पटना. शराबबंदी कानून को असरदार बनाने के लिए बिहार में विशेष न्यायालयों (Bihar Special Court) के गठन के बाद केसों के ट्रायल के मामले में लंबी छलांग देखने को मिली है. दरअसल बिहार में मद्य निषेध अधिनियम (Liquor Prohibition Act) से संबंधित न्यायालयों में करीब 3 लाख 50 हज़ार मामले दर्ज हैं. 2016 से शराबबंदी कानून (Bihar Liquor Ban) लागू होने के बाद इन मामलों के ट्रायल में हाल तक कोई खास प्रगति नहीं देखी गई थी. सच यो यह है कि मामलों में केवल 18000 मामलों में ट्रायल शुरू हो पाया था लेकिन अब 1 लाख 12 हजार से अधिक मामलों का ट्रायल शुरू हो गया है.
1850 ट्रायल तो पूरे भी कर लिए गए हैं जिनमें अब तक 721 व्यक्तियों को दोषमुक्त करार दे दिया गया है जबकि 1129 लोगों को सजा तक सुना दी गई है. इस बात की जानकारी मद्य निषेध विभाग के आयुक्त कार्तिकेय धनजी ने देते हुए बताया कि पिछले 2 महीने में 157 मामलों में सजा के बिंदु पर सुनवाई करते हुए 89 लोगों को सजा भी सुनाई गई है जबकि 68 लोग दोष मुक्त करार दिए गए हैं. उपायुक्त ने बताया कि सजा पाने वालों में चार अभियुक्तों को आजीवन कारावास जबकि 10 को 10 वर्ष और 51 को 5 वर्ष की सजा सुनाई गई है.त्पाद आयुक्त की मानें तो मद्य निषेध मामलों से जुड़े कई अभियुक्त जमानत खत्म होने के बावजूद न्यायालय में उपस्थित नहीं हो पाए हैं ऐसे करीब 1874 अभियुक्तों की पहचान करते हुए उनके विरुद्ध गैर जमानती वारंट निकालने की प्रक्रिया शुरू हो गई है. इनमें से कई अभियुक्त पंजाब, हरियाणा, राजस्थान दिल्ली और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों से ताल्लुक रखते हैं. इन सभी की गिरफ्तारी के लिए पुलिस और मद्य निषेध विभाग की संयुक्त टीम गठित कर ली गई हैं.
ये संयुक्त टीमें इन राज्यों में जाकर कानून को ठेंगा दिखाने में लगे इन लोगों के गिरफ्तारी सुनिश्चित करेगी. उत्पाद आयुक्त की मानें तो गोपालगंज के चार अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है जबकि दो को 10 साल की सजा मिली है. भागलपुर के बारे में जानकारी देते हुए कार्तिकेय ने बताया कि यहां तीन अभियुक्तों को 10 साल की सजा सुनाई गई है जबकि अररिया में 111, बांका में 7 और बक्सर और अरवल में पांच-पांच लोगों को 5 साल की सजा सुनाई गई है.
