नई दिल्ली. भले ही भारत दुनिया का सबसे बड़ा हथियार आयातक देश है लेकिन जल्द ही यह स्टेटस बदलने वाला है क्योंकि भारत में अब बड़े पैमाने पर स्वदेशी तकनीकी से युद्धक सामग्री बनाई जा रही है. इसके तहत लड़ाकू विमान और लड़ाकू हेलीकॉप्टर भी बनाने पर जोर दिया जा रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत भारत एयरोनॉटिकल लिमिटेड ने स्टील्थ क्षमता वाले अत्याधुनिक लड़ाकू हेलीकॉप्टर बनाया है. इनमें से 15 हेलीकॉप्टर को खरीदने की मंजूरी मोदी सरकार ने दे दी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली सुरक्षा की कैबिनेट कमेटी (सीसीएस) ने सेना और वायुसेना के लिए 15 स्वदेशी लाइट अटैक हेलीकॉप्टर (एलसीएच) को खरीदने की मंजूरी दे दी है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि हाल द्वारा निर्मित इस लाइट कंबेट हेलीकॉप्टर आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. इससे देश के रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी हथियार बनाने को प्रोत्साहन मिलेगा. 15 हेलीकॉप्टर की कीमत 3387 करोड़ तय की गई है. एचएएल यानी हाल ने इन हेलीकॉप्टर का निर्माण कर लिया है. इनमें से 10 हेलीकॉप्टर वायुसेना के लिए और पांच भारतीय सेना के लिए होंगे. स्टील्थ क्षमता के कारण ये हेलीकॉप्टर दुश्मन के रडार को आसानी से चकमा दे देंगे और इसपर किसी फायरिंग का भी असर नहीं होगा.2006 से बनाए जा रहे थे हेलीकॉप्टर 1999 के कारगिल युद्ध में ऊंचाई वाले पहाड़ों पर युद्ध करने में भारत को बड़ी दिक्कत हुई थी. तब से भारत में हेलीकॉप्टर की जरूरत महसूस की जा रही थी. हालांकि वर्तमान में भारत के पास दुनिया के सबसे शक्तिशाली और अत्याधुनिक हेलीकॉप्टर मौजूद हैं जो उसने रूस और अमेरिका से खरीदा है. रूस से एम26 हेलीकॉप्टर को दुनिया का सबसे शक्तिशाली हेलीकॉप्टर माना जाता है जबकि अमेरिका का अपाचे बेहद सटीक मारक क्षमता के साथ ऊंचाई वाली जगहों के लिए माकूल है. ये दोनों हेलीक़ॉप्टर भारत के पास है. लेकिन भारत के हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने कारगिल युद्ध की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 2006 से ही इस हेलीकॉप्टर के निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर दी थी. 15 साल की मेहनत के बाद ये लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर (एलसीएच) बनकर तैयार हुआ है.
बेमिशाल है इसकी खासियत
हाल द्वारा निर्मित इस हेलीकॉप्टर का वजन 6 टन है. हल्का होने के कारण यह ऊंचाई वाली जगहों पर आसानी से मिसाइल से अटैक करने में सक्षम है. इस हेलीकॉप्टर को हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल मिस्ट्रल को छोड़ने के लिए खास तौर पर बनाया गया है. हेलीकॉप्टर में 20 एमएम की गन लगी है जो 110 डिग्री में किसी भी दिशा में घूम सकती है. पायलट के हेलमेट पर ही कॉकपिट के सभी फीचर्स डिसप्ले हो जाते हैं. सबसे बड़ी बात यह है कि यह हेलीकॉप्ट दुश्मन के रडार को भी चकमा दे देगा. यानी यह स्टील्थ क्षमता के साथ बनाई गई है. इस हेलीकॉप्टर पर फायरिंग का भी कोई असर नहीं होगा. इसका ट्रायल सियाचिन ग्लेशियर से लेकर राजस्थान के रेगिस्तान तक हो चुका है. कई मायनों में यह हेलीकॉप्टर अपाचे से बेहतर माना जा रहा है. अपाचे का वजन 10 टन है जिसके कारण यह कारगिल या सियाचिन की चोटी पर लैंडिंग और टेक ऑफ नहीं कर सकता लेकिन भारत का हेलीकॉप्टर उन जगहों पर भी पहुंच सकता है.
