प्रयागराज: यह बात अलग है कि सूबे में समाजवादी पार्टी की सरकार नहीं बन सकी, लेकिन उसने अपने प्रदर्शन का लोहा जरूर मनवा दिया। 2017 में मंडल के प्रयागराज, प्रतापगढ़ और कौशांबी की 22 सीटों में सिर्फ एक सीट पर जीत दर्ज करने वाली सपा ने इस बार नौ सीटों पर विजय का पताका लहराया। प्रयागराज में जहां चार सीटें जीतीं, वहीं कौशांबी में तीनों सीटों पर कब्जा कर भाजपा व अन्य दलों काे खाता तक नहीं खोलने दिया। कौशांबी में पहली बार सपा ने तीन सीटों पर दर्ज की जीत, प्रतापगढ़ में दो पर लहराया परचम
2017 में हुए विधानसभा चुनाव में प्रयागराज की 12 सीट में समाजवादी पार्टी ने सिर्फ करछना में जीत हासिल की थी। यहां से उज्ज्वल रमण सिंह जीते थे, जबकि कौशांबी की तीन और प्रतापगढ़ की सात सीटों में एक भी हाथ नहीं लगी थी। लेकिन इस चुनाव में सपा ने इसे पलट दिया। प्रयागराज में चार, कौशांबी में तीन और प्रतापगढ़ में दो सीटें जीतकर उसने अपना लोहा मनवाया। प्रयागराज के प्रतापपुर से विजमा यादव, मेजा से संदीप सिंह पटेल, सोरांव से गीता पासी और हंडिया से हाकिम लाल बिंद ने विजयश्री हासिल की। वहीं, कौशांबी में तो उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को पराजित करते हुए सपा ने तीनों सीटों पर कब्जा कर लिया। सिराथू से पल्लवी पटेल, चायल से पूजा पाल और मंझनपुर से इंद्रजीत सरोज ने जीत दर्ज की। प्रतापगढ़ में मंत्री राजेंद्र प्रताप सिंह उर्फ मोती सिंह को ददुआ के भतीजे राम सिंह पटेल ने पराजित किया तो रानीगंज के विधायक धीरज ओझा को डा. आरके वर्मा ने हराया। मंडल की नौ सीटों पर सपा ने यूं ही जीत दर्ज नहीं की। इसके लिए जमीनी स्तर पर पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने मेहनत की और उसी का परिणाम रहा कि एक से नौ सीटों का यह सफर तय हो सका।
हारे वह भी रहे दूसरे नंबर पर
इस चुनाव में एक और खास बात यह रही कि सपा के उम्मीदवार जहां भी हारे, वह दूसरी नंबर पर रहे। हार का अंतर भी पिछले बार की तुलना में अधिकांश जगहों पर कम ही रहा। फूलपुर, करछना में तो कांटे के मुकाबले में सपा के उम्मीदवारों को हार का सामना करना पड़ा।
शहर की तीनों सीट नहीं बचा पाए
वर्ष 2017 के चुनाव को छोड़ दें तो उसके पहले सपा शहर की तीन में एक सीट तो जरूर उसकी झोली में आ जाती थी। इसमें दक्षिणी या पश्चिमी होती थी, लेकिन 2017 में तीनों सीट हाथ से निकलने के बाद इस बार भी शहर में पार्टी का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा। हालांकि, वोट में जरूर बढ़ोत्तरी हुई, लेकिन जीत हासिल नहीं हुई।
