धनुष का खंडन किये श्री राम।खबर जा पहुंची अवधपुर धाम।। पाय पैगाम भूप जी साजन लागे बारात।
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धनुष का खंडन किये श्री राम।खबर जा पहुंची अवधपुर धाम।। पाय पैगाम भूप जी साजन लागे बारात।



मनोज तिवारी ब्यूरो चीफ अयोध्या

रामोत्तसव कार्यक्रम के श्रृंखला में तुलसी उद्यान के मंच पर एकहत्तर दिन तक चलने वाला सांस्कृतिक कार्यक्रम के अंतर्गत शनिवार छप्पनवा दिन को पहली प्रस्तुति प्रयागराज के दीनानाथ की लोक गायन "जीत पर लगा देंगे राम", "राम नाम की माला जपेगा कोई दिलवाला" राम जी के विभिन्न भजन एक के बाद एक कई प्रस्तुतियां दी। इसके पश्चात प्रयागराज के बाबूलाल भंवरा पूर्व उपसभापति उत्तर प्रदेश संगीत नाटक आदमी लखनऊ के बिरहा लोक गायन मे विवाह गीत- चारु भैया घूमे भावरिया हमरी गलियां अगली प्रस्तुति धनुष का खंडन किये श्री राम खबर जा पहुंची अवधपुर धाम पाय पैगाम भूप की साजन लागे बारात की की प्रस्तुति मनमोहन रही जिसे सुन दर्शक और श्रोता खड़े होकर दोनों हाथ से ताली बजाई। इसके पश्चात हिमालय की गोद में बसा गढ़वाल उत्तराखंड देवभूमि बीरों की भूमि के नाम से जाना जाता है । इसके पश्चात लखनऊ के मुनालश्री विक्रम सिंह विष्ट व दल की लोक गायन जो उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी द्वारा लोक नृत्य के क्षेत्र में वर्ष 2007 में सम्मानित किया जा चुके हैं भातखंडे संगीत संस्थान से पंचम वर्षीय लोक नृत्य की शिक्षा के साथ आकाशवाणी और दूरदर्शन से जुड़कर संस्कृति विभाग उत्तर मध्य क्षेत्र संस्कृति केंद्र इलाहाबाद उत्तर प्रदेश संगीत नाटक आदमी तथा विभिन्न विभागों के माध्यम से भारत के विभिन्न प्रांतो में अपने कार्यक्रम प्रस्तुत कर चुके हैं कई राष्ट्रीय पुरस्कार युवा पुरस्कार प्राप्त कर चुके हैं भातखंडे के एग्जामिनर रह चुके हैं शहर में रहकर ग्रामीण क्षेत्र के लुप्त हो रही लोक संस्कृति के संरक्षण व संवर्धन कर रहे हैं लगभग 1000 विद्यार्थियों को लोक नृत्य शिक्षा दे चुके हैं लोक नृत्य की निशुल्क कार्यशाला का आयोजन करते रहते हैं अगली प्रस्तुति असम के कलाकारो द्वारा सुशील व दल की भोरताल गायन और नृत्य की प्रस्तुति असम की खुशबू अयोध्या के रामोत्तसव के मंच पर दिखी। इसके पश्चात राजस्थान के जगदीश व दल द्वारा भवाई नृत्य की प्रस्तुति बहुत ही मनमोहक रही इसके पश्चात लखनऊ के दिनकर द्विवेदी की भजन गायन "पायो जी मैंने राम रतन धन पायो" से शुरुआत करी इसके बाद "राम जी का गुणगान करिए"," गंगा किनारे मंदिर तेरा", "जग में है सुंदर दो नाम चाहे कृष्ण कहो या राम","रघुपति राघव राजा राम" होली गीत- फागुन में खेलब होली सजनिया" की प्रस्तुति बहुत ही जोरदार रही इस प्रस्तुति से सभी दर्शकों में होली के रंगों से सराबोर कर दिया। 

अगली प्रस्तुति प्रयागराज की नीलिमा व दल दल की लोक गायन "जय सियाराम जय जय सियाराम"," सीताराम जी की प्यारी राजधानी लागे","सरयू के तीर आज खेले रघुनंदन बबुआ", कोई आया सखी फुलवरिया में"," बता द बबुआ लोगवा देत काहे गारी", "आज मिथिला नगरिया निहाल सखिया", "ए पहुना मिथिले मे रहुना", "होली खेले रघुवीरा अवध में होली खेले", "गंगा हेराई गई हो जतन मां गंगा गीत को देख सभी दर्शक प्रफुल्लित हुए। इसके पश्चात गोरखपुर के सोमनाथ के द्वारा लोक गायन की की प्रस्तुति रही इसके पंजाब के धर्मेंद्र सिंह व दल द्वारा भांगड़ा नृत्य की प्रस्तुति शानदार रही ।

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