नए संसद भवन पर राजनीति जारी, राजद ने विवादित तस्वीर ट्वीट कर लिखा- ये क्या है?
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नए संसद भवन पर राजनीति जारी, राजद ने विवादित तस्वीर ट्वीट कर लिखा- ये क्या है?

 


नई दिल्ली: नए संसद भवन के उद्घाटन के मुद्दे पर राजनीति जारी है। इसे लेकर बिहार के राष्ट्रीय जनता दल ने ट्विटर पर विवादास्पद फोटो पोस्ट की है। राजद ने एक ताबूत की तस्वीर के साथ नए संसद भवन की तुलना करते हुए लिखा कि ये क्या है? बता दें कि राजद का यह ट्वीट ऐसे समय आया है, जब प्रधानमंत्री मोदी ने संसद के नए भवन का उद्घाटन किया है। संसद के नए भवन के उद्घाटन पर राजनीति भी खूब हुई है। कांग्रेस समेत 20 विपक्षी पार्टियों ने संसद के नए भवन के उद्घाटन कार्यक्रम का बहिष्कार किया। राजद भी बहिष्कार करने वाली पार्टियों में शामिल है।  

भाजपा ने किया पलटवार

राजद के इस ट्वीट की आलोचना भी शुरू हो गई है। भाजपा के प्रवक्ता गौरव भाटिया ने राजद के इस ट्वीट पर पलटवार करते हुए लिखा कि 'आज एक ऐतिहासिक पल है और देश गौरवान्वित है। आप नजरबट्टू हैं और कुछ नहीं। छाती पीटते रहिए। 2024 में देश की जनता आपको इसी ताबूत में बंद करके गाड़ देगी और नए लोकतंत्र के मंदिर में आप को आने का मौका भी नहीं देगी। चलिए यह भी तय हुआ कि संसद देश की और ताबूत आपका। बिहार भाजपा के नेता और राज्य के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने कहा कि आज भले ही सभी दलों के लोगों ने संसद के नए भवन के उद्घाटन कार्यक्रम का बहिष्कार किया हो लेकिन कल सदन की कार्यवाही तो वहीं चलने वाली है। क्या राष्ट्रीय जनता दल ने यह तय कर लिया है कि वे नए संसद भवन का स्थायी रूप से बहिष्कार करेंगे? क्या वे लोकसभा की सदस्या से इस्तीफा देंगे? ताबूत का चित्र दिखाना इससे ज्यादा अपमानजनक कुछ नहीं है। सुशील मोदी ने कहा कि जिन लोगों ने संसद के नए भवन की तुलना ताबूत से की है, ऐसे लोगों के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज होना चाहिए।

भाजपा नेता दुष्यंत गौतम ने राजद के ट्वीट पर कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। आज वह संसद की नई इमारत की तुलना ताबूत से कर रहे हैं क्या उन्होंने पुरानी इमारत की तुलना जीरो से की थी? क्या हम पहले जीरो में बैठ रहे थे।

राजद ने दी सफाई
विवाद बढ़ने पर राजद ने सफाई दी है। राजद नेता शक्ति सिंह यादव ने कहा कि लोकतंत्र को दफन कर दिया गया है, इसलिए हमारे ट्वीट में ताबूत प्रतीकात्मक तौर पर  दिखाया गया है। देश इसे स्वीकार नहीं करेगा। संसद, लोकतंत्र का मंदिर होती है और ऐसी जगह होती है, जहां चर्चाएं होती हैं। 

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