चैत्र नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्माण्डा की पूजा करते हैं.
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चैत्र नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्माण्डा की पूजा करते हैं.


Chaitra Navratri 2022: आज चैत्र नवरात्रि का चौथा दिन है. आज मां कूष्माण्डा की विधि विधान से पूजा करते हैं. चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मां कूष्माण्डा की आराधना करते हैं. मां कूष्माण्डा शेर पर सवार रहती हैं. वे अपनी 8 भुजाओं में कमल, कमंडल, धनुष, बाण, चक्र, अमृत कलश, गदा और जप माला धारण करती हैं. कूष्माण्डा का मतलब कुम्हड़ा से है. देवी को कुम्हड़ा प्रिय है, इसलिए उनका नाम कूष्माण्डा पड़ा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी कूष्माण्डा ने ही पूरे ब्रह्मांड की रचना की है. मां दुर्गा ने अधर्म और अत्याचार के अंत के लिए कूष्माण्डा अवतार लिया था. मां कूष्माण्डा की कृपा से सभी संकटों और दुखों का अंत होता है एवं मनोकामनाएं पूरी होती हैं. आइए जानते हैं मां कूष्माण्डा की पूजा विधि, मुहूर्त, मंत्र और आरती के बारे में. मां कूष्माण्डा का पूजा मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 04 अप्रैल दिन सोमवार को दोपहर 01:54 बजे से शुरु हुई है. इसका समापन आज 05 अप्रैल को 03:45 पीएम पर हो रहा है. ऐसे में उदयातिथि के अनुसार मां कूष्माण्डा की पूजा की तिथि आज ही है.आज सुबह 08 बजे तक प्रीति योग है और उसके बाद आयुष्मान योग प्रारंभ हो रहा है, वहीं सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग सुबह 06:07 बजे से शाम 04:52 बजे तक है. ऐसे में आप मां कूष्माण्डा की पूजा सुबह से ही कर सकते हैं. इस दिन का शुभ समय 11:59 एएम से दोपहर 12:49 पीएम बजे तक है.मां कूष्माण्डा की पूजा विधि
आज सुबह आप स्नान के बाद मां कूष्माण्डा का ध्यान करें. फिर उनको अक्षत्, लाल फूल, सिंदूर, कुमकुम, धूप, दीप, गंध, फल, सफेद कुम्हड़ा आदि अर्पित करें. फिर मां कूष्माण्डा को हलवा या दही का भोग लगाना चाहिए. इस दौरान मां कूष्माण्डा के पूजा मंत्रों का उच्चारण करते रहें. पूजा के अंत में गाय के घी का दीपक जलाएं और उससे मां कूष्माण्डा की आरती करें.

देवी कूष्माण्डा का पूजा मंत्र
ओम देवी कूष्माण्डायै नमः
बीज मंत्र
ऐं ह्री देव्यै नम:
प्रार्थना मंत्र
सुरासम्पूर्ण कलशं रुधिराप्लुतमेव च।
दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥
मां कूष्मांडा की आरती
कूष्मांडा जय जग सुखदानी। मुझ पर दया करो महारानी॥
पिगंला ज्वालामुखी निराली। शाकंबरी मां भोली भाली॥
लाखों नाम निराले तेरे। भक्त कई मतवाले तेरे॥
भीमा पर्वत पर है डेरा। स्वीकारो प्रणाम ये मेरा॥
सबकी सुनती हो जगदम्बे। सुख पहुंचती हो मां अम्बे॥
तेरे दर्शन का मैं प्यासा। पूर्ण कर दो मेरी आशा॥
मां के मन में ममता भारी। क्यों ना सुनेगी अरज हमारी॥
तेरे दर पर किया है डेरा। दूर करो मां संकट मेरा॥
मेरे कारज पूरे कर दो। मेरे तुम भंडारे भर दो॥
तेरा दास तुझे ही ध्याए। भक्त तेरे दर शीश झुकाए॥

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