प्रयागराज:- 18वीं विधानसभा के गठन के लिए नतीजे घोषित हो चुके हैं। भाजपा दोबारा सरकार बनाने जा रही है। पार्टी का शीर्ष नेतृत्व बैठकों और मंत्रणा में जुट गया है। विपक्षी दल हार की वजहों को तलाशने में लगे हैं। ऐसे में भाजपा की जीत के पीछे कौन से कारक और लोग नींव का पत्थर बने यह भी देखना जरूरी है। प्रधानमंत्री मोदी सहित सभी केंद्रीय मंत्री सीधे तौर पर चुनावी समर का हिस्सा बने जबकि पर्दे के पीछे संघ विचार परिवार पूरी मुस्तैदी से खड़ा नजर आया। आरएसएस प्रांत प्रचारक ने कहा- स्वयंसेवकों ने पूरी ताकत लगाई थी आरएसएस के प्रांत प्रचार प्रमुख डा. मुरारजी त्रिपाठी ने बताया कि सीधे तौर पर संगठन राजनीतिक गतिविधियों में नहीं हिस्सा लेता बल्कि वैचारिक जागरूकता व सामाजिक सुधार के लिए कार्य करता है। यही प्रक्रिया चुनाव के दौरान भी चल रही थी। समाज में मतदान के प्रति जागरूकता लाने के साथ सरकार के कार्यों को गिनाने, राष्ट्रीयता के भाव को जगाने जैसे अभियान को जमीन पर उतारा गया। स्वयंसेवकों ने पूरी ताकत लगाई। छह फरवरी से माघ मेला में शुरू हुए इस अभियान में आरएसएस के साथ समान विचार वाले करीब 40 संगठन शामिल हुए। उसके बाद सभी मोहल्लों और गांव तक वैचारिक प्रवाह को पहुंचाया गया। 'अस्मिता के प्रतीक हमारे धार्मिक स्थल' नामक पत्रक भी बांटे गए। कुंभ 2019, अयोध्या में बन रहे श्रीराम मंदिर, काशी कारीडोर, मां विंध्यवासिनी मंदिर के चारों ओर हो रहे विकास कार्यों का विवरण लोगों से साझा किया गया। इन कार्यों से किस तरह आर्थिक बदलाव हो रहा है यह भी बताया गया। विधानसभावार टीम गठित कर स्वयंसेवकों ने किया कार्य कार्ययोजना को फलीभूत करने के लिए स्वयंसेवकों व संगठन के पदाधिकारियों ने विधानसभावार टीम गठित की। जिम्मेदारियों को आपस में बांटकर कार्य किया। इसकी शुरुआत सुबह की शाखा से होती थी जो देर रात तक अलग-अलग गतिविधियों के रूप में चलती रहती थी। गंगा समग्र के प्रदेश संगठन मंत्री अम्बरीश ने बताया कि आरएसएस के साथ गंगा समग्र के कार्यकर्ता भी जुटे रहे। घर घर जाकर सनातन संस्कृति को संजीवनी देने का अभियान चलाया गया। सरकार ने क्या किया, आगे क्या होना चाहिए इन सभी चीजों को उठाते हुए लोगों को चुनाव की प्रक्रिया से वैचारिक तौर पर जोड़ा गया। विधानसभावार टीम गठित कर स्वयंसेवकों ने किया कार्य कार्ययोजना को फलीभूत करने के लिए स्वयंसेवकों व संगठन के पदाधिकारियों ने विधानसभावार टीम गठित की। जिम्मेदारियों को आपस में बांटकर कार्य किया। इसकी शुरुआत सुबह की शाखा से होती थी जो देर रात तक अलग-अलग गतिविधियों के रूप में चलती रहती थी।
