प्रयागराज में अंतरराष्ट्रीय स्‍तर के खिलाडिय़ों की कमी हो गई है, कारण पर दें ध्‍यान
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प्रयागराज में अंतरराष्ट्रीय स्‍तर के खिलाडिय़ों की कमी हो गई है, कारण पर दें ध्‍यान

 



प्रयागराज,  हाकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद जिस शहर में जन्मे हो उस स्थान से तो दुनिया को चकाचौंध करने वाले खिलाडिय़ों की फौज निकलनी थी लेकिन एक दशक पूर्व दानिश मुज्तबा के बाद दूसरे अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी का बस इंतजार चल रहा है। हालांकि कई खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय फलक पर पहुंचे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रयागराज के किसी खिलाड़ी ने आखिरी पदक 2010 में जीता था। यह श्रेय आशीष कुमार को कामनवेल्थ में मिला। हालांकि खिलाडिय़ों में न तो इच्छाशक्ति की कमी है, न यहां प्रतिभाओं किसी से पीछे हैं, लेकिन सरकारी उदासीनता और सुविधाओं के टोटे ने अंतरराष्ट्रीय पदकों का सूखा पैदा कर दिया है। पिछले दो दशकों से यहां क्रिकेट व बहुउद्देश्यीय अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम बनाए जाने की कवायद चल रही है, लेकिन फाइलों और जुबानी वादों से बस ख्याली पुलाव पकाया जा रहा है। एथलेटिक्‍स की दुनिया में खिलाडि़यों ने दबदबा कायम किया

यह है प्रयागराज, यहां एथलेटिक्स का प्रवाह देखकर एक दशक पहले कहा जाता था कि प्रयागराज की दो चीजें विश्व प्रसिद्ध हैं, एक इलाहाबादी अमरूद और दूसरा इलाहाबादी थ्रोवर। यह कथन यूं नहीं कहा गया था, एथलेटिक्स की दुनिया में यहां से निकले खिलाडिय़ों के दबदबे ने इसे साबित कर दिखाया था। हालांकि अब खिलाडि़यों की कमी भी नजर आ रही है। गंगा-यमुना और अदृश्य सरस्वती की तीन धाराओं के बीच स्पोर्ट्स प्रयागराज की चौथी धारा के रूप में देखा जाता है। यह संगम नगरी का अतिरिक्त प्रवाह है। यह 28 राज्य और आठ केंद्र शासित प्रदेश से बहती हुई अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वर्णिम उपलब्धियों के लिए जानी जाती है। कई खिलाड़ी अंतरराष्‍ट्रीय फलक पर पहुंचे हैं

हाकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद जिस शहर में जन्मे हो उस स्थान से तो दुनिया को चकाचौंध करने वाले खिलाडिय़ों की फौज निकलनी थी, लेकिन एक दशक पूर्व दानिश मुज्तबा के बाद दूसरे अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी का बस इंतजार चल रहा है। उम्मीदें कई हैं। कई खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय फलक पर पहुंचे हैं, इंतजार बस पदकों का है।

इन खिलाडि़यों ने प्रयागराज को दिया ख्‍याति

एक दशक पहले अंतरराष्ट्रीय खिलाडिय़ों का यहां जमघट था। क्रिकेटर मो. कैफ, बैडमिंटन में अभिन्न श्याम गुप्ता, जिमनास्टिक में आशीष कुमार ने अंतरराष्ट्रीय स्‍तर ख्याति बटोरी। एशियन गेम में प्रमोद तिवारी, साउथ एशियन गेम में इस्तियाक अहमद, विश्व क्रास कंट्री में सुरेश कुमार, जूनियर एशिया में शशि प्रकाश, विनोद कुमार ङ्क्षसह, शाटपुट में रणविजय सिंह, जेवलिन थ्रो में अरूण पटेल, यूथ एशिया में हैमर थ्रोवर चंद्रोदय नारायण सिंह, यूथ कामन वेल्थ में कृष्णानंद त्रिपाठी, जेवलिन में रोहित कुमार, हैमर में मेराज अहमद, हदीस अली, गौरव यादव ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीता था। धावकों में भीम लाल, शास्त्री देवी, शशि देवी, अनीशा पटेल, कविता पटेल, अजय सरोज, पोल वाल्ट में हदीश अली, हरी लाल, सुभाष यादव, बजरंगी, परमिंदर पटेल, रणंजय सिंह। भाला प्रक्षेपण में अरुण पटेल, कृष्ण कुमार पटेल, मनोज यादव। तारगोला प्रक्षेपण में इश्तियाक अहमद, रईस अहमद, इजाद अहमद, अली अहमद ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाम कमाया।

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