युवतीयों व महिलाओं द्वारा,गोवर्धन पूजा संपन्न
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युवतीयों व महिलाओं द्वारा,गोवर्धन पूजा संपन्न

 


बलिया(उत्तर प्रदेश) से वरिष्ठ संवाददाता -प्रदीप बच्चन की खास रिपोर्ट,

सिकंदरपुर तहसील व विकास खण्ड - मनियर अंतर्गत ग्राम सभा -बालूपुर,कसमापुर, चंदायर,महथापार व बहदुरा के साथ/साथ क्षेत्र के सैकड़ों गांवों में "गोवर्धन पूजा" का आयोजन स्त्रियों द्वारा किया गया।किसी किसी गांव के शिव मंदिरों मे भी भाई के कुशल क्षेम के लिए पूजा अर्चना की गई।बताया जाता है कि आज के दिन बहने उपवास रखती हैं। और गाय के गोबर से गोवर्धन की आकृति जमीन पर बनातीं हैं फिर उनकी पूजा/अर्चना करतीं है।वहीं,रेगनी के कांटों व गाय के गोबर से बनी चिपरी(ओपलों) के साथ ही चिवड़ा (पोहा),मिठाई इत्यादि चढ़ाया जाता है।मान्यता है कि भारी बारिश होने के कारण गायों को वर्षा से बचाने के लिए भगवान कृष्ण ने "गोवर्धन पर्वत" को अपनी कनिष्का अंगुली पर उठा लिया था।और बासुरी के धुन पर सभी गायों को "गोवर्धन पर्वत"के नीचे बुला कर वारिस से,सबकी जान बचा लिया था।तभी से "गोवर्धन पूजा"करने की प्रथा चली आ रही है।कुछ बहनों का मानना है कि"गोधन कुटने" से भाई की लंबी उम्र होती है।उसी उद्देश्य से बहने पूजा अर्चना करतीं हैं।

कुछ युवतियों एवं महिलाओं ने हमारे वरिष्ठ संवाददाता -प्रदीप बच्चन को जानकारी देते हुए बताया कि..द्वापर में भगवान कृष्ण गोवर्धन पर्वत के पास,जब गइयां चारा रहें थें तभी अचानक आंधी/तूफान के साथ तबाही भरी,भयंकर वर्षा होने के कारण जन जीवन अस्त व्यस्त होने लगा, गइया इधर उधर भागने लगी।तब भगवान कृष्ण ने अपनी कनिस्का अंगुली पर गोवर्धन पर्वत को उठा लिया।और बासुरी बजा कर सभी गायों व लोगों को गोवर्धन पर्वत के नीचे छुपाने के लिए बुला लिया।कुछ युवतियों और महिलाओं ने बताया कि अविवाहित युवतियां अपने भाई के दीर्घायु व अपनी रक्षार्थ इस व्रत को करतीं हैं।तो कुछ ने सुंदर पति पाने के इच्छार्थ इस व्रत को करतीं हैं।

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