
मनकामेश्वर मंदिर में भगवान मनकामेश्वर के अलावा सिद्धेश्वर और ऋणमुक्तेश्वर शिव, शिवलिंग के रूप में विराजमान हैं.भक्तजन यहां कामेश्वर और कामेश्वरी दोनों की पूजा-अर्चना करते हैं.यहां हनुमान जी भी दक्षिणमुखी रूप में विराजमान हैं.
क्या है मंदिर की ऐतिहासिकता
बताया जाता है कि मंदिर का वर्णन विभिन्न पुराणों में है.पद्म पुराण में
बताया गया है कि कामदेव को भस्म करके शिव जी यहां पर लिंग के रूप में स्थित
हो गए थे और तब से यहां पूजा अर्चना का सिलसिला जारी है.
अगर बात करें त्रेता युग में की तो भगवान राम वनवास जाते समय जब प्रयाग पहुंचे तो उन्होंने किले में स्थित अक्षयवट के नीचे आराम किया और यहां स्थित शिवलिंग का जलाभिषेक किया .14 वर्ष के वनवास के बाद जब राम वापस अयोध्या लौटने लगे तो पुनः भारद्वाज ऋषि से आशीर्वाद लेने के बाद माता सीता और भाई लक्ष्मण के साथ मनकामेश्वर शिव के दर्शन के लिए आए थे.
