प्रयागराज में घटे मतदान में उलझे हैं लोग, कारण जानने का कर रहे प्रयास
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प्रयागराज में घटे मतदान में उलझे हैं लोग, कारण जानने का कर रहे प्रयास

प्रयागराज, यूपी विधानसभा चुनाव 2022 के पांचवें चरण में प्रयागराज में मतदान 27 फरवरी को संपन्‍न हो चुका है। यहां यह बात गौरतलब है कि जनपद की 12 विधानसभा सीटों में आठ सीटों पर वर्ष 2017 की तुलना में मतदान प्रतिशत घटा है। इसमें शहर की एक सीट और ग्रामीण इलाकों की सात सीटें शामिल हैं। घटे मतदान प्रतिशत ने राजनीति के अखाड़े के मठाधीशों के साथ ही लोगों के माथे पर चिंता की लकीर खींच दी है। आइए जानें इसका कारण। इलाहाबाद उत्‍तरी व मेजा, करछना में गिरा मतदान प्रतिशत इलाहाबाद उत्तरी विधानसभा सीट में 2017 में 41.90 प्रतिशत मतदान हुआ था। भाजपा के हर्षवर्धन बाजपेयी ने बाजी मारी थी। इस बार यहां 39.56 प्रतिशत ही वोट पड़े हैं। मेजा विधानसभा सीट में तो 2.30 प्रतिशत मतदान वर्ष 2017 की अपेक्षा घटा है। पिछले चुनाव में यहां 58.30 प्रतिशत मतदान हुआ था, जो इस बार 56 प्रतिशत ही रह गया। करछना में विधानसभा सीट पर भी 2017 की तुलना में इस बार मतदान प्रतिशत में गिरावट आई। पिछले चुनाव में 59.92 और इस बार 57 प्रतिशत ही लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। बारा, हंडिया, सोरांव, फाफामऊ, कोरांव में भी इस बार कम पड़े वोट बारा विधानसभा सीट की बात की जाए तो 2017 में यहां 59.26 और इसी बार 58 फीसद वोट पड़ा। यानी 1.26 प्रतिशत कम रहा। हंडिया विधानसभा सीट पर भी 2.69 प्रतिशत मतदान कम हुआ है। 2017 में 54.69 और इस बार 52 प्रतिशत लोगों ने ही वोट डाले। सोरांव विधानसभा सीट पर 2017 में 58.15 लोगों ने वोट डाला था, लेकिन इस बार 57.56 लोग ही पोलिंग बूथ तक पहुंचे। फाफामऊ विधानसभा सीट पर मतदान प्रतिशत में 1.61 की गिरावट सामने आई। 2017 में यहां 57.61 और इस बार 56 प्रतिशत लोगों ने ही अपने मताधिकार का प्रयोग किया। कोरांव विधानसभा सीट पर 2017 में जहां 59.58 प्रतिशत वोट पड़ा था, जबकि इस बार 58.28 प्रतिशत ही मतदान हुआ। उम्‍मीदवारों की भी बढ़ी उलझन पिछले चुनाव की अपेक्षा मतदान कम होने से राजनीति के अखाड़े के दिग्गजों का माथा चकरा गया है। सभी को पूरी उम्मीद थी कि इस बार मतदान प्रतिशत बढ़ेगा, लेकिन हुआ इसका उल्‍टा। मतदान कम होने से राजनीतिक पंडितों से लेकर उम्मीदवारों की उलझन बढ़ गई है। पिछले और इस बार के रिकार्ड की तुलनात्मक समीक्षा प्रत्याशी और उनके समर्थक भी कर रहे हैं। यह तो 10 मार्च को ही पता चलेगा। कम मतदान की यह भी वजह हो सकती है यूं तो मतदान के लिए जिला प्रशासन के साथ ही स्‍वयंसेवी संस्‍थाएं आदि ने लगातार महीनों से मतदाता जागरूकता अभियान भी चलाया। फिर भी प्रयागराज के कई विधानसभा सीटों पर कम मतदान का आखिर क्‍या कारण है, इसे भी लोग जानना चाहते हैं। कहा जा रहा है कि कई ऐसे भी लोग हैं जो कामगार हैं, वह दूसरे राज्‍यों में हैं। कोरोना काल के बाद वे वापस गए हैं। निकट ही होली पर्व पर उनके घर आने का प्रोग्राम है। ऐसे में वह यहां मतदान नहीं कर सके। वहीं मतदाता सूची में नाम न होना भी एक कारण हो सकता है। काफी लोगों की शिकायत भी आई कि मतदाता सूची में उनका नाम कटा है।


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