Prayagraj: मानसिक रोगी होने के कई कारण होते हैं, जिसमें किसी व्यक्ति को नशे की लत लगना भी शामिल है। इस प्रकार के रोगी कई ऐसे काम कर देते हैं जिसकी कल्पना भी नहीं होती है। मनोचिकित्सकों की मानें तो ऐसे मरीज मेनिया डिप्रेशन के शिकार होते हैं। इस प्रकार के मरीजों को जो चीज ज्यादा आकर्षित करती है, ये उसी में ढल जाते हैं। ऐसे मनोरोगियों की काउंसलिंग होती और दवाइयां भी चलाई जाती हैंं।
केस नंबर 1- मऊआइमा निवासी 20 वर्षीय राशिद (काल्पनिक नाम) को भांग व गांजा की लत थी। करीब 18 वर्ष की आयु में उसे लगा कि वह हिंदू है और भगवान राम का भक्त हनुमान है। वह खुद को बजरंग बली कहने लगा। इस दौरान कई जगह उसकी मारपीट भी हुई। परिवार वाले उसकी हरकत से परेशान हो गए। जिसके बाद परिवार वाले उसे बेड़ियाें में जकड़कर स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय ले गए। काउंसलिंग के दौरान राशिद ने कहा कि वह राम भक्त हनुमान है। सूर्य से ज्यादा उसका तेज है। राशिद के पिता पटाखा फैक्ट्री में काम करते हैं। बेहद गरीब परिवार में होने के कारण उसकी पढ़ाई लिखाई पूरी न हो सकी और वह कूड़ा बिनने लगा। फिलहाल पिछले दो साल से राशिद का इलाज स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय में चल रहा है।
केस नंबर 2- झूंसी निवासी 18 व 21 वर्षीय अभय और सुशील (काल्पनिक नाम) दोनाें भाई नशे के आदी थे। जिसमें बडा भाई सुशील सिगरेट व दारू व छोटा भाई अभय स्मैक, गांजा व शराब का आदी थी। वहीं छोटे भाई को कुछ समय बाद लगने लगा कि वह बहुत अमीर आदमी है। आने वाले समय में वह प्रधानमंत्री बन जाएगा। सब उसके नौकर हैं। वह किसी से सीधे तरीके से बात नहीं करता था। परिवार वाले उसकी हरकतों से ऊब गए। वहीं एसआरएन अस्पताल के मानसिक रोग विभाग में इलाज के दौरान उसने कहा कि वह जल्द ही अमीर होने वाला है। इसके बाद वह डॉक्टरों को गाली देने लगा। वहीं दोनों भाईयों को फिलहाल इलाज चल रहा है।
काल्विन अस्पताल में धर्म परिवर्तन का मामला
मोती लाल नेहरू मंडलीय चिकित्सालय में शुक्रवार को एक ऐसा मानसिक रोगी आया, जो कि नशे का आदी है। झलवा निवासी 17 वर्षीय सत्येंद्र मिश्रा (काल्पनिक नाम) को लगता है कि वह हिंदू नहीं मुस्लिम है। उसके कई मुस्लिम दोस्त हैं। वह गरीब परिवार से है और ई रिक्शा चलाता है। अपनी मां के साथ अस्पताल पहुंचने पर वह मनकक्ष के डॉक्टरों को गाली देने लगा। कई बार पूछने पर भी उसने कुछ नहीं बताया। इस दौरान उसकी मां ने सारी हकीकत बताई। मन कक्ष के चिकित्सकों की मानें तो उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं है और उसे कुछ एंटी डिप्रेशन की दवाईयां दी गई हैं। इसके अलावा वापस काउंसलिंग के लिए बुलाया गया है।
हर महीने हजारों की संख्या में आते हैं मरीज
स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय के मानसिक रोग विभाग में हर महीने दो से तीन हजार मानसिक रोगी आते हैं। जिसमें लगभग डेढ़ हजार मरीज नशे के आदी होते हैं। इनमें से तकरीबन 200 नाबालिक मरीज नशे की आदी होते हैं। इतना ही नहीं हर महीने दो से तीन मरीज ऐसे होते हैं जिन्हें लगता है कि वह जिस धर्म में पैदा हुए हैं वह उसके नहीं बल्कि किसी और धर्म के हैं।
अधिक नशा करना अधिकतर मानसिक रोग का कारण बनता है। इस दौरान मानसिक रोगियों के आस पास जो चीज अधिक होती है, वह उसे अपना लेते हैं। इस प्रकार के कई मानसिक रोगियों का इलाज एसआरएन के मानसिक रोग विभाग में चल रहा है। वहीं 75 फीसदी मरीज इलाज से ठीक भी हो जाते हैं। -