिका दाखिल करने के प्रकरण में जनपद में पूर्व में नौ मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं। इनमें से सात कैंट व एक-एक हंडिया और कौंधियारा थाने में दर्ज हुआ है। नवंबर में पुलिस ने इस खेल का भंडाफोड़ करते हुए दो लोगों को जेल भेजा था। साथ ही सभी मुकदमे क्राइम ब्रांच को सौंप दिए गए थे। इसके बाद से मामला ठंडे बस्ते में ही है। क्राइम ब्रांच अब तक जाली प्रमाणपत्र देने से लेकर सुरक्षा दिलाने का ठेका लेेने वालों तक नहीं पहुंच सकी है।

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